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ट्रेन में मिलने वाली चादर हमेशा सफेद ही क्यों होती है, लाल-पीली या नीली क्यों नहीं; वजह चौंका देगी

Railways Interesting Facts: सोशल मीडिया पर आपने रेलवे से जुड़े कई अनोखे और अजब-गजब तथ्य पढ़े होंगे। इस बार भी एक ऐसा ही तथ्य सामने आया है जिसके बारे में हम आपको बताने वाले हैं।

Written By: Shaswat Gupta
Published : Dec 06, 2025 04:41 pm IST, Updated : Dec 11, 2025 07:46 am IST
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Image Source : ANI ट्रेन में मिलने वाली चादर।

Railways Interesting Facts: जब कोई परिवार के साथ लंबी ट्रेन यात्रा करता है तो कोशिश यही रहती है कि सफर आरामदायक हो। इसके लिए यात्री अनुभूति क्लास या कम से कम ​थर्ड एसी कोच में तो सीट बुक कराई ही जाती है। भारतीय रेलवे भी अपनी सेवाओं के माध्यम से अपने एक-एक यात्री के सफर को सुरक्षित और आरामदायक बनाने का पूरा प्रयास करता है। सेवाओं की बात करें तो भारतीय रेलवे रेलवे भोजन से लेकर हाइजीन तक के अलग-अलग मुद्दों पर यात्रियों का खास ख्याल रखता है। सिर्फ इतना ही रेलवे यात्रियों को चादर-कंबल और तकिया जैसी चीजें भी देता है। अगर कभी आपने उन चादरों को गौर से देखा होगा एक बार आपके मन में उसके रंग से जुड़ा सवाल जरूर आता होगा। क्या आपने कभी सोचा है कि, ट्रेन में मिलने वाली चादर का रंग सफेद ही क्यों होता है ? यदि आपको नहीं पता है तो आज हम आपको इसके बारे में बताते हैं। 

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स्लीपर कोच में भी मिलेगी 

अभी तक रेलवे के नियम के मुताबिक, ट्रेनों के स्लीपर कोच में या​त्रियों को कंबल-तकिया और चादर नहीं मिलते थे। मगर अब ये सुविधा जल्द ही शुरू होने वाली है। दक्षिण भारत से इसकी शुरुआत हो रही है। बता दें कि, पिछले दिनों डीआरएम चेन्नई ने इसकी घोषणा एक्स पर की थी। अपने एक्स पोस्ट में डीआरएम चेन्नई ने @DrmChennai नामक हैंडल से लिखा था, 'चेन्नई डिवीजन ने 1 जनवरी 2026 से सैनिटाइज़्ड बेडरोल लॉन्च किए हैं। दक्षिण रेलवे का चेन्नई डिवीजन, स्लीपर क्लास के यात्रियों के आराम और स्वच्छता को बेहतर बनाने के लिए अपनी तरह की पहली सेवा शुरू कर रहा है। यात्री ऑन-डिमांड - ऑन-पेमेंट के आधार पर सैनिटाइज़्ड बेडरोल का अनुरोध कर सकते हैं।'

कितना होगा चार्ज 

यदि आप स्लीपर क्लास में सफर कर रहे हैं और चादर की आवश्यकता है तो आप इसे खरीद सकते हैं। रेलवे ने इसकी कीमत काफी कम रखी है जिससे कोई भी यात्री जरूरत पड़ने पर आसानी से ले सके। यात्री सिर्फ चादर, सिर्फ तकिया या पूरा सेट भी चुन सकते हैं। ट्रेन स्टाफ से कहते ही वो पैक्ड, साफ-सुथरा बेडरोल आपको मुहैया करवा देंगे। एक बेडशीट के लिए 20 रुपये, एक तकिया और तकिया कवर के लिए 30 रुपये तो वहीं बेडशीट, एक तकिया और तकिया कवर 50 रुपये देने होंगे।

चादर का रंग सफेद ही क्यों होता है 

अब आप सोच रहे होंगे ट्रेन में मिलने वाली चादर का रंग सफेद ही क्यों होता है। ये पीली, हरी, लाल या नीली भी तो हो सकती है। सबसे पहले तो आपको बता दें कि, ट्रेन में चादर का रंग सफेद इसलिए होता है क्योंकि यह स्वच्छता, हाइजीन और मानसिक शांति का प्रतीक है। दरअसल, सफेद चादर पर गंदगी तुरंत दिख जाती है जिससे स्टाफ उसे बदल सकता है और ब्लीचिंग के लिए सफेद कपड़े सबसे उपयुक्त होते हैं। अगर चादर रंगीन होगा तो उसका रंग खराब हो सकता है। मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री में ब्लीच और गर्म पानी का इस्तेमाल होता है। सफेद कपड़े इस प्रक्रिया को झेल लेते हैं, जबकि रंगीन चादरें फीकी पड़ जाती हैं या रंग छोड़ देती हैं। 
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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