Viral Video: आपने गौर किया होगा कि भारत में विदेशी चॉकलेट लोगों के बीच काफी ज्यादा पॉपुलर है। प्रोफेशनल चॉकलेट ब्लॉगर शेरोन टेरेन्जी की भारतीयों और विदेशी चॉकलेट के प्रति उनकी पसंद पर सोशल मीडिया पोस्ट ने एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। एक इंस्टाग्राम वीडियो में ब्लॉगर ने भारतीय चॉकलेट की "दुखद वास्तविकता" पर प्रकाश डाला। उन्होंने पूछा कि, 'ऐसे देश में जहां कोको अपनी धूप से सराबोर छतरी के नीचे पनपता है, भारतीय चॉकलेट प्रेमी विदेशी चॉकलेट बार को क्यों पसंद करते हैं?' वीडियो वायरल होने में जरा भी देर नहीं लगी और सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस छिड़ गई।
भारतीयों के विदेशी चॉकलेट प्रेम की समीक्षा
इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को @thechocolatejournalist नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में चॉकलेट ब्लॉगर शेरोन टेरेन्जी ने कहा कि, 'भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में से एक है जो देश में खासकर केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में सीधे उगाए जाने वाले कोको से अपनी चॉकलेट खुद बना सकता है। कोको किसान और कृषि विज्ञानी भी असाधारण रूप से उच्च गुणवत्ता वाली चॉकलेट बनाते हैं जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता और पुरस्कार मिले हैं।'टेरेन्ज़ी ने कहा, 'भारत में सबसे लोकप्रिय चॉकलेट ब्रांड भारत में बने ब्रांड नहीं हैं। कैडबरी है, नेस्ले है, गोडिवा है, फेरेरो है। भारतीय अपने देश में बनी शानदार चॉकलेट की तुलना में बड़े पैमाने पर उत्पादित, अनैतिक और घटिया क्वालिटी की विदेशी चॉकलेट ज्यादा खाते हैं। क्या यह बेतुका नहीं है?'
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर विस्तृत चर्चा हुई। वीडियो को ऑनलाइन तीखी प्रतिक्रियाएं मिली हैं। कई यूजर्स ने मास-मार्केट और क्राफ्ट चॉकलेट के बीच कीमतों के अंतर की ओर इशारा किया है। एक यूजर ने लिखा कि, 'यह बिल्कुल भी बेतुका नहीं है क्योंकि बड़े पैमाने पर उत्पादित ब्रांड सस्ते होते हैं।' दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'मेसन एंड कंपनी उत्कृष्ट चॉकलेट बनाती है, लेकिन 200 ग्राम बार की कीमत 300-400 रुपये है, जिसे खरीदने में सक्षम लोग भी ज्यादा नहीं खरीदेंगे।' तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'भारत निश्चित रूप से इन बदलावों के लिए तैयार है! मिलते हैं फेस्टिवल में।' हालाँकि, कुछ लोग जलवायु संबंधी सीमाओं का हवाला देते हुए संशय में रहे। एक यूजर ने तर्क दिया, 'भारत की जलवायु उच्च गुणवत्ता वाले कोको की खेती के लिए आदर्श नहीं है।' उन्होंने कोको की तुलना उत्तम पनीर से की, जिसे विश्व स्तरीय गुणवत्ता प्राप्त करने के लिए विशिष्ट परिस्थितियों की आवश्यकता होती है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पर किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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