येरूशलेम: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसके बारे में सुनकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाक आर्मी चीफ असीम मुनीर के सीने पर सांप लोट जाएगा। दरअसल इजरायल ने अपने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में तीन यहूदी बस्तियों में 764 और मकानों के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। यह फैसला फ़िलस्तीनी इलाके में तनाव को और भड़काने वाला है। वहीं हमास आतंकियों के पाकिस्तानी हमदर्दों को यह फैसला चुभने वाला है। इससे पहला गाजा पर पेश किए गए शांति प्रस्ताव पर भी पाकिस्तान पहले तो ट्रंप के दबाव में सहमति और बाद में कड़ी नाराजगी जाहिर कर चुका है।
इजरायल ने किया बड़ा ऐलान
इजरायल के वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मोत्रिच ने बुधवार को बताया कि वेस्ट बैंक में बस्ती निर्माण योजनाओं के लिए ज़िम्मेदार हायर प्लानिंग काउंसिल ने हशमोनाइम में 478, बेतार इलित में 230 और गिवात ज़ेव में 56 आवासीय इकाइयों को मंजूरी दी है। खुद एक बस्ती-निवासी और बस्ती नीति बनाने वाले स्मोत्रिच ने इसे “बस्तियों को मज़बूत करने और जीवन, सुरक्षा तथा विकास की निरंतरता सुनिश्चित करने की स्पष्ट रणनीतिक चाल” बताया। उन्होंने कहा कि उनके पद संभालने के बाद से वेस्ट बैंक में अब तक कुल 51,370 आवासीय इकाइयों को मंजूरी मिल चुकी है।
इजरायल के इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय समुदायों में भी खलबली मच गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का बड़ा हिस्सा इन बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ़ अवैध मानता है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इनके विस्तार के खिलाफ़ कई प्रस्ताव पारित किए हैं। फ़िलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के प्रवक्ता नबील अबू रुदैनह ने इस कदम की कड़ी निंदा की और कहा कि यह बस्ती नीति “क्षेत्र को आग लगाने और हिंसा तथा युद्ध के चक्र में धकेलने” का हिस्सा है। उन्होंने ट्रम्प प्रशासन से मांग की कि वह इजरायल पर बस्ती विस्तार रोकने का दबाव डाले “ताकि राष्ट्रपति ट्रम्प के युद्ध रोकने और क्षेत्र में स्थिरता लाने के प्रयास सफल हो सकें”। यह फैसला उस इजरायली सरकारी दस्तावेज़ के महज़ एक महीने बाद आया है जिसमें वेस्ट बैंक के एक बड़े ऐतिहासिक स्थल के हिस्सों पर कब्ज़ा करने की योजना दिखाई गई थी।
अगस्त में भी इजरायल ने एक विवादास्पद बस्ती परियोजना को मंजूरी दी थी जो वेस्ट बैंक को व्यावहारिक रूप से दो हिस्सों में बाँट देगी। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार पर फ़िलस्तीनियों और मानवाधिकार संगठनों का गंभीर आरोप है कि वह वेस्ट बैंक में बस्ती विस्तार तेज़ करके भविष्य में फ़िलस्तीनी राज्य बनने की संभावना को पूरी तरह खत्म करना चाहती है। 1967 के युद्ध में इजरायल ने वेस्ट बैंक, पूर्वी येरूशलेम और गाज़ा पट्टी पर कब्ज़ा किया था। ये वे इलाके हैं जिन्हें फ़िलस्तीनी अपने भावी राज्य के लिए मांगते हैं।
वेस्ट बैंक में 5 लाख से ज़्यादा और विवादित पूर्वी येरूशलेम में 2 लाख से ज़्यादा यहूदी बसाए जा चुके हैं। नेतन्याहू सरकार में बस्ती आंदोलन के कट्टर समर्थक दूर-दक्षिणपंथी नेता हावी हैं, जिनमें स्मोत्रिच और पुलिस बल की ज़िम्मेदारी संभालने वाले मंत्री इतामार बेन-ग्वीर शामिल हैं। हाल के महीनों में वेस्ट बैंक में फ़िलस्तीनियों पर बस्ती-निवासियों के हमले भी तेज़ हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवीय कार्यालय के अनुसार, अक्टूबर में जैतून की फसल के मौसम में औसतन रोज़ आठ हमले हुए।
यह 2006 में डेटा इकट्ठा करना शुरू करने के बाद सबसे ज़्यादा है। नवंबर में 24 नवंबर तक कम-से-कम 136 और हमले दर्ज किए गए।बस्ती-निवासियों ने गाड़ियाँ जलायीं, मस्जिदों को अपवित्र किया, औद्योगिक इकाइयों में तोड़फोड़ की और फसलों को नष्ट किया। इजरायली अधिकारियों ने हिंसा की कभी-कभार निंदा करने के अलावा कोई ठोस कदम नहीं उठाया। (एपी)
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