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कुवैत उठा रहा है ऐसे कदम जिससे भारतीयों पर होगा बड़ा असर! अब 'Kuwaitization' पर है फोकस

 Published : Aug 18, 2025 06:06 pm IST,  Updated : Aug 18, 2025 06:06 pm IST

कुवैत अपने यहां बड़े बदलाव कर रहा है। कुवैत इस बात पर फोकस कर रहा है कि अब हर क्षेत्र में उसके नागरिकों को ही तरजीह मिले। सरकार ने इस दिशा में कदम भी उठाए हैं। कुवैत में उठाए जा रहे कदमों की वजह से वहां रहने वाले भारतीय भी प्रभावित हो सकते हैं।

Kuwait People- India TV Hindi
Kuwait People Image Source : AP

Kuwait Focus On Kuwaitization: दुनिया में कई ऐसे देश हैं जो हर क्षेत्र में सबसे पहले अपने नागरिकों को तरजीह देते हैं। इन देशों की लिस्ट में अब कुवैत का नाम भी जुड़ गया है। अगर कहा जाए कि कुवैत भी संयुक्त अरब अमीरात (UAS) की राह पर चल पड़ा है तो गलत नहीं होगा। दरअसल, संयुक्त अरब अमीरात अब हर क्षेत्र में पहले अपने नागरिकों को तवज्जो देता है जिसमें नौकरियां भी शामिल हैं। इसी तरह से अब कुवैत ने ऐसी पहल शुरू की है। कुवैत के न्याय मंत्री, काउंसलर नासिर अल-सुमैत ने कहा है कि देश की न्यापालिका 2030 तक पूरी तरह से 'कुवैतीकरण' हो जाएगी। इसका मतलब है कि 2030 तक सभी न्यायिक पदों पर कुवैती लोग होंगे। 

कुवैत की सरकार ने क्यों की पहल?

अब आप सोच रहे होंगे कि कुवैत की सरकार ने इस तरह की पहल क्यों शुरू की है? तो इसका सीधा सा जवाब यह है कि सरकार चाहती है कि उसके देश में युवा प्रतिभाओं को अवसर मिले और वो आगे आ सकें। इतना ही नहीं सरकार का मकसद है कि कानून सहित अन्य क्षेत्रों में कुवैत आत्मनिर्भर बन सके और व्यवस्थाओं को भी आधुनिक बनाया जा सके।  

क्या है सरकार का टारगेट?

पीपुल्स मैटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री अल-सुमैत ने कहा कि सभी न्यायिक विभागों के कुवैतीकरण की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया के तहत विदेशियों की जगह योग्य और कुशल कुवैती प्रोफेशनल्स को मौका दिया जा रहा है। उन्होंने कहा है, 'हम इस मामले में फैसला ले चुके हैं और 2030 तक 100 प्रतिशत कुवैतीकरण का हमारा टारगेट है।'

यहां पहले ही हो चुका है कुवैतीकरण

इस बीच यहां यह भी बता दें कि, कुवैत के कई सेक्टर्स में कुवैतीकरण बहुत पहले हो रहा है। कुवैत ने ऑयल सेक्टर के सभी प्रमुख इंजिनियरिंग और टेक्निकल भूमिकाओं में अपने नागरिकों को जगह दी है। साल 2002 में शुरू हुए Manpower Contractors Kuwaitization Initiative के तहत तेल क्षेत्र में कुवैती नागरिकों को उचित वेतन, लाभ और स्थिर रोजगार दिया जाता है। इतना ही नहीं 2024 तक, कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (केपीसी) और उसकी सहायक कंपनियों ने कथित तौर पर शीर्ष पदों पर 100 फीसदी राष्ट्रीय स्टाफिंग हासिल कर ली है। 

भारतीयों पर क्या होगा असर?

गल्फ न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 31 दिसंबर 2024 तक कुवैत में लगभग 10 लाख 7 हजार भारतीय नागरिक रह रहे थे, जो कुल जनसंख्या का लगभग 20 फीसदी है। 2025 के हालिया आंकड़े बताते हैं कि कुवैत की कुल आबादी में 70 फीसदी लोग प्रवासी हैं, जिनमें से लगभग 29 प्रतिशत भारतीय हैं। साल 2025 की पहली तिमाही की लेबर रिपोर्ट में बताया गया है कि कुवैत में लगभग 884,000 भारतीय कार्यरत हैं। कुवैत में इतनी बड़ी भारतीय आबादी को देखते हुए कुवैतीकरण का सबसे बड़ा असर भारतीयों या फिर यूं कहें कि भारत पर ही होने वाला है। कुवैत में भारतीयों को नौकरी मिलना अब आसान नहीं होने वाला है।

विदेशियों के लिए अब आसान नहीं राह

कुवैत में चिकित्सा, इंजीनियरिंग, कानून, शिक्षा, अकाउंट्स और फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में भी विदेशियों की भर्ती काफी सख्त कर दी है। यहां भी कुवैती लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। पहले जहां इन क्षेत्रों में विदेशियों के लिए नौकरी हासिल करना आसान था, वहीं अब हालात बदलते हुए नजर आ रहे हैं। नौकरी के लिए पूरी की जाने वाली फॉर्मेलिटी को भी सख्त कर दिया गया है। 

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