बिहार विधानसभा चुनाव में भागलपुर की सीट हमेशा से ही चर्चा में रही है। बीजेपी का गढ़ माना जाने वाला भागलपुर तीन बार से कांग्रेस के खाते में जा रहा है। यहां दोनों पार्टियों का जनाधार बराबर का है, लेकिन चुनावी समीकरण ऐसे बन रहे हैं कि कांग्रेस उम्मीदवार अजीत शर्मा को जीत मिल रही है। दो मौकों पर कमजोर प्रत्याशी और 2020 में चिराग पासवान की पार्टी की बगावत के चलते कांग्रेस जीत हासिल करने में सफल रही। इस बार यहां दूसरे चरण में 11 नवंबर को मतदान होना है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में इंडिया गठबंधन और एनडीए गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला है। एनडीए में बीजेपी, जेडीयू और चिराग की आरएलडी एकजुट होकर चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, विपक्षी गठबंधन में आरजेडी और कांग्रेस साथ हैं। हालांकि, जनसुराज थर्ट फ्रंट के रोल में है, जो दोनों गठबंधन के उम्मीदवारों के वोट कम करने की कोशिश करेगा।
कब किसे मिली जीत?
भागलपुर विधानसभा सीट पर हमेशा से ही कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर रही है। इन दोनों के अलावा किसी क्षेत्रीय दल के लिए यह सीट जीतना बेहद मुश्किल रहा है। 73 साल से यही दोनों पार्टियां यहां जीत हासिल करती आ रही है। खास बात यह है कि यहां अब तक 18 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, लेकिन सिर्फ छह लोग ही यहां से सांसद बने हैं। पिछले तीन बार से कांग्रेस के अजीत शर्मा जीत हासिल करते आ रहे हैं। वहीं, इससे पहले बीजेपी के अश्विनी कुमार चौबे यहां से पांच बार विधायक बने थे। कांग्रेस और बीजेपी (जनसंघ और जनता दल) नौ-नौ बार यहां से जीत हासिल कर चुके हैं।
इस बार बदल सकता है इतिहास?
भागलपुर से हमेशा ही बड़े नेता को जीत मिली है और यहां के मतदाता नए उम्मीदवारों के प्रती उदासीन रहे हैं, लेकिन इस बार कहानी बदल सकती है। कांग्रेस एक बार फिर अजीत शर्मा पर दांव लगाना चाहेगी। वहीं, बीजेपी भी दोबारा अर्जित शाश्वत चौबे या रोहित पांडे को टिकट दे सकती है। दोनों ही नेता पिछले दो चुनाव में अजीत शर्मा से हार चुके हैं, लेकिन रोहित की हार में चिराग पासवान की बगावत का बड़ा योगदान था। ऐसे में इस बार एनडीए की एकजुटता कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा रही है।