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आमरण अनशन के सात दिन पूरे, 2 और जूनियर डॉक्टर हुए शामिल, कुल संख्या 10 पहुंची

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Oct 12, 2024 02:39 pm IST,  Updated : Oct 12, 2024 02:39 pm IST

रामकृष्ण मिशन सेवा प्रतिष्ठान के परिचय पांडा और कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की अलोलिका घोरुई शनिवार को आमरण अनशन में शामिल हो गईं, जिससे राज्य भर में अनशन कर रहे चिकित्सकों की कुल संख्या 10 हो गई।

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आमरण अनशन के दौरान डॉक्टर Image Source : PTI

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में दो और जूनियर डॉक्टर विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए। इसके साथ ही आमरण अनशन में बैठे डॉक्टरों की संख्या 10 पहुंच गई। जूनियर डॉक्टर एक सप्ताह से आमरण अनशन कर रहे हैं। हालांकि, अब तक सरकार की तरफ से उनकी मांगो को लेकर कोई सुनवाई नहीं हुई है। आरजी कर अस्पताल में महिला चिकित्सक से दुष्कर्म और फिर उसकी हत्या किए जाने की घटना के विरोध में छह जूनियर डॉक्टर कोलकाता में पिछले सात दिनों से आमरण अनशन कर रहे हैं। शनिवार को उनके दो और सहकर्मी इसमें शामिल हो गए।

जूनियर डॉक्टर पीड़िता के परिजनों को न्याय दिलाने की मांग सहित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों के लिए हड़ताल कर रहे हैं। रामकृष्ण मिशन सेवा प्रतिष्ठान के परिचय पांडा और कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की अलोलिका घोरुई शनिवार को आमरण अनशन में शामिल हो गईं, जिससे राज्य भर में अनशन कर रहे चिकित्सकों की कुल संख्या 10 हो गई। इसमें सिलीगुड़ी के उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज के भी दो चिकित्सक शामिल हैं। इस बीच, अनशन कर रहे चिकित्सकों की हालत और खराब हो गई है। उनके साथ मौजूद चिकित्सकों ने बताया कि ‘उनकी तबीयत बिगड़’ रही है। वे पांच अक्टूबर से भूख हड़ताल कर रहे हैं। 

कमजोर हुए छात्र

प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों में से एक डॉ. देबाशीष हलदर ने बताया, ‘‘वे बहुत कमजोर हो गए हैं। उनके मूत्र में ‘क्रिएटिनिन’ भी बढ़ गया है। सात दिनों से अनशन पर बैठे रहने से निश्चित तौर पर उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है, लेकिन तब भी इससे न्याय के लिए उनका संकल्प कमजोर नहीं हुआ है।’’ इस बीच, आरजी कर अस्पताल के क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) में भर्ती जूनियर डॉक्टर अनिकेत महतो की हालत ‘गंभीर लेकिन स्थिर’ बनी हुई है। एक सीनियर डॉक्टर ने बताया, ‘‘महतो पर इलाज का असर हो रहा है तथा देखभाल के कारण उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है, लेकिन पूरी तरह से ठीक होने में उन्हें कुछ और दिन लगेंगे।’’ महतो छह अक्टूबर से आमरण अनशन कर रहे थे, लेकिन गुरुवार को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें आरजी कर अस्पताल में भर्ती कराया गया। 

डॉक्टरों का आरोप

अनशन कर रहे दो डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि पुलिस उनके परिवार के सदस्यों पर दबाव डाल रही है कि वे उन्हें भूख हड़ताल से हटने के लिए राजी करें। कोलकाता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की स्निग्धा हाजरा और नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज के आलोक वर्मा ने बताया कि हमारे परिजनों ने हमें फोन कर अनशन खत्म करने का आग्रह किया है। वर्मा ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पुलिस रविवार रात बांकुरा में हाजरा के घर जाती हुई नजर आ रही है। उन्होंने बताया, ‘‘मेरी मां ने मुझे फोन करके बताया कि उन्हें बंगाल पुलिस से फोन आया है। पुलिस ने मेरी मां को बताया कि मेरी तबीयत खराब हो रही है और उनसे आग्रह किया कि वह मुझसे अनशन खत्म करने के लिए कहें। मैंने उनसे कहा कि मैं भूख हड़ताल जारी रखूंगा और उनकी बात नहीं मानूंगा।’’ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। 

आईएमए की ममता से अपील

‘इंडियन मेडिकल एसोसिएशन’ (आईएमए) ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से स्थिति बिगड़ने से पहले हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। ‘ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन’ (एफएआईएमए) ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारी कनिष्ठ चिकित्सकों को कोई नुकसान पहुंचा तो देश भर में ‘चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह बंद’ कर दी जाएंगी। चिकित्सक अपनी महिला सहकर्मी के परिजनों को न्याय दिलाने, स्वास्थ्य सचिव एन.एस.निगम को तत्काल हटाने, अस्पतालों में पुलिस सुरक्षा बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित रिक्त पदों पर तुरंत नियुक्ति सहित अन्य मांगों के लिए प्रदर्शन कर रहे है। एक अधिकारी ने बताया कि आरामबाग मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के 38 चिकित्सकों ने अपने कनिष्ठ समकक्षों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए सामूहिक रूप से इस्तीफा देने का फैसला लिया। (इनपुट- पीटीआई भाषा)

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