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अमेरिका ने क्यों लिया 3 साल तक H-1B वीजा पर रोक लगाने का फैसला, जानें ट्रंप प्रशासन की क्या है रणनीति?

 Published : Apr 25, 2026 10:44 am IST,  Updated : Apr 25, 2026 12:28 pm IST

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने 3 साल तक H-1B वीजा जारी करने पर रोक लगाने वाला विधेयक पारित किया है। मगर ट्रंप प्रशासन को यह फैसला क्यों लेना पड़ा?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। - India TV Hindi
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। Image Source : AP

वाशिंगटन: अमेरिका का  H-1B वीजा चाहने वालों को ट्रंप प्रशासन बहुत बड़ा झटका देने जा रहा है। दरअसल अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन सांसदों के एक समूह ने H-1B वीजा कार्यक्रम पर तीन वर्ष की रोक लगाने वाला विधेयक पेश किया है। अगर ये विधेयक पास हो गया तो H-1B चाहने वालों की मुश्किल बहुत बढ़ जाएगी और अमेरिका जाकर वहां नौकरी करने का सपना देखने वाले विदेशी लोगों को अगले 3 साल तक किसी को भी H-1B वीजा नहीं मिलेगा। भारतीयों पर भी इसका बड़े पैमान पर कुप्रभाव पड़ेगा।

रिपब्लिकन सांसद क्यों चाहते हैं  H-1B वीजा  पर रोक?

रिपब्लिकन सांसदों का कहना है कि इस कार्यक्रम को अपहृत कर लिया गया है। ताकि अमेरिकी कामगारों को सस्ते विदेशी श्रमिकों से बदल दिया जाए। यानी विदेशी श्रमिकों की जगह अमेरिकी लोगों की नियुक्तियां की जाएं। अरिजोना के कांग्रेसमैन एली क्रेन ने 'End H-1B Visa Abuse Act of 2026' नामक यह विधेयक पेश किया है, जिसके सह-प्रायोजक सात अन्य रिपब्लिकन सांसद हैं। इस विधेयक में H-1B कार्यक्रम में सुधार का प्रस्ताव है, जिसमें वार्षिक कोटा 65,000 से घटाकर 25,000 करने, न्यूनतम वेतन 2 लाख डॉलर प्रति वर्ष रखने और H-1B वीजा धारकों को अपने आश्रितों को अमेरिका नहीं लाने देने का प्रावधान शामिल है। टेक्सास के कांग्रेसमैन ब्रायन बेबिन, ब्रैंडन गिल, वेस्ले हंट, कीथ सेल्फ, टेनेसी के एंडी ओगल्स, अरिजोना के पॉल गोसार और कैलिफोर्निया के टॉम मेकलिंटॉक ने इस विधेयक के मूल सह-प्रायोजक के रूप में हस्ताक्षर किए हैं। 

किसके लिए और क्यों H-1B वीजा होता है जरूरी?

H-1B वीजा कार्यक्रम का उपयोग अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियां व्यापक रूप से करती हैं।  H-1B वीजा विदेशी कामगारों को नियुक्त करने के लिए जरूरी होता है। भारतीय टेक्नोलॉजी कार्यकर्ता और चिकित्सक पेशे से जुड़े लोग H-1B वीजा धारकों में सबसे बड़े समूहों में से एक हैं। विधेयक में H-1B कार्यक्रम में निम्नलिखित बदलाव प्रस्तावित हैं। 

  1. लॉटरी सिस्टम की जगह वेतन-आधारित चयन प्रणाली लागू करना।
  2. नियोक्ताओं को प्रमाणित करना कि वे योग्य अमेरिकी कामगार नहीं ढूंढ़ पाए और उन्होंने हाल में छंटनी नहीं की है।
  3. H-1B कामगारों को एक से अधिक नौकरी करने से रोकना।
  4. थर्ड-पार्टी स्टाफिंग एजेंसियों को H-1B कामगारों को नियुक्त करने से मना करना।

प्रस्तावित विधेयक में क्या है?

रिपब्लिकन सांसदों द्वारा सदन में पेश  H-1B वीजा विधेयक में संघीय एजेंसियों को गैर-आप्रवासी कामगारों को स्पॉन्सर या नियुक्त करने से रोकने, Optional Practical Training (OPT) को समाप्त करने और H-1B वीजा को स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) में बदलने की अनुमति न देने का प्रावधान भी है, ताकि गैर-आप्रवासी वीजा अस्थायी ही रहें। प्रस्तावित बदलावों में यह भी शामिल है कि गैर-आप्रवासियों को एक स्टेटस से दूसरे स्टेटस में बदलने से पहले अमेरिका छोड़ना अनिवार्य होगा। कांग्रेसमैन एली क्रेन ने कहा, "संघीय सरकार को मेहनती अमेरिकी नागरिकों के लिए काम करना चाहिए, न कि बड़ी कंपनियों के मुनाफे के लिए। हमें अमेरिकी लोगों से यह वादा निभाना चाहिए कि टूटे हुए H-1B सिस्टम को उन्हें उन नौकरियों से बाहर नहीं करने दिया जाएगा, जिनके वे योग्य हैं।"

अमेरिका क्यों ले आया 'End H-1B Visa Abuse Act of 2026'

अमेरिका का End H-1B Visa Abuse Act of 2026' पेश करने का मकसद अमेरिकी लोगों के लिए रोजगार तक बेहतर पहुंच प्रदान करना है। यह वीजा प्रक्रिया में सख्ती लाएगा और अमेरिकियों की आजीविका को प्राथमिकता देगा। कांग्रेसमैन ब्रैंडन गिल ने कहा, "मैं रिप. एली क्रेन के H-1B वीजा सिस्टम को सुधारने और सख्त बनाने के प्रयासों का सह-प्रायोजक बनकर गर्व महसूस कर रहा हूं, ताकि हमारा आप्रवासन प्रणाली विदेशियों से पहले अमेरिकी कामगारों की सेवा करे।"

कांग्रेसमैन पॉल गोसार ने आरोप लगाया कि H-1B कार्यक्रम को "सादे और सरल शब्दों में अमेरिकी कामगारों को सस्ते विदेशी श्रम से बदलने के लिए  है।" उन्होंने कहा कि यह विधेयक उस सिस्टम पर ब्रेक लगाता है जो अपने ही लोगों के खिलाफ धांधली करते हैं। यह अमेरिकी नौकरियों को प्राथमिकता देता है। गोसार ने कहा, "अगर कोई कंपनी अमेरिकी को नौकरी दे सकती है तो उसे देनी चाहिए। कोई लूपहोल नहीं। कोई बहाना नहीं। 

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