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मिलिए उषा रे से, जिन्होंने 80 साल की उम्र में MBA की डिग्री ली, 2 बार कैंसर को दी मात

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Oct 23, 2025 07:18 pm IST,  Updated : Oct 23, 2025 07:32 pm IST

उषा रे भारत की सबसे बुजुर्ग महिला हैं, जिन्होंने 80 साल की उम्र में MBA की डिग्री हासिल की हैं। उनका मानना है, खाली दिमाग शैतान का घर होता है।

उषा रे- India TV Hindi
उषा रे Image Source : (PHOTO: DYPATILONLINE.COM)

उषा रे नाम की 80 वर्षीय महिला ने अपनी उपलब्धि से लोगों को चौंका दिया है। उन्होंने डॉ. डीवाई पाटिल विद्यापीठ सेंटर फॉर ऑनलाइन लर्निंग (DPU-COL), पुणे अस्पताल और स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन में MBA की डिग्री प्राप्त की। इस उपलब्धि के साथ वह MBA डिग्रीधारी भारत की सबसे बुजुर्ग महिला बन गई हैं।

डीवाई पाटिल यूनिवर्सिटी के एक ब्लॉग पोस्ट के अनुसार, उषा रे का मानना है, "खाली दिमाग शैतान का घर होता है। यूं ही बैठे रहने का कोई मतलब नहीं था। मैं शाम को नौकरी के बाद खाली होती थी और मुझे लगता था कि मैं अपना दिमाग बर्बाद कर रही हूं। मैं अपने लिए कुछ करना चाहती थी।"

उषा रे की शैक्षिक यात्रा लंबी रही है। उन्होंने 1966 में Zoology में मास्टर डिग्री और 1978 में Education की डिग्री पूरी की थी। उन्होंने भारत और विदेश दोनों में दशकों तक शिक्षण कार्य किया, लेकिन सीखने की उनकी ललक कभी खत्म नहीं हुई।

दो बार कैंसर को दी मात

उनकी राह आसान नहीं रही। 2003 में उन्हें स्टेज- 4 कैंसर का पता चला, जिससे वह लड़कर उभरीं। 2020 में फिर से उन्हें कैंसर हुआ और एक बार फिर उन्होंने इससे उभरा। इन अनुभवों ने उन्हें सिखाया कि मुश्किलें आएंगी, लेकिन उन्हें पार करने की हिम्मत भी मिलेगी।

लैपटॉप चलाना नहीं जानती थीं

ऑनलाइन MBA के लिए रजिस्ट्रेशन करते समय उषा रे के लिए टेक्नोलॉजी एक नई दुनिया थी। उन्होंने पहले कभी लैपटॉप का इस्तेमाल भी नहीं किया था। इसके बावजूद, उन्होंने इसे पूरी तरह से अपनाया। उन्होंने एक लैपटॉप खरीदा, अभ्यास किया और सीखने की इस बाधा को अपने रास्ते में नहीं आने दिया। DPU-COL का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, जिसमें शाम के सत्र और रिकॉर्ड किए गए लेक्चर शामिल थे, उन्हें लखनऊ के लवी शुभ अस्पताल में काम करते हुए पढ़ाई करने में मदद मिली।

दृढ़ संकल्प की अद्भुत मिसाल

डीपीयू-सीओएल की निदेशक डॉ. सफ़िया फ़ारूक़ी ने ब्लॉग पोस्ट में लिखा है, "उषा रे दृढ़ता और दृढ़ संकल्प की एक अद्भुत मिसाल हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि सीखने के प्रति उनके जुनून की कोई सीमा नहीं है। उनकी यात्रा हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।" उषा के लिए संदेश सरल है: "अगर मैं 80 साल की उम्र में ऐसा कर सकती हूं, तो आप क्यों नहीं?"

पीएचडी करना और पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं

एमबीए कोई अंतिम लक्ष्य नहीं है। उषा का सपना पीएचडी करना, अपनी पढ़ाई जारी रखना और स्वास्थ्य सेवा में पेशेवर योगदान देना है। उनकी कहानी हमें याद दिलाती है कि शिक्षा कोई दौड़ नहीं है, और महत्वाकांक्षा की कोई समाप्ति तिथि नहीं होती। वह सुनने वालों को सलाह देती हैं: "ईश्वर आपको जो भी दे, उसमें खुश रहो। समस्याओं को अपने रास्ते में न आने दो। आगे बढ़ो और सीखते रहो।" 80 साल की उम्र में, उषा रे सिर्फ रिकॉर्ड ही नहीं तोड़ रही हैं; वह सोच भी बदल रही हैं।

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