सरकार ने चाय की किस्म, खुशबू और गुणवत्ता का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञ (सोमेलियर) और चाय के स्वाद के परीक्षण से जुड़े कौशल पाठ्यक्रमों की मंगलवार को शुरुआत की। वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) द्वारा अनुमोदित इन दोनों पाठ्यक्रमों का शुभारंभ किया। वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘एनसीवीईटी ने चाय सोमेलियर और चाय के स्वाद परीक्षण से जुड़े कौशल पाठ्यक्रमों को अनुमोदित किया है।’’
इन कोर्सेज क्या है उद्देश्य?
बर्थवाल ने इस पहल की घोषणा करते हुए कहा कि भारतीय चाय बोर्ड के इन विशिष्ट पाठ्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को कौशल प्रदान करना और चाय साक्षरता को बढ़ावा देना है। इन पाठ्यक्रमों का आयोजन दार्जिलिंग चाय अनुसंधान एवं विकास केंद्र, कुर्सेयांग में किए जाने का प्रस्ताव है। ये दोनों पाठ्यक्रम चाय की किस्म, स्वाद एवं गुणवत्ता का निर्धारण करने में मददगार होंगे
'हम 11वीं और 12वीं कक्षा में कौशल आधारित पाठ्यक्रम शुरू करने पर काम कर रहे हैं'
बता दें कि हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों के अनुसार 11वीं और 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रम में कौशल आधारित शिक्षा को शामिल करने पर विचार कर रही है। प्रधान ने कहा था कि उचित स्तर पर शिक्षण पद्धति में आमूलचूल बदलाव होना चाहिए और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में इसकी सिफारिश की गई है।
उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास में एक कार्यक्रम में कहा था, ‘‘हम 11वीं और 12वीं कक्षा में कौशल आधारित पाठ्यक्रम शुरू करने पर काम कर रहे हैं।’’ पाठ्यक्रम में कौशल आधारित शिक्षा को शामिल करने की अवधारणा के बारे में प्रधान ने कहा था कि पहले की शिक्षा प्रणाली प्रमाणपत्र और डिग्री पर केंद्रित थी। उन्होंने आईआईटी मद्रास में दक्षिणापथ शिखर सम्मेलन 2025 में कहा था, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सही कहा कि हमें डिग्री और प्रमाणन की आवश्यकता है, लेकिन हमें छात्रों को सक्षम भी बनाना होगा।’’ (PTI Input)
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