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China: हर तरफ चीन की आंखें- पूरी दुनिया पर नजर रख रहा ड्रैगन, चप्पे-चप्पे पर लगाए जा रहे उसके कैमरे, इस मामले में कैसे काम कर रही शी सरकार?

 Written By: Shilpa
 Published : Aug 08, 2022 06:11 pm IST,  Updated : Aug 08, 2022 06:23 pm IST

China Surveillance Cameras: हिकविजन वही कंपनी है, जिसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी सरकार ने 2019 में हिकविजन से खरीदारी करना बंद कर दिया था और बाद में उन कंपनियों पर भी रोक लगा दी, जो हिकविजन के सामान का इस्तेमाल करके उसके साथ बिजनेस करती हैं।

China Surveillance Cameras- India TV Hindi
China Surveillance Cameras Image Source : INDIA TV

Highlights

  • दुनिया के तमाम देशों में लगे चीन के कैमरे
  • लंदन में चीन के बीजिंग से ज्यादा कैमरे लगे
  • अमेरिकी प्रतिबंधों का भी फायदा उठा रहा है चीन

China Surveillance Camera: चीन बीते कुछ समय से दुनिया का ऐसा देश बन गया है, जिसे लेकर पूरी दुनिया ही चिंतित है। चाहे हम भारत की बात करें या फिर अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन की, इस मामले में सभी की राय लगभग समान ही नजर आएगी। अब जो खबर सामने आई है, वो काफी हैरान कर देने वाली है। दरअसल ब्रिटिश नेता और संसद के सदस्य डैविड एल्टन ने चीन की कंपनी हांग्जो हिकविजन डिजिटल टेक्नोलॉजी को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने इसे निगरानी करने वाला बताया है। एल्टन ने कहा कि देश (ब्रिटेन) की हर गली में इस कंपनी के सर्विलांस कैमरा दिख सकते हैं। 

ठीक इसी दिन ब्रिटिश वकीलों और अन्य लोगों के "पीपुल्स ट्रिब्युनल" ने शिंजियांग में उइगर मुसलमानों के खिलाफ चीन के मानवाधिकारों के उल्लंघन को "नरसंहार" बताया है। एल्टन ने कहा कि डाटा एकत्रित करना एक ऐसी चीज है, जिसपर हम सभी को चिंता करने की जरूरत है। उन्होंने चिंता जताई कि ऐसा हो सकता है कि ब्रिटेन में सिक्योरिटी कैमरा के जरिए एकत्रित हुआ डाटा, अन्य देशों में लीक होता है। हिकविजन वही कंपनी है, जिसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी सरकार ने 2019 में हिकविजन से खरीदारी करना बंद कर दिया था और बाद में उन कंपनियों पर भी रोक लगा दी, जो हिकविजन के सामान का इस्तेमाल करके उसके साथ बिजनेस करती हैं। लेकिन ये उपाय दुनियाभर में चीनी कंपनी की बढ़त को रोक पाने में नाकाफी साबित हुए हैं।

किस शहर में कितने कैमरे लगे?

अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज और अन्य संगठनों द्वारा एकत्रित आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर के 33,000 शहरों में 24/7 यानी दिन रात 30 लाख से अधिक हिकविजन कैमरे इंटरनेट से कनेक्टिड रहते हैं। इसी कंपनी के कैमरे लंदन में अमेरिका और यूरोपीय शहरों से भी अधिक लगे हैं। दिसंबर 2021 तक, लंदन में हिकविजन के 33,636 कैमरे लगे थे, जबकि चीन के खुद के शहर बीजिंग में ये संख्या 26,760 है। अन्य एशियाई शहरों की बात करें, तो दक्षिण कोरिया के सियोल में 32,067 कैमरे, वियतनाम के हो चि मिन्ह शहर में 72,269 कैमरे और थाईलैंड के बैंगकॉक में 22,274 कैमरे लगे हुए हैं। दुनियाभर में चीन के निगरानी करने वाले उपकरणों की बाढ़ आई हुई है। बहुत से कैमरे कोविड-19 के संक्रमण को रोकने की आड़ में लगाए गए थे।

जापान के दाई-इची लाइफ रिसर्च इंस्टीट्यूट के कार्यकारी शोधकर्ता तासुकु काशिवामुरा ने चिंता जताते हुए बताया कि यह साफ नहीं है कि नेट से कनेट हुए सर्विलांस कैमरा के डाटा का इस्तेमाल कैसे होता है। लेकिन उन्हें दुनियाभर में फैलते चीनी कैमरों को रोकने का कोई तरीका नजर नहीं आ रहा। क्योंकि ये न केवल सस्ते हैं बल्कि आसानी से इस्तेमाल भी किए जा सकते हैं। चीन का उद्देश्य एक ऐसा बड़ा देश बनना है, जो अर्थव्यवस्था और तकनीक दोनों ही मामलों में अमेरिका को पछाड़ना चाहता है। लेकिन यहां की आबादी कम हो रही है। जिसके कारण आने वाले वक्त में बुजुर्गों की संख्या युवाओं से अधिक होगी। यानी वो आबादी जो देश की अर्थव्यवस्था में योगदान नहीं देगी और दूसरों पर निर्भर रहेगी। ऐसे में चीन भविष्य में आगे तक नहीं देख पा रहा है।

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घरेलू इंडस्ट्री को बनाया जा रहा हाई-टेक

चीनी नेताओं का ऐसा मानना है कि घरेलू उद्योग को हाई-टेक तरीके से ट्रांसफॉर्म करके ही देश को बड़ा बनाया जा सकता है। चीन की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं का एक पिलर सेमीकंडक्टर है। इसके उद्योग का केंद्र शंघाई शहर के उत्तर-पश्चिम में हुआन में है। चीन आगे चलकर भी सेमीकंडक्टर के क्षेत्र को पूरी तरह समर्थन देगा। वो सेमीकंडक्टर पावरहाउस बनना चाहता है। कंपनियां देश के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनके विजन के प्रति ईमानदारी दिखाने के लिए चीन को सेमीकंडक्टर पावरहाउस बनाने के अभियान में अपना योगदान दे रही हैं। वो इसे समाज में अपनी जिम्मेदारी मान रही हैं।   

अमेरिकी मार्केट रिसर्चर पिचबुक के मुताबिक, चीनी चिप के स्टार्टअप्स ने 2021 में 7.7 बिलियन डॉलर के निवेश को आकर्षित किया है। जो इससे पिछले साल से लगभग दोगुना है। दुनिया भर में इस क्षेत्र में चीनी कंपनियों का निवेश 74 फीसदी है, जिसमें अलीबाबा ग्रुप और टेनसेंट जैसे आईटी दिग्गज फंडिंग के प्रमुख स्रोत हैं। यह शी के इस संकल्प के अनुरूप है कि कम्युनिस्ट पार्टी "पूरे चीन - उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम का नेतृत्व करेगी" और देश के तकनीकी लीडर्स को लाइन पर लाने के लिए व्यापक प्रयास करेगी। मतलब ये कि तकनीक के इस बिजनेस में सख्ती बरती जा रही है।

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अमेरिकी सामान के तलाशे गए विकल्प

जिस हिकविजन कंपनी के कैमरे दुनियाभर में लग रहे हैं, उसके वरिष्ठ उपाध्यक्ष हुआंग फांगहोंग का कहना है कि उन्होंने कंपनी के सर्विलांस उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले अमेरिकी सामान के विकल्प तलाशने के लिए खूब रिसर्च की है। इसमें उन्हें काफी हद तक सफलता मिली है। 2020 के सर्वे से पता चलता है कि कंपनी के सर्विलांस उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले 60 फीसदी से अधिक सेमीकंडक्टर अमेरिका में निर्मित थे। अब ऐसा भी कहा जा रहा है कि अमेरिका के प्रतिबंधों का चीन को एक तरह से फायदा ही हो रहा है। क्योंकि जो चीनी कंपनियां अमेरिका में बने सामान को अपने उपकरणों में इस्तेमाल करती थीं, वो भी अब घरेलू स्तर पर बने यानी चीन में निर्मित सामान का इस्तेमाल कर रही हैं। इससे चीन का घरेलू तकनीकी बिजनेस फल फूल रहा है।

चीन अमेरिका के प्रतिबंधों को अवसर के तौर पर देख रहा है। चीन में अधिकारियों ने अचानक देश के आर्थिक विकास में प्रमुख तौर पर योगदान देने वाले इंटरनेट क्षेत्र पर नकेल कसी है। जैक मा की अलीबाबा ग्रुप जैसी बड़ी निजी कंपनियों पर या तो जुर्माना लगाया गया या फिर प्रतिबंधों की धमकी दी गई। चीन में अगर बिजनेस को सरकार की मर्जी के बगैर चलाया जाता है, तो अधिकारी उसपर दबाव बनाने की पूरी कोशिश करते हैं। 

महिला पर कर चोरी का आरोप लगाया गया

चीन में इंटरनेट कंपनियों के लिए वित्तीय क्षेत्र में कदम रखना शेर की पूंछ पर पैर रखने के बराबर है। यहां दिसंबर में विया नामक महिला, जिसे 'लाइव कॉमर्स की क्वीन' कहा जाता है, उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है। लाइव कॉमर्स में लाइवस्ट्रीम के जरिए सामान का प्रमोशन किया जाता है और लोगों को उसे खरीदने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस महिला पर कर चोरी का आरोप लगाया गया और उससे जुर्माना एवं कर की वसूली सहित 1.3 बिलियन युआन मांगे गए। विया पर कार्रवाई से अलीबाबा को बड़ा झटका लगा। 2020 के आखिर से ही जिन भी इंटरनेट कंपनियों पर सरकार को भरोसा नहीं था, उनपर नकेल कसना जारी रखा गया। शी "साझा समृद्धि" की नीति को देश में बढ़ावा दे रहे हैं। इसके साथ ही अब कंपनियां भी सरकार की इस पहल में बढ़ चढ़कर योगदान दे रही हैं, ताकि वह ये साबित कर सकें कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की दुश्मन नहीं हैं। 

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