West Bengal Assembly Election Result 2026 : 4 मई 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आए और भारतीय राजनीति में ऐतिहासिक उलटफेर दर्ज किया गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भारी बहुमत के साथ सत्ता हासिल कर ली, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) 15 साल बाद बुरी तरह हार गई। रात 11 बजे तक चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा ने 206 सीटें जीतीं, जबकि TMC मात्र 81 सीटों पर सिमट गई। बंगाल में भगवा लहर का खुमार गली-नुक्कड़, चौक-चौराहों से लेकर हावड़ा ब्रिज तक दिखाई दिया। मगर, लोगों के मन में अब भी ये सवाल है कि इस ऐतिहासिक जीत में आखिर सबसे बड़ी जीत और सबसे बड़ी हार किसे मिली ? यदि आप भी यही सोच रहे हैं तो आपकी इस शंका का समाधान भी इस रिपोर्ट में होगा।
ममता बनर्जी को मिली सबसे बड़ी हार
सूबे की गद्दी पर 15 सालों से काबिज वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बंगाल के इस चुनाव में सबसे बड़ी हार मिली। बतौर मुख्यमंत्री नैतिक तौर पर ये ममता बनर्जी की सबसे बड़ी हार है। भवानीपुर (कोलकाता) सीट पर भाजपा के सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें 15,105 वोटों के अंतर से हराया। यह सीट ममता का गढ़ मानी जाती थी, लेकिन सुवेंदु की ताकत और एंटी इनकंबेसी ने सब बदल दिया। ममता पहले चरण में आगे रहीं, लेकिन बाद के राउंड में पिछड़ गईं। यह हार सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि TMC के पूरे शासन पर जनता की मुहर है।
आनन्दमय बर्मन को मिली सबसे बड़ी जीत
माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी विस सीट से भाजपा के उम्मीदवार आनन्दमय बर्मन ने रिकॉर्ड वोटों के अंतर से बाजी मार ली। इस सीट पर TMC उम्मीदवार शंकर मालाकर चुनावी मैदान में थे जिन्हें महज 62640 वोट मिले। वहीं भाजपा के कैंडिडेट आनन्दमय बर्मन ने 104265 वोटों के अंतर से ममता के उम्मीदवार को हरा दिया। कई अन्य सीटों जैसे मॉन्टेस्वर पर भाजपा ने TMC मंत्रियों को 14,000-15,000 वोटों से हराया। जानकारों का मानना है कि, कुल मिलाकर भाजपा का वोट शेयर करीब 45-46% रहा, जबकि TMC का 38-40% के आसपास सिमट गया।
बंगाल चुनाव में ये थे प्रमुख मुद्दे
इस चुनाव में स्थानीय मुद्दे राष्ट्रीय मुद्दों से ज्यादा प्रभावी साबित हुए। इन्हें इस प्रकार समझा जा सकता है:
- संदेशखाली कांड और महिलाओं की सुरक्षा: TMC नेताओं पर महिलाओं पर अत्याचार के आरोप ने पूरे राज्य में आक्रोश पैदा किया।
- आरजी कर अस्पताल कांड: डॉक्टरों की सुरक्षा और महिलाओं पर बढ़ते अपराध ने युवा वोटरों को TMC से दूर किया।
- SIR (Special Intensive Revision) और वोटर लिस्ट: करोड़ों नाम हटने (खासकर मुस्लिम बहुल इलाकों में) को लेकर विवाद रहा, लेकिन भाजपा ने इसे विकास और सुशासन से जोड़कर फायदा उठाया।
- बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण: 15 साल के TMC शासन में नौकरियों की कमी, घोटालों और सांप्रदायिक तुष्टीकरण के आरोप प्रमुख रहे।
- बंगाली अस्मिता vs विकास: TMC ने बंगाली गौरव का नारा दिया, जबकि भाजपा ने सुशासन, रोजगार, सीमा सुरक्षा और हिंदू एकजुटता पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने ऐतिहासिक जीत पर दी प्रतिक्रिया
नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार शाम चुनावी राज्यों में भाजपा की जीत पर कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है, 'जब वर्षों की साधना सिद्धि में बदलती है तो चेहरे पर जो खुशी होती है, वो खुशी मैं देशभर के बीजेपी कार्यकर्ता के चेहरे पर देख रहा हूं। आज का यह दिन कई मायनों में खास है। देश के उज्जवल भविष्य की उद्घोषणा का दिन है। भरोसे का दिन है। भरोसा भारत के महान लोकतंत्र पर, भरोसा परफॉर्मेंस की कसौटी पर, भरोसा एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना पर.. मैं बंगाल, असम, केरल, पुड्डुचेरी और तमिलनाडु की जनता आभार व्यक्त करता हूं।'
यह भी पढ़ें
'गंगोत्री से लेकर गंगा सागर तक कमल ही कमल खिला', बंगाल और असम में बंपर जीत पर PM मोदी का संबोधन