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बिगड़ रहे संबंधों के बीच किम जोंग ने दी शी को बधाई, जानें क्या है इसके मायने

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Oct 27, 2017 01:54 pm IST,  Updated : Oct 27, 2017 02:09 pm IST

माना जा रहा है कि कोरियाई तानाशाह द्वारा शी की तारीफ में कसीदे पढ़ना और दोनों देशों के बीच संबंधों में प्रगति की उम्मीद करना उत्तर कोरिया और चीन के संबंध प्रगाढ़ करने की कोशिश है...

Kim Jong Un and Xi Jinping | AP Photo- India TV Hindi
Kim Jong Un and Xi Jinping | AP Photo

प्योंगयांग: उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम जोंग उन ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को एक बार फिर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) का महासचिव चुने जाने पर बधाई दी। माना जा रहा है कि कोरियाई तानाशाह द्वारा शी की तारीफ में कसीदे पढ़ना और दोनों देशों के बीच संबंधों में प्रगति की उम्मीद करना उत्तर कोरिया और चीन के संबंध प्रगाढ़ करने की कोशिश है। तमाम मनमुटाव के बावजूद चीन आज भी उत्तर कोरिया का हितैषी माना जाता है और किम कभी नहीं चाहेंगे कि उनका यह सदाबहार दोस्त उनसे दूर जाए। यही वजह है कि किम ने CPC की 19वीं कांग्रेस के सफलतापूर्वक आयोजन पर शी की तारीफ की।

किम ने बीते बुधवार को एक संदेश के जरिए शी को मुबारकबाद दी थी और कांग्रेस में निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के लिए राष्ट्रपति को शुभकामना दी। यही नहीं, किम ने अपने संदेश में कहा था कि चीन के लोगों ने समाजवाद के अपने मॉडल के विकास की शुरुआत की जिसे CPC की स्थाई समिति और शी के नेतृत्व ने एक नए युग में ऊंचाई पर पहुंचाया है। किम द्वारा शी की तारीफ यह बताती है कि वह चीन को किसी भी कीमत पर खुद से दूर नहीं जाने देना चाहते। यही वजह है कि उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों और पार्टियों के संबंध दोनों देशों के लोगों की रुचि के अनुरूप विकसित होंगे।

दोनों ऐतिहासिक दलों के बीच संबंध हाल ही में उत्तर कोरिया शासन द्वारा किए गए हथियार परीक्षण के बाद तनावपूर्ण हो गए थे। उत्तर कोरिया ने 7 सितंबर को अपना छठा और अब तक का सबसे ताकतवर परमाणु परीक्षण किया था और साथ ही 2 अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलों को लॉन्च किया था जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने चीन के सर्मथन से उसके ऊपर नए और कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। प्योंगयांग अपने सभी व्यापार के लिए चीन पर निर्भर है। चीन ने प्योंगयांग पर दबाव बनाने के लिए कई अलग से प्रतिबंध लगाए थे।

इन प्रतिबंधों में बीजिंग में कई उत्तर कोरियाई कंपनियों को बंद करना और प्योंगयांग से कपड़ा आयात पर एक सामान्य प्रतिबंध लगाना शामिल था। यही नहीं, चीन ने पेट्रोलियम की आपूर्ति को भी सीमित कर दिया गया था। इस सबके बावजूद उत्तर कोरिया के दुनिया के जिन कुछ देशों से अपेक्षाकृत बेहतर संबंध हैं, उनमें चीन शामिल है। और किम के संदेश के मायने निकालने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक किम कम से कम चीन से अपने संबंध कतई खराब नहीं करना चाहते।

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