लंदन: रूस-यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिसने पूरी दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया है। ट्रंप यूक्रेन को लेकर अब अपनी सोच में बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत अब वह यूक्रेन शांति के प्रयासों को छोड़ने जा रहे हैं। यानि कि अब यूरोप को रूस की आक्रामता का अकेले सामना करना होगा।
ट्रंप ने कहा कि अब यूरोपीय देशों को नेतृत्व करना होगा। उनके अनुसार कीव जंग जीत भी सकता है। मगर यूक्रेन की विजय “समय, धैर्य और खासकर यूरोप और नाटो के वित्तीय समर्थन” पर निर्भर करती है। अमेरिका की प्रतिबद्धता केवल “नाटो को हथियार सप्लाई करने तक सीमित है, ताकि नाटो उन्हें अपनी मर्जी से इस्तेमाल कर सके।” सबसे अहम बात यह है कि ट्रंप ने अपने Truth Social संदेश का अंत “सभी को शुभकामनाएं!” लिखकर किया, जो यह साफ संकेत है कि अमेरिकी राष्ट्रपति शांति समझौता करने के प्रयासों से पीछे हट रहे हैं।
ट्रंप ने अब रूस-यूक्रेन युद्ध में शांति की उम्मीदों को तोड़ दिया है। जो कि यह भी दर्शाता है कि उन्होंने अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के साथ अलग से समझौता करने की उम्मीद छोड़ दी है। कई हफ्तों तक रूस द्वारा नाटो के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ के बाद डेनमार्क के कोपेनहेगन हवाई अड्डे के आस-पास दो बार ड्रोन हमले हुए, जिनके रूस से जुड़े होने की संभावना है। यह यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की द्वारा 24 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए भाषण में भविष्यवाणी की गई डरावनी ड्रोन युद्ध की झलक जैसा है।
पुतिन की लगातार आक्रामकता कीव के यूरोपीय सहयोगियों के लिए एक खुली चुनौती है। इस गठबंधन के केंद्र में यूरोपीय संघ ने अपनी बात रखने का साहस दिखाया है। ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ की संस्थाओं ने कभी संदेह नहीं छोड़ा कि रूस का यूक्रेन के खिलाफ आक्रामक युद्ध “यूक्रेन के लिए न्यायसंगत और स्थायी शांति के साथ खत्म होना चाहिए,” जैसा कि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उसुला वॉन डेर लेयेन ने हाल ही में अपनी स्थिति रिपोर्ट में कहा।
शब्दों के परे यह गठबंधन कई संभावित समस्याओं का सामना कर रहा है। जो यह दर्शाता है कि कीव के यूरोपीय सहयोगियों को अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस गठबंधन में नाटो और यूरोपीय संघ के सदस्य देश, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं,
लेकिन अमेरिका इस समूह का हिस्सा नहीं है। इसका आकार फरवरी में 8 देशों, यूरोपीय संघ और नाटो से बढ़कर अप्रैल में 33 और सितंबर में 39 हो गया। इसका 57 सदस्यीय यूक्रेन रक्षा संपर्क समूह से संबंध पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, जो सैन्य उपकरणों के साथ किव का समर्थन करता है। (AP)
संपादक की पसंद