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फर्जी हृदय रोग विशेषज्ञ ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष का किया था इलाज, इसके बाद चली गई थी जान, जानिए कैसा खुला मामला?

 Published : Apr 08, 2025 09:21 am IST,  Updated : Apr 08, 2025 10:13 am IST

फर्जी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस फर्जी डॉक्टर पर अन्य 7 मरीजों की मौत का भी आरोप लगा है। पुलिस ने फर्जी डॉक्टर को गिरफ्तार कर चौंकाने वाला खुलासा किया है।

 फर्जी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष- India TV Hindi
फर्जी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष Image Source : INDIA TV AND FILE PHOTO

मध्य प्रदेश के दमोह जिले के एक मिशनरी अस्पताल में 7 मरीजों की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपी फर्जी हृदय रोग विशेषज्ञ ने साल 2006 में छत्तीसगढ़ के एक निजी अस्पताल में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और कांग्रेस नेता राजेंद्र प्रसाद शुक्ल की सर्जरी की थी। इसके बाद पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की की मौत हो गई थी। 

फर्जी डॉक्टर के खिलाफ दर्ज हुआ केस

अधिकारियों ने बताया कि मध्य प्रदेश पुलिस ने दमोह जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) एमके जैन की शिकायत पर रविवार आधी रात को आरोपी डॉक्टर नरेंद्र जॉन कैम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। बिलासपुर जिले के कोटा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक राजेंद्र प्रसाद शुक्ल की 20 अगस्त, 2006 को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर के अपोलो अस्पताल में मौत हो गई थी। उन्होंने 2000 से 2003 तक छत्तीसगढ़ विधानसभा के पहले अध्यक्ष के रूप में काम किया था। 

बिलासपुर अपोलो अस्पताल में था फर्जी डॉक्टर

शुक्ल के सबसे छोटे बेटे प्रदीप शुक्ल (62) ने कहा कि फर्जी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव 2006 में अपोलो अस्पताल में सेवा दे रहे थे, जब उनके पिता वहां भर्ती थे। उन्होंने कहा, 'यादव ने मेरे पिता के हृदय की सर्जरी का सुझाव दिया और उसे अंजाम दिया। इसके बाद उन्हें 20 अगस्त, 2006 को मृत घोषित किए जाने से पहले करीब 18 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया।' 

डॉक्टर को बताया गया देश का सर्वश्रेष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ 

प्रदीप शुक्ल ने बताया, 'यादव ने एक-दो महीने पहले ही अपोलो अस्पताल में अपनी सेवा देना शुरू किया था। तब अपोलो अस्पताल ने उन्हें मध्य भारत के सर्वश्रेष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ के रूप में पेश किया था, जो लेजर का उपयोग करके सर्जरी करते हैं। 

फर्जी डॉक्टर के पास नहीं थी कोई डिग्री

बाद में हमें दूसरों से पता चला कि यादव के पास डॉक्टर की डिग्री नहीं थी और वह एक धोखेबाज था। यहां तक कि उसके खिलाफ पहले भी शिकायतें की गई थी और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की बिलासपुर इकाई ने उनकी जांच की थी। उन्होंने कहा, 'मेरे पिता की मृत्यु के बाद, यादव द्वारा इलाज किए गए रोगियों की मृत्यु के कुछ और मामले सामने आए। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें अपोलो अस्पताल छोड़ने के लिए कहा। यादव द्वारा इलाज किए गए लगभग 80 प्रतिशत रोगियों की अस्पताल में मृत्यु हो गई थी।'

इलाज का खर्च सरकार ने दिया

प्रदीप शुक्ल ने कहा, 'एक तरह से हमारे पिता और अन्य रोगियों की हत्या कर दी गई। जब मेरे पिता की मृत्यु हुई, तब वह विधायक थे और उनके इलाज का खर्च राज्य सरकार ने वहन किया था।' उन्होंने कहा कि यादव और अपोलो अस्पताल के खिलाफ जांच की जानी चाहिए क्योंकि उन्होंने भी सरकार को धोखा दिया है। 

राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के दूसरे बेटे और जस्टिस (सेवानिवृत्त) अनिल शुक्ल ने कहा कि मध्य प्रदेश की तरह छत्तीसगढ़ में भी यादव और जिस अस्पताल में वे कार्यरत थे, उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जानी चाहिए। अपोलो अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी देवेश गोपाल ने पुष्टि की कि यादव ने वहां काम किया था। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल में उनके कार्यकाल के दौरान उनसे संबंधित दस्तावेज एकत्र किए जा रहे हैं। इसके बाद उनके बारे में पूरी जानकारी साझा की जाएगी। 

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