Railways Interesting Facts: भारतीय रेलवे आज दुनिया के सबसे बड़े और फेमस रेल नेटवर्कों में शुमार हो चुका है। रेलवे यात्रियों की सहजता और उनके आराम का पूरा ध्यान रखता है। यही वजह है कि ट्रेन कोच के बाहर रेलवे द्वारा विभिन्न तरह के सांकेतिक बोर्ड या चिह्न लगाए जाते हैं जिससे यात्रियों को उनके काम की जानकारी पहले ही पता चल जाए। ऐसे ही कई संकेत कुछ लोग तुरंत समझ जाते हैं मगर कुछ संकेतों को समझने में यात्रियों को बेहद परेशानी होती है। ऐसा ही एक संकेत ट्रेन के कोच के बाहर बनी पीली और सफेद लकीरें हैं। क्या आपको पता है कि, ट्रेनों के कोच पर पीली और सफेद लकीरें क्यों बनी होती हैं ? यदि आपको नहीं पता है तो आज हम आपको इसके बारे में बताने वाले हैं।
रेलवे कोच की सबसे खास बात
पहले ये जान लें कि, ICF (Integral Coach Factory) कोच स्टील से बने होते हैं और उनकी लाइफ 25 वर्ष होती हैं। यही वजह है कि, इतने समय तक इनका उपयोग पैसेंजर बोगी के तौर पर किया जाता है। इसके बाद इनको सेवा से हटा दिया जाता है। वहीं, LHB (Linke Hofmann Busch) स्टेनलेस स्टील से बने होते हैं और इनकी लाइफ 30 वर्ष होती है। अगर आपको पहचान आसानी से करनी है तो बता दें कि लाल रंग में दिखने वाली ट्रेन में LHB कोच होते हैं। मसलन, मेल एक्सप्रेस, सुपरफास्ट, राजधानी, शताब्दी, दूरंतो और तेजस जैसी तमाम ट्रेनों में एलएचबी कोच लगे हुए हैं।
ट्रेन के कोच पर लकीरें
अब आपको बताते हैं कि, ट्रेन के कोच पर लकीरें क्यों बनी होती हैं ? दरअसल, ट्रेनों के कोच पर बनी लकीरें (धारियां) डिब्बे के प्रकार और उसके उपयोग (जैसे जनरल, महिला, विकलांग) को दर्शाती हैं। सफेद लकीरें सामान्य कोच के लिए, पीली विकलांग/मेडिकल कोच के लिए, हरी महिलाओं के लिए, जबकि लाल (और अन्य) प्रीमियम या अलग श्रेणी के कोच के लिए होती हैं। इससे यात्रियों को पहचान करने में आसानी होती है। जो यात्री पढ़ने में असमर्थ होते हैं उनके लिए ये रेलवे की संचार प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

रंग और लकीरें के मतलब भी समझें
- सफेद लकीर : ये दर्शाता है कि यह एक सामान्य कोच है, जिसमें कोई आरक्षण नहीं होता
- पीली लकीर : कोच पर पीली लकीर होने का मतलब है यह डिब्बा दिव्यांग यात्रियों या चिकित्सा सहायता (Medical Aid) चाहने वालों के लिए आरक्षित है
- हरी लकीर : यह कोच महिलाओं के लिए आरक्षित होता है, जो उनकी सुरक्षा और सुविधा के लिए है।
- लाल लकीर : अक्सर प्रीमियम ट्रेनों (जैसे राजधानी, शताब्दी) में यह फर्स्ट क्लास AC कोच या उच्च श्रेणी को इंगित करता है, जबकि मुंबई लोकल में यह फर्स्ट क्लास के लिए होता है।
- ग्रे/हल्के नीले रंग : आजकल ICF कोचों को नया रूप देने के लिए ग्रे और हल्के नीले रंग का उपयोग किया जा रहा है, जो शताब्दी जैसी ट्रेनों के समान होते हैं।
ये भी होते हैं संकेत
ट्रेन के कोच पर लकीरों के अलावा भी कई तरह से संकेत दिए जाते हैं। जैसे- ट्रेन के कोच पर H1, A1 के बोर्ड लगाना। कोच पर लिखे ये अक्षर और अंक उसकी श्रेणी बताते हैं। गौरतलब है कि, ट्रेन के कोच पर बनीं लकीरें और उनका रंग भारतीय रेलवे की एक विजुअल कम्युनिकेशन प्रणाली हैं, जो यात्रियों को जल्दी और आसानी से अपने कोच की पहचान करने में मदद करती हैं, भले ही वे पढ़े-लिखे न हों।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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