बॉलीवुड के सुपरस्टार सिंगर अपनी दरियादिली को लेकर भी पहचाने जाते हैं। हाल ही में मीका सिंह ने इस कड़कड़ाती ठंड में आवारा कुत्तों के लिए बड़ा दिल दिखाते हुए अपनी 10 एकड़ जमीन को दान करने का संकल्प लिया है। मीका ने अपने एक्स अकाउंट पर इसको लेकर एक पोस्ट शेयर किया है। जिसमें उन्होंने लिखा, 'आवारा कुत्तों के कल्याण को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कदम से परहेज करें और सड़क पर घूमने वाले कुत्तों पर संभावित न्यायिक कार्रवाई को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने लिखा, 'मीका सिंह भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय से विनम्र निवेदन करते हैं कि वह कुत्तों के कल्याण को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने वाले किसी भी कदम से परहेज करने पर विचार करे।' मीका, जो हमेशा से पशु अधिकारों के मुखर समर्थक रहे हैं ने इस नेक काम के लिए अपना हार्दिक संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कुत्तों की देखभाल, आश्रय और कल्याण के लिए विशेष स्थान स्थापित करने हेतु अपनी जमीन दान करने की पेशकश की। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, 'मैं विनम्रतापूर्वक निवेदन करता हूं कि मेरे पास पर्याप्त जमीन उपलब्ध है और मैं कुत्तों की देखभाल, आश्रय और कल्याण के लिए 10 एकड़ जमीन दान करने के लिए पूरी तरह से तैयार हूं।' गायक ने जानवरों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए आश्रय और सुविधाओं के निर्माण हेतु जमीन उपलब्ध कराने की अपनी तत्परता पर जोर दिया, साथ ही उन्होंने उनकी उचित देखभाल के लिए आवश्यक मानव संसाधन की भी अपील की।
सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर से मचा था बवाल
आवारा कुत्तों के प्रबंधन पर सुप्रीम कोर्ट की चल रही चर्चा ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है, खासकर इस मुद्दे पर हाल ही में हुई सुनवाई के बाद। कोर्ट ने हाल ही में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उसने सार्वजनिक आशंकाओं के विपरीत, सड़कों पर घूमने वाले कुत्तों को पूरी तरह से हटाने का आदेश नहीं दिया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की तीन-न्यायाधीशों वाली विशेष पीठ ने जनता को आश्वस्त किया कि पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम 2023 को लागू करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जो आवारा कुत्तों की आबादी के प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक और मानवीय दृष्टिकोण की वकालत करते हैं। अदालत ने कुत्ते के काटने की घटनाओं में वृद्धि को स्वीकार किया, जिससे जनता में आक्रोश फैल गया था, लेकिन उसने नसबंदी, टीकाकरण और अंततः कुत्तों को उनके मूल क्षेत्रों में वापस छोड़ने के महत्व पर जोर दिया, जिसका उद्देश्य मानव और पशु दोनों के कल्याण को सुनिश्चित करना है। पीठ ने कहा कि कानूनी ढांचे के लिए एक सुविचारित रणनीति की आवश्यकता है और स्थानीय प्राधिकरण मौजूदा नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रहे हैं।
ये भी पढ़ें- महाकाल की भक्ति में डूबी शिल्पा शेट्टी, बहन के साथ उज्जैन पहुंच टेका माथा, सामने आई तस्वीरें