आशा भोसले अपने जीवन के अंतिम वर्षों में भी चकाचौंध से दूर नहीं होना चाहती थीं। 12 अप्रैल को 92 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनका आखिरी म्यूजिक कॉन्सर्ट दुबई में 91 वर्ष की आयु में आयोजित हुआ था।
कॉन्सर्ट के दौरान उन्होंने करण औजला के एल्बम 'बैड न्यूज़' के लोकप्रिय गीत 'तौबा तौबा' को गाकर अपने फैन्स को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह महज एक भावुक क्षण नहीं था। ऐसा लगा मानो यह उनकी किसी भी गीत को नए अंदाज़ में ढालने, उसकी पुनर्व्याख्या करने और उसे अपना बनाने की अटूट क्षमता की याद दिलाता हो।
अपनी आवाज से छोड़ी गहरी छाप
एक गायिका, जिसकी आवाज ने दशकों तक भारतीय सिनेमा को परिभाषित किया था, दुबई में तौबा तौबा सुनाकर लोगों के खुश कर दिया था। आशा भोसले ने गाने में अपनी एक अलग ही छाप छोड़ी, जिससे वायरल हो चुके इस गाने में और भी गर्माहट और बारीकियां आ गईं, और यह और भी स्वाभाविक और बहुआयामी बन गया। उनकी प्रस्तुति ने जल्द ही इंटरनेट पर धूम मचा दी, और प्रशंसकों ने संगीत को नया रूप देने की उनकी प्रतिभा की प्रशंसा की।
फैन को हो गए थे करण औजला
करण औजला के लिए यह पल बेहद निजी था। इंस्टाग्राम पर उन्होंने लिखा, ' आशा भोसले जी, संगीत की साक्षात देवी, ने अभी-अभी 'तौबा तौबा' गाया... एक ऐसा गीत जिसे एक छोटे से गांव में पले-बढ़े एक बच्चे ने लिखा था, जिसका संगीत से कोई नाता नहीं था और न ही वाद्ययंत्रों का कोई ज्ञान था।' एक अन्य पोस्ट में, उन्होंने गीत के पीछे की यात्रा पर विचार करते हुए लिखा, 'मैंने इसे 27 साल की उम्र में लिखा था। उन्होंने इसे 91 साल की उम्र में मुझसे बेहतर गाया।' यह एक दुर्लभ और संपूर्ण अनुभव था। एक युवा कलाकार अपनी रचना को एक ऐसी शख्सियत द्वारा नए रूप में प्रस्तुत होते देख रहा है, जिसकी विरासत ने उसके आने से बहुत पहले ही संगीत जगत को आकार दे दिया था।
संगीत की लंबी विरासत छोड़ गईं आशा
आशो भोसले ने संगीत की दुनिया में एक लंबी विरासत छोड़ी है। उन्होंने अपने करियर में 20 से ज्यादा भाषाओं में 12 हजार से ज्यादा गानों को अपनी आवाज से सजाया है। गिनी वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी आशा का नाम दर्ज है। इतना नहीं भारत सरकार ने उन्हें 2008 में पद्मविभूषण के खिताब से भी नवाजा था। अब उनके निधन से पूरी संगीत जगत में मातम पसरा है बॉलीवुड सितारों ने भी दुख जताया है।
आशा भोसले क्यों पहनती थी सफेद साड़ी? लता मंगेशकर संग जुड़ी है याद, वजह भी है अनोखी