Thekua Intresting Facts: बिहार के विश्वप्रसिद्ध पर्व 'छठ पूजा' का महाप्रसाद 'ठेकुआ' सभी को बेहद पसंद होता है। ठेकुआ की दीवानगी इस कदर है कि जिस शहर में भी बिहार प्रान्त के लोग काम करते हैं तो उनके सहकर्मी से उन्हें घर से ठेकुआ लाने के लिए जरूर कहते हैं ताकि इस महाप्रसाद का अमृत जैसा स्वाद उनको चखने को मिल जाए। अगर आप भी ठेकुआ के दीवाने हैं तो आपको ये तो पता ही होगा कि इसे कैसे बनाया जाता है। वैसे इस समय सोशल मीडिया पर 'छठ' के अलावा अगर कोई चीज ट्रेंड कर रही है तो वो 'ठेकुआ' ही है। क्या आपको पता है कि, ठेकुआ के एक दो नहीं बल्कि कई और नाम भी हैं। बिहार प्रान्त के लोग ठेकुआ के हर उपनाम से वाकिफ होंगे मगर यदि आपको ये नाम नहीं पता हैं तो आज हम आपको ठेकुआ के अन्य नाम भी बताएंगे।
चीनी से सराबोर ठेकुआ।

ठेकुआ के दूसरे नाम
- खजूर/खजुरिया : यह एक प्रचलित नाम है। कुछ लोग इसे चीनी से भी बनाते हैं।
- टिकरी : यह भी ठेकुआ का एक और लोकप्रिय नाम है।
- थोकनी : यह ठेकुआ का एक और नाम है, जो इसे बनाने की विधि (सांचे में दबाना) से जुड़ा हो सकता है।
- खस्ता : यह नाम उसकी कुरकुरी बनावट के कारण दिया गया है।
- ठेकरी : यह एक और नाम है जो ठेकुआ के लिए प्रयोग किया जाता है।
- थोकवा : कुछ जगहों पर इसे थोकवा भी कहते हैं।
- अगरौटा : लकड़ी के सांचे से बने होने के कारण इसे यह नाम भी दिया जाता है।
- खमोनी: ठेकुआ को खमोनी और खबौनी दोनों नामों से पुकारा जाता है।
- अपूप : कई रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि, 'अपूप' ऋग्वैदिक काल (लगभग 3700 साल पहले) का एक मिष्ठान था जिसका आधुनिक रूप 'ठेकुआ' है। ये भी कहा जाता है कि, अपूप ठेकुआ का संस्कृत नाम है।
- रोटना : कुछ सोशल मीडिया यूजर्स बताते हैं कि, पहाड़ों में इसे रोटना बोलते हैं जो शुभ कार्यों में बनता है।

अपूप और ठेकुआ में अन्तर
इतिहासकार मानते हैं कि 'अपूप' ठेकुआ का प्राचीन रूप है। दोनों में गेहूं के आटे, घी और गुड़ जैसी समान सामग्री का उपयोग होता है। दोनों को बनाने के लिए ही आटे, गुड़/चीनी, घी, नारियल और इलायची को मिलाकर एक सख्त आटा गूंथा जाता है। चाहे अपूप हो या ठेकुआ दोनों को इस आटे को चपटा करके गोल आकार दिया जाता है और सांचों में दबाकर डिजाइन बनाया जाता है।
खस्तेदार ठेकुआ।

ठेकुआ के रोचक तथ्य
यदि आपको नहीं पता है तो बता दें कि, ठेकुआ पर कई तरह की आकृतियां बनाई जाती हैं। ये घुमावदार डिजाइन गेहूं, गन्ना समेत मौसमी फलों जैसे कि लाल, सेब, केला और नारियल का प्रतीक हैं...जो कि नई फसल के लिए आभार जताते हैं। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए बाजार में बेक्ड ठेकुआ भी उपलब्ध हैं, जिन्हें तलने की बजाय बेक किया जाता है। इसके अलावा अब देसी घी के बने ठेकुआ ई-कॉमर्स शॉपिंग साइट्स पर भी मिलने लगा है। गौरतलब है कि, ठेकुआ का नाम 'ठोकना' शब्द से आया है, जो इसकी बनाने की प्रक्रिया को दर्शाता है, जिसमें आटे के गोल टुकड़े को एक लकड़ी के सांचे पर दबाकर या ठोककर आकार दिया जाता है।
नोट: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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