वाशिंगटन: अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के परमाणु ठिकानों बुरी तरह से तबाह हो चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रेप ने दावा किया है कि ईरान की ओर से यह बताया गया है कि बमबारी में उसके परमाणु ठिकाने इतने तबाह हो चुके हैं कि वहां से 'न्यूक्लियर डस्ट' यानी रेडियोएक्टिव मैटेरियल निकालने की क्षमता भी उसके पास नहीं बची है। डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में यह दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि ईरानी अधिकारियों ने बताया कि परमाणु सामग्री इतनी गहराई में दब गई है कि उसे निकालना उनके लिए संभव नहीं है।
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ईरान को किसी कीमत पर परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका ईरान में दाखिल होकर यह काम कैसे करेगा। क्योंकि यह आगे की बातचीत और समझौते का विषय है। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार दोहराया कि अमेरिका ईरान को किसी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने नहीं देगा।
आर्मी जनरलों का ग्रुप अगले निर्देश का कर रहा इंतजार
व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान भी ट्रंप ने ईरान को धमकी देने के अंदाज में कहा कि उनकी सेना से जनरलों को एक बड़ा ग्रुप अगले निर्देश का इंतजार कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान को लेकर सैन्य और रणनीतिक स्तर पर कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
ईरान के प्रस्ताव को खारिज कर चुके हैं ट्रंप
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब वे ईरान के साथ जारी युद्ध को समाप्त करने संबंधी उसके (ईरान) प्रस्ताव को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताते हुए खारिज कर चुके हैं। ट्रंप को रविवार को ईरान का प्रस्ताव मिला और यह उम्मीद जताई जा रही थी कि इससे 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध को खत्म करने में सफलता मिलेगी। लेकिन ट्रंप ने इसे खारिज कर दिया। ट्रंप ने ट्र्थ सोशल पर लिखा- 'मैंने अभी-अभी ईरान के तथाकथित 'प्रतिनिधियों' का जवाब पढ़ा। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया - यह पूरी तरह अस्वीकार्य है।' इससे पहले ट्रंप ने ईरान पर लगभग 50 वर्षों से अमेरिका के साथ खेल खेलने का आरोप लगाया था। ट्रंप ने कहा कि अब वे ज्यादा समय तक खुश नहीं रह पाएंगे।
बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर भीषण हमला किया था जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई समेत ईरान के कई सैन्य लीडर मारे गए थे। इसके बाद मिडिल-ईस्ट में युद्ध शुरू हो गया था। ईरान ने मिडिल ईस्ट स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हमला बनाया। आठ अप्रैल को युद्धविराम पर सहमति के बाद हमले रोक दिए गए। अमेरिका और ईरान के बीच दुश्मनी को खत्म करने के लिए एक समझौते पर बातचीत की जा रही है, लेकिन अब तक शांति संभव नहीं हो पाई है।