Israel Iran War: इजरायल और ईरान के बीच जंग थम चुकी है। दोनों ही देश मंगलवार से लागू हुए सीजफायर का पालन कर रहे हैं। इस बीच बात करें जंग में हुए नुकसान की तो दोनों देशों को इसमें काफी क्षति हुई है। इजरायली हमलों में ईरान के नुकसान का आकलन किया जाए तो सबसे बड़ी क्षति उसके कम से कम 14 परमाणु वैज्ञानिकों का मारा जाना है। इन्हीं वैज्ञानिकों की निगरानी ईरान का परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ रहा था। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि जंग से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भले ही कुछ समय के लिए धक्का लगा हो लेकिन उसे रोक पाना आसान नहीं होगा।
क्या बोले फ्रांस में इजरायल के राजदूत?
फ्रांस में इजरायल के राजदूत जोशुआ जर्का ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ से कहा कि वैज्ञानिकों की मौत और हमलों में बचे परमाणु ढांचों से ईरान के लिए हथियार बनाना लगभग असंभव होगा। उन्होंने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम कुछ वर्ष नहीं बल्कि कई सालों के लिए टल गया है। हालांकि, परमाणु विश्लेषकों का यह भी कहना है कि ईरान के पास अन्य वैज्ञानिक हैं जो उनकी जगह ले सकते हैं। वैज्ञानिकों की मौत पर नजर डालें तो इनमें रसायनशास्त्री, भौतिकशास्त्री, इंजीनियर शामिल हैं। जर्का ने ‘एपी’ को बताया कि इजरायली हमलों में कम से कम 14 भौतिकविदों और परमाणु इंजीनियरों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि मारे गए लोग ईरान के शीर्ष वैज्ञानिक थे और उसके परमाणु कार्यक्रम के पीछे उनका ही दिमाग था।
अमेरिकी विशेषज्ञ ने क्या कहा?
अमेरिकी विशेषज्ञ एवं पूर्व राजनयिक मार्क फिट्जपैट्रिक ने कहा कि परमाणु कार्यक्रम की रूपरेखा तो आसपास मौजूद ही रहेगी तथा पीएचडी करने वालों की नई पौध इसका उपयोग करने में सक्षम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि परमाणु केंद्रों पर बमबारी करना या कुछ लोगों को मारने से इस परमाणु कार्यक्रम को कुछ समय के लिए पीछे धकेल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि दोनों काम एक साथ किए जाते हैं तो यह कुछ और पीछे चला जाएगा, लेकिन इस कार्यक्रम को फिर से खड़ा कर लिया जाएगा।
बातचीत के जरिए समाधान चाहते हैं यूरोपीय देश
यूरोपीय देशों की सरकारों का कहना है कि मात्र सैन्य बल से ईरान की परमाणु प्रौद्योगिकी में हुई प्रगति को खत्म नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि वो ईरानी कार्यक्रम के बारे में चिंताओं को दूर करने के लिए बातचीत के जरिए समाधान चाहते हैं। ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी ने ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में सांसदों से कहा, ‘‘हमले ईरान द्वारा कई दशकों में अर्जित प्रौद्योगिकी जानकारी को नष्ट नहीं कर सकते, ना ही उस प्रौद्योगिकी जानकारी का उपयोग करके परमाणु हथियार बनाने की किसी सरकार की महत्वाकांक्षा को नष्ट किया जा सकता है।’’ (एपी)
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