मेगास्टार दिलीप कुमार की सास और एक्ट्रेस सायरा बानो की मां नसीम बानो का आज जन्मदिन है। बॉलीवुड की आज की फिमेल सुपरस्टार भले ही करीना, दीपिका और प्रियंका हो लेकिन नसीम बानो को हमेशा भारतीय सिनेमा की पहली फिमेल सुपरस्टार के रूप में याद किया जाएगा। बॉलीवुड इंडस्ट्री में नसीम बानो को 'ब्यूटी क्वीन' के नाम से भी जाना जाता था। 1930's में नसीम ने अपनी करियर की शुरुआत थी और 1950's तक वह हिंदी फिल्म से जुड़ी रहीं। नसीम बानो की पहली फिल्म 'खून का खून' था।
नसीम बानो अपने जमाने की सबसे ग्लैमरस एक्ट्रेस थीं। नसीम बानो लोकप्रिय अभिनेत्री सायरा बानो की मां और प्रसिद्ध अभिनेता दिलीप कुमार की सास थीं। उन्होंने अपने करियर का शुरुआत फिल्म 'खून का खून' से की थी। आज नसीम बानो की जन्मदिन है। आईए इस मौके पर जानते हैं उनसे जुड़ी बातें।
नसीम बानो की परवरिश शाही ढ़ग से हुई। कहा जाता है कि वह स्कूल में पढ़ने के लिए पालकी से जाया करती थीं। नसीम इतनी सुंदर थीं कि उन्हें पर्दे में ही रखा जाता था। एक बार नसीम अपने स्कूल की छुट्टियों में अपनी मां के सथा फिल्म सिल्वर किंग की शूटिंग देखने गई और इसे देखकर ही उन्होंने फैसला किया कि वह भी एक्ट्रेस बनेंगी।
स्टुडियो में नसीम की सुंदरता देखकर उन्हें फिल्मों में काम करने का ऑफर भी मिल गया था लेकिन उनकी मां ने बच्ची कहकर इन प्रस्तावों का ठुकारा दिया था। नसीम की मां उन्हें अभिनेत्री नहीं बल्कि डॉक्टर बनाना चाहती थीं।
फिल्म निर्माता सोहराब मोदी ने अपनी फिल्म 'खून का खून' के लिये बतौर अभिनेत्री नसीम को काम करने के लिये प्रस्ताव रखा। इस बार भी नसीम की मां ने इंकार कर दिया लेकिन इस बार नसीम अपनी जिद पर अड़ गयी कि उसे अभिनेत्री बनना ही है। इतना ही नहीं नसीम ने अपनी बात मनवाने के लिये भूख हड़ताल भी कर दी।
नसीम बानो ने सोहराब मोदी के साथ कई फिल्में कीं। इनमें तलाक, मीठा जहर, बसंती थी। लेकिन पुकार में नूर जहां का रोल निभाकर वो फेमस हो गईं। उन्होंने फिल्मकार महबूब खान की कई फिल्मों में भी अभिनय किया। उसके बाद अपनी बेटी सायरा बानो का दौर शुरू हो जाने से उन्होंने खुद को हिन्दी सिनेमा की मुख्यधारा से अलग कर लिया। यह संयोग ही है कि सायरा उनसे भी ज्यादा मशहूर अभिनेत्री हुईं।
नसीम बानो ने मियां अहसान-उल हक से शादी की। उन्होंने ताज महल पिक्सर्स बैनर भी शुरू किया, जिसके तले कई फिल्मों का निर्माण हुआ। बंटवारे के समय दोनों पाकिस्तान चले गए। लेकिन नसीम बानो अपने दो बच्चों को लेकर वहां से भारत वापस चली आईं। एक रिपोर्ट के मुताबिक सायरा बनो और दिलीप कुमार की शादी में नसीम की बड़ी भूमिका थी। 18 जून 2002 को 85 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली।
साठ और सत्तर के दशक में नसीम बानो ने बतौर ड्रेस डिजायनर फिल्म इंडस्ट्री में काम करना शुरू कर दिया। अपनी पुत्री सायरा बानो की अधिकांश फिल्मों मे ड्रेस डिजायन नसीम बानो ने ही किया। इन फिल्मों में‘अप्रैल फूल’,‘पड़ोसन’,‘झुक गया आसमान‘,‘पूरब और पश्चिम‘,’ज्वार भाटा‘,‘विक्टोरिया नंबर 203‘‘पाकेटमार‘‘चैताली बैराग’और‘काला आदमी’शामिल है।
साठ के दशक में प्रदर्शित फिल्म‘अजीब लडक़ी’बतौर अभिनेत्री नसीम बानो के सिने करियर की अंतिम फिल्म थी। इस फिल्म के बाद नसीम बानो ने अपने सफलतापूर्वक चल रहे सिने करियर से संन्यास ले लिया।
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