29 जून 2026 को दिल्ली के भलस्वा डेयरी के निवासी और एक जनरल स्टोर के संचालक श्री पंकज ने पुलिस को सूचना दी कि देर रात एक व्यक्ति उनकी दुकान पर पांच पैकेट सिगरेट खरीदने आया। उसने भुगतान के लिए 100-100 रुपये के छह नोट दिए। नोट हाथ में लेते ही दुकानदार को उनके रंग, बनावट और गुणवत्ता पर संदेह हुआ। सूझबूझ का परिचय देते हुए उन्होंने क्षेत्र में गश्त कर रहे बीट अधिकारी हेड कांस्टेबल प्रतीक को गुप्त रूप से इसकी जानकारी दी।
सूचना मिलते ही हेड कांस्टेबल मौके पर पहुंचे और नोटों की जांच की। जिसमें पाया गया कि ये नोट नकली हैं। उन्होंने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी और संदिग्ध को वहीं रोक लिया। पूछताछ में उसकी पहचान नवी मुंबई के निवासी नटराज मोहन कंचन के रूप में हुई। तलाशी के दौरान उसके बैग से 100 रुपये के 96 जाली नोट बरामद हुए। इस संबंध में थाना भलस्वा डेयरी में एफआईआर दर्ज की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त पुलिस आयुक्त श्री विजय कुमार के निर्देश पर, अपर पुलिस उपायुक्त-प्रथम श्री अमित कौशिक के मार्गदर्शन और एसीपी स्वरूप नगर श्री विजय कुमार वत्स के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी निरीक्षक राकेश राणा के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम में एसआई विशाल, एसआई महेश, हेड कांस्टेबल प्रतीक, हेड कांस्टेबल महिपाल तथा महिला कांस्टेबल प्रकाश शामिल थीं।
पूछताछ के दौरान आरोपी नटराज ने बताया कि वह मुंबई से दिल्ली आया था और पहाड़गंज के एक होटल में ठहरा हुआ था। सूचना के आधार पर पुलिस ने होटल में छापा मारकर 100 रुपये के 180 जाली नोट तथा 500 रुपये के 13 जाली नोट बरामद किए।
आगे की पूछताछ में खुलासा हुआ कि उसने दिल्ली के मकसूदपुर निवासी सुभाष चंद्र को नकली नोटों के नमूने दिए थे ताकि उन्हें दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में चलाया जा सके। इसके बाद पुलिस ने 30 जून 2026 को सुभाष चंद्र को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 100 रुपये के 10 जाली नोट बरामद किए। जांच के दौरान पुलिस टीम नवी मुंबई स्थित नटराज के घर पहुंची, जहां मुंबई पुलिस की सहायता से छापेमारी कर नकली नोट छापने की पूरी यूनिट का खुलासा किया गया। वहां से लैपटॉप, प्रिंटर, लैमिनेशन मशीन, पेपर रोल, विशेष वॉटरमार्क पेपर और नकली नोट छापने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण बरामद किए गए।
तकनीकी जांच और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने 13 जुलाई 2026 को विनोद मुन्नीलाल जायसवार को नवी मुंबई रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि वही इस गिरोह का तकनीकी मास्टरमाइंड था, जो कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की मदद से नकली नोटों के डिजाइन तैयार करता था और उनकी छपाई में सहयोग करता था। इन गिरफ्तारियों और बरामदगी के साथ पुलिस ने महाराष्ट्र और दिल्ली के बीच सक्रिय एक संगठित अंतरराज्यीय जाली नोट गिरोह का सफलतापूर्वक पर्दाफाश किया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
1. नटराज मोहन कंचन (62 वर्ष),
निवासी: नवी मुंबई, महाराष्ट्र।
गिरोह का मुख्य सप्लायर और दिल्ली में नकली नोटों की आपूर्ति करने वाला। नकली नोटों की छपाई और वितरण का समन्वय करता था। इसके खिलाफ पहले भी धोखाधड़ी का एक मामला दर्ज है।
2. विनोद मुन्नीलाल जायसवार (38 वर्ष)
निवासी: मुंबई, महाराष्ट्र।
गिरोह का तकनीकी मास्टरमाइंड। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के माध्यम से नकली नोटों के डिजाइन तैयार करता था और छपाई की तकनीकी जिम्मेदारी संभालता था।
3. सुभाष चंद्र (55 वर्ष)
निवासी: मकसूदपुर, दिल्ली।
दिल्ली में नकली नोट प्राप्त कर उन्हें बाजार में चलाने का कार्य करता था।
आरोपियों के पास से ये चीजें हुईं बरामद
- 100 रुपये के 286 जाली नोट।
- 500 रुपये के 13 जाली नोट।
- 500 रुपये के 6 नमूना जाली नोट।
- नकली नोट छापने का पूरा सेटअप, जिसमें: एक एचपी लैपटॉप, एक एप्सन प्रिंटर, एक जेब्रोनिक्स लैमिनेशन मशीन, नकली नोट बनाने में प्रयुक्त कच्चा माल, जिसमें खाली कागज, "भारत" एवं "RBI" वॉटरमार्क वाले विशेष पेपर, हरे पॉलीथीन रोल, कटर और अन्य प्रिंटिंग उपकरण शामिल हैं।
आगे की जांच जारी
पुलिस जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से डिजिटल साक्ष्य एकत्र कर रही है। साथ ही गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान, नकली नोटों के नेटवर्क का पता लगाने और पूरे अंतरराज्यीय रैकेट का पूरी तरह भंडाफोड़ करने के लिए जांच जारी है।
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