लुआंडा: अंगोला की राजधानी लुआंडा में डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ 2 दिनों तक चले उग्र विरोध प्रदर्शनों ने शहर को हिलाकर रख दिया। पुलिस के मुताबिक, इस हंगामे में 4 लोगों की जान चली गई, जबकि 500 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए हैं। यह बवाल सोमवार को उस वक्त शुरू हुआ, जब सरकार के हालिया फैसले से डीजल की कीमतों में 30 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ। इस बढ़ोतरी का सीधा असर मिनी बस टैक्सियों पर पड़ा, जो अंगोला के आम लोगों का सबसे मशहूर और किफायती सवारी साधन है। टैक्सी किराए में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी ने लोगों का गुस्सा भड़का दिया, जिसके बाद सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए।
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पुलिस ने हालात पर काबू पाने के लिए सख्ती बरती
पुलिस प्रवक्ता मातेउस डे लेमोस रोड्रिग्स ने मंगलवार को बताया कि प्रदर्शनकारियों ने शहर में जमकर हंगामा मचाया। कई जगहों पर तोड़फोड़ की गई, दुकानों में लूटपाट हुई, गाड़ियां और बसें क्षतिग्रस्त कर दी गईं। सड़कों पर बैरिकेड्स लगाकर रास्ते जाम किए गए, जिससे लुआंडा में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस ने हालात पर काबू पाने के लिए सख्ती बरती और सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि अब शहर के ज्यादातर हिस्सों में अमन-चैन बहाल हो चुका है।
जुलाई की शुरुआत में भी हुए थे जोरदार प्रदर्शन
यह पहली बार नहीं है जब अंगोला में ईंधन कीमतों को लेकर बवाल हुआ हो। इस महीने की शुरुआत में भी इसी मुद्दे पर प्रदर्शन हुए थे। तब ह्यूमन राइट्स वॉच ने पुलिस पर इल्जाम लगाया था कि उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा ताकत का इस्तेमाल किया। अंगोला में विरोध प्रदर्शनों पर सख्ती के आरोप कोई नई बात नहीं हैं। यहां की सत्ताधारी पार्टी, पीपुल्स मूवमेंट फॉर द लिबरेशन ऑफ अंगोला (MPLA) 1975 में पुर्तगाल से आजादी के बाद से लगातार सत्ता में है। कई लोग सरकार पर यह इल्जाम लगाते हैं कि वह जनता की आवाज को दबाने के लिए सख्त कदम उठाती है।
तेल और हीरे जैसे खनिजों के लिए मशहूर है अंगोला
अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से में स्थित अंगोला का एक खूबसूरत मुल्क है जो अपनी प्राकृतिक संपदा, खासकर तेल और हीरे के लिए मशहूर है। इसकी राजधानी लुआंडा अपने खूबसूरत समुद्र तटों और शानदार संस्कृति के लिए जाना जाता है। लेकिन इसके बावजूद इस देश के आम लोग महंगाई, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी जैसे फैसले लोगों का गुस्सा भड़का देते हैं और वे सड़कों पर उतर आते हैं। (AP)