अभियोजन पक्ष के अनुसार, 24 नवंबर 2024 की शाम को बच्ची लापता हो गई थी और जब उसके परिवार के सदस्यों ने इलाके में तलाश शुरू की तो बच्ची का शव पड़ोसी सिंह के घर से बरामद हुआ। अभियोजन पक्ष ने बताया कि सिंह बच्ची को चॉकलेट के बहाने अपने घर ले गया और उसकी हत्या करने से पहले उससे दुष्कर्म किया।
वकीलों ने 27 गवाहों की जांच की
गुरप थाना प्रभारी बापी हलदर ने बताया कि आरोपी को उसी रात गिरफ्तार कर लिया गया और अपराध के 14 दिनों के भीतर सिंह के खिलाफ आरोपपत्र दायर कर दिया गया। पॉक्सो अदालत में 18 दिसंबर को मामले की सुनवाई बंद कमरे में शुरू हुई। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के वकीलों ने मामले में 27 गवाहों की जांच की। इस बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई और गहन जांच के लिए आभार व्यक्त किया।
54 दिन में आया फैसला
ममता बनर्जी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “आज, अदालत ने गुरप में छोटी बच्ची से दुष्कर्म और हत्या करने के मामले में दोषी को मौत की सजा सुनाई है और मैं इसके लिए न्यायपालिका को धन्यवाद देती हूं। मैं हुगली ग्रामीण जिला पुलिस को उनकी त्वरित कार्रवाई और गहन जांच के लिए धन्यवाद देती हूं, जिसने 54 दिनों में त्वरित सुनवाई और दोषसिद्धि सुनिश्चित की। मेरी संवेदनाएं परिवार के साथ हैं, और मैं उनके दर्द और पीड़ा को समझती हूं।” ममता ने कहा, “दुष्कर्मी के लिए हमारी दुनिया में कोई जगह नहीं है। हम सब मिलकर सख्त कानून, सामाजिक सुधार, प्रभावी और कठोर प्रशासन के माध्यम से अपने बच्चों के लिए इसे एक सुरक्षित जगह बनाएंगे। इस तरह का कोई भी अपराध बिना सजा के नहीं छोड़ा जाएगा।” (इनपुट-पीटीआई भाषा)