साउथ कोलकाता का एक पॉश इलाका है टॉलीगंज, जिसे “मिनी-मुंबई” के नाम से भी जाना जाता है। टॉलीगंज साउथ 24 परगना जिले में है और जादवपुर लोकसभा सीट बनाने वाले सात हिस्सों में से एक है। टॉलीगंज सीट पहली बार 1951 में अस्तित्व में आया और साल 1952 में अपने पहले चुनाव के समय इसकी तीन असेंबली सीटें थीं, जिन्हें साल 1957 के चुनावों से एक असेंबली सीट बना दिया गया। इस सीट पर शुरू से ही लेफ्ट पार्टियों का लंबे समय तक दबदबा रहा, लेफ्ट ने इस सीट पर आठ बार जीत हासिल की, जिसमें से सात बार सात CPI(M) ने, एक बार यूनिफाइड CPI ने और फिर 1957 के चुनावों में कांग्रेस ने दो बार और फिर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने एक बार यह सीट जीती थी।
टॉलीगंज में फिलहाल है तृणमूल का दबदबा
टॉलीगंज सीट पर तृणमूल कांग्रेस ने 2001 से लगातार पांच बार जीत हासिल की जिसकी वजह से इस सीट को तृणमूल का गढ़ कहा गया है। कैबिनेट मंत्री अरूप बिस्वास ने 2006 से चार बार इस सीट पर जीत दर्ज की है। 2009 के लोकसभा चुनावों में CPI(M) टॉलीगंज सीट से जीती। लेकिन 2014 से तृणमूल कांग्रेस लगातार इस सीट पर जीत का परचम लहरा रही है और इस सीट पर CPI(M) को पीछे छोड़कर तृणमूल की मुख्य चैलेंजर भाजपा बनी हुई है, ऐसा 2021 के विधानसभा चुनाव में देखा गया।
टॉलीगंज का समीकरण
टॉलीगंज में साल 2019 में 2,57,830 वोटर्स थे, 2021 में 2,69,713 और 2024 में 2,63,402 रजिस्टर्ड वोटर थे, जिसमें अनुसूचित जाति के वोटरों की संख्या लगभग 10 से12 प्रतिशत है, जो सबसे ज्यादा है। हाल के सालों में इस सीट से वोटरों के टर्नआउट में बड़ी गिरावट आई है। यहां वोटर टर्नआउट की बात करें तो साल 2016 में 75.34 प्रतिशत, 2019 में 72.94 प्रतिशत और 2021 में सिर्फ़ 68.98 प्रतिशत थी।
2026 के विधानसभा चुनावों में टॉलीगंज सीट बचाने के लिए तृणमूल कांग्रेस पूरा जोर लगाएगी तो वहीं भाजपा के लिए भी इस सीट को जीतना मुख्य चुनौती है। साल 2021 के चुनाव में आसनसोल के मौजूदा सांसद और सिंगर बाबुल सुप्रियो को मैदान में उतारने की भाजपा की रणनीति काम नहीं आई थी और उसके बाद बाबुल सुप्रियो तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे और फिलहाल वे ममता बनर्जी सरकार में मंत्री हैं। भाजपा को इस सीट पर जीत के लिए किसी भरोसेमंद उम्मीदवार की तलाश करनी होगी।
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