वाशिंगटन: एक नये अध्ययन में पाया गया है कि गहरे और सदियों पुराने जल के कारण अंटार्कटिक महासागर जलवायु परिवर्तन और बढ़ते वैश्विक तापमान से अप्रभावित रहा है। अमेरिका के वाशिंगटन विश्वविद्यालय और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी के अध्ययन में वैज्ञानिक पहेली और तापमान के अनिरंतर पैटर्न को सुलझाया गया। निरंतर अध्ययन एवं जलवायु माडल दिखाते हैं कि अंटार्कटिका के आस पास की अद्वितीय धाराएं गहरे और सदियों पुराने जल को लगातार सतह की तरफ खींचती हैं।
यह सदियों पुराने पानी ने मशीन युग से पहले धरती के वातावरण को अंतिम बार स्पर्श किया था और यह जलवायु परिवर्तन के प्रभाव में कभी नहीं आया। वाशिंगटन विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर और अध्ययन प्रमुख कायले आर्मोर ने कहा, कार्बन डाई आक्साइड बढ़ने के साथ आप दोनों धुव्रों पर तापमान की ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद करेंगे, लेकिन हम ऐसा केवल एक ध्रुव पर ही देखते हैं, ऐसे में लगता है कि दूसरी ओर कुछ और चल रहा है।
अंटार्कटिका के आसपास लगातार चलने वाली तेज हवाएं सतही जल को उत्तर की ओर धकेलती हैं और नीचे से लगातार जल को ऊपर की ओर खींचती हैं। दक्षिण महासागर का जल इतनी ज्यादा गहराई और इतने दूर वाले स्रोत से आता है कि जल को आधुनिक जलवायु परिवर्तन का अनुभव करने के लिए सदियों का वक्त लगेगा।