नई दिल्ली: हिंदुस्तान में भले ही गौहत्या पर प्रतिबंध लगाने की कई सालों से मांग हो रही हो, हरियाणा में गौ-मांस की बिक्री पर एवं हत्या करने पर 10 साल की सजा के साथ साथ एक लाख रुपए के हरजाने का ऐलान कर दिया गया हो या फिर गौवंश संरक्षण एवं गौ संवर्धन विधेयक-2015 पारित कर दिया गया हो, लेकिन ग्लोब पर मौजूद तमाम देशों में अभी भी उन जानवरों की खुलेआम बिक्री और सार्वजनिक बोली लगाई जाती है जिनको लेकर भारत में कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग पर गर्मागर्म बहसें हो रही हैं। भारत में गाय, बैल और सांड जैसे जानवरों को मारने पर धीरे-धीरे प्रतिबंध लगाया जा रहा है मगर एक देश ऐसा भी है जहां ऐसे ही कुछ मासूम जानवरों की खुल्लम-खुल्ला ट्रेडिंग होती है।
जानिए कहां होती है जिंदा जानवरों की ट्रेडिंग-
सोना और चांदी जैसी धातुओं के साथ साथ शेयरों की ट्रेडिंग के बारे में तो अधिकांश लोग जानते हैं। बड़े बड़े एक्सचेंजों के जरिए इन सभी चीजों की भारी भरकम मात्रा में ट्रेडिंग होती है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि शिकागो में एक ऐसा एक्सचेंज भी है जहां कई जानवरों की खुलेआम ट्रेडिंग होती है। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज ऐसा ही एक बाजार है जहां पर लाइव कैटल (बड़े जानवर), फीडर कैटल (छोटे जानवर), पोर्क बेल्लीज और लीन हॉग्स की ट्रेडिंग होती है।
कैसे होती है ट्रेडिंग-
इस एक्सचेंज में होने वाली ट्रेडिंग का भी अपना एक तरीका होता है। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज में लाइव कैटल को LC कोड वर्ड के साथ ट्रेड किया जाता है और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग सेशन के दौरान LE सिंबल इस्तेमाल में लाया जाता है।
कैसे और क्यों शुरु हुआ ये सब
जिंदा जानवरों का पहला लाइव फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट साल 1964 में शिकागो मर्केन्टाइल एक्सचेंज ने शुरू किया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि मीट खरीदने वालों और इसके बिक्री करने वाले लोगों को लाइव कैटल से होने वाले सीजनल रिस्क को न सहन करना पड़े।
लाइवस्टॉक फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट-
यह एक प्रकार का एग्रीमेंट होता है जिसमें भविष्य में पहले से तय कीमत पर डिलिवरी करना तय होता है। इस एग्रीमेंट में मात्रा, क्वालिटी, समय और डिलिवरी की जगह सभी कुछ तय होता है हालांकि इसमें कीमत में उतार-चढ़ाव देखा जाता है। मीट फ्यूचर मार्केट हेजर्स का रिस्क कम करने में मदद करते हैं, जो कैश मार्केट में उतार-चढ़ाव के कारण पैदा होता है।
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