पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद दुर्गापुर-फरीदपुर इलाके में अवैध टोल वसूली को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि पंचायत समिति के नाम पर तृणमूल नेताओं द्वारा सालों से खुलेआम टोल टैक्स वसूला जा रहा था, जो भाजपा सरकार बनने के बाद अचानक बंद हो गया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, धबनी इलाके में सड़क से गुजरने वाले चार पहिया वाहनों से 20 रुपये और बड़े वाहनों से 50 रुपये या उससे अधिक रकम ली जाती थी। आरोप है कि यह वसूली पिछले 7-8 सालों से जारी थी।
विरोध करने वालों को दी जाती थी धमकियां
बताया जा रहा है कि शुरुआती दौर में एक बार टेंडर हुआ था, लेकिन बाद में बिना नए टेंडर के ही टोल वसूली जारी रही। नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय तृणमूल नेता ने दावा किया कि टेंडर की अवधि समाप्त होने के बाद भी मामूली भुगतान के जरिए इसकी अवधि बढ़ा दी जाती थी और जबरन वसूली जारी रहती थी। विरोध करने वालों को धमकियां भी दी जाती थीं।
पीडब्ल्यूडी के अधीन है ये विभाग
सबसे बड़ा सवाल इस बात को लेकर उठ रहा है कि जिस सड़क पर टोल लिया जा रहा था, वह कथित तौर पर पीडब्ल्यूडी (पूर्त विभाग) के अधीन है। ऐसे में पंचायत समिति वहां टोल वसूली कैसे कर रही थी, इस पर अब बहस तेज हो गई है।
भाजपा की जीत के बाद बंद हुई वसूली
4 मई को राज्य में भाजपा की जीत के बाद अचानक टोल वसूली बंद हो गई। इसके बाद से वहां कोई कर्मचारी या वसूली करने वाला दिखाई नहीं दिया। इसी तरह हेतेडोबा और सरपी इलाके में चल रहे अन्य टोल टैक्स भी बंद हो गए हैं।
जबरन लोगों से वसूला जाता था पैसा
इस मुद्दे पर भाजपा ने तृणमूल पर तीखा हमला बोला है। भाजपा के आसनसोल सांगठनिक जिला महासचिव श्रीदीप चट्टोपथ्याय ने आरोप लगाया कि तृणमूल विभिन्न जगहों पर अवैध तरीके से लोगों से जबरन पैसा वसूलती थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निर्देश के बाद ऐसे अवैध कामों पर रोक लगाई जा रही है।
पूरी तरह पंचायत समिति के अधीन था टोल
हालांकि, सभी आरोपों को खारिज करते हुए दुर्गापुर-फरीदपुर पंचायत समिति के अध्यक्ष कल्याण शॉ मंडल ने कहा कि टोल पूरी तरह पंचायत समिति के अधीन था और उसकी अवधि 31 अप्रैल को समाप्त हो गई थी। उन्होंने बताया कि सरकारी अनुमति से कुछ दिन और टोल चलाया गया, लेकिन 4 तारीख के बाद इसे बंद कर दिया गया। फिलहाल नया टेंडर होगा या नहीं, इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।
बिज्जू मंडल की रिपोर्ट