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सनी देओल की गदर का काजी, स्पॉट बॉय से बना खूंखार विलेन, 150 फिल्में करके छोड़ी इंडस्ट्री, बना 5 वक्त का नमाजी

 Written By: Priya Shukla
 Published : Oct 25, 2025 08:39 pm IST,  Updated : Oct 25, 2025 08:40 pm IST

80-90 के दशक में बॉलीवुड फिल्मों में कुछ ऐसे खलनायकों ने दस्तक दी, जिनका चेहरा अब भी सामने आ जाए तो दर्शक सहम जाएं। सनी देओल की 'गदरः एक प्रेम कथा' में काजी का किरदार निभाकर इस एक्टर ने भी कुछ ऐसी ही छाप छोड़ी थी।

Ishrat Ali- India TV Hindi
इशरत अली। Image Source : INSTAGRAM/@TIMELESSINDIANMELODIES

80-90 के दशक में बॉलीवुड में कुछ ऐसे विलेन हुए, जिन्हें दर्शक आज भी नहीं भूल पाए हैं। अमरीश पुरी से लेकर परेश रावल तक, कई सितारों ने अपने खलनायक के किरदारों से दर्शकों को हैरान-परेशान किया। ऐसे ही एक एक्टर इशरत अली भी हैं। वही इशरत अली, जिन्होंने सनी देओल और अमीषा पटेल स्टारर 'गदरः एक प्रेम कथा' में काजी की भूमिका निभाई थी और अपने दमदार अभिनय के चलते दर्शकों के बीच काफी मशहूर भी हुए थे। इशरत अली ने कई फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभाई और फिर अचानक ही एक्टिंग से किनारा कर लिया।

स्पॉट बॉय थे इशरत अली

इशरत अली को बचपन से ही अभिनय का शौक था। वह अक्सर अपने दोस्तों के बीच फिल्मों के डायलॉग बोलते और दोस्त ताली पीटते। इशरत के लिए फिल्मी दुनिया का रुख करना मुश्किल था, क्योंकि वह अपने पिता के बिजनेस में हाथ बंटाते थे। इसी बीच उनके पिता का इंतकाल हो गया और परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। घर संभालने और बहन की शादी के लिए उन्होंने ठान लिया कि वह पहले परिवार की जिम्मेदारी पूरी करेंगे, उसके बाद ही अपने सपनों को पूरा करेंगे। आखिरकार अपने प्रण को पूरा करने के बाद उन्होंने मुंबई की ओर कदम बढ़ाए। लेकिन, वह इस महानगर में किसी को नहीं जानते थे, ना ही कोई गॉडफादर था। ऐसे में उन्होंने बतौर स्पॉट बॉय काम शुरू किया।

दिलीप शकंर ने दिया अभिनय का मौका

इशरत अली उन दिनों कैमरा यूनिट में बतौर सहायक काम कर रहेथे। इसी दौरान इशरत को उनके एक दोस्त ने बताया कि दिलीप शंकर अपनी फिल्म 'कालचक्र' के लिए नए कलाकार की तलाश में हैं। इशरत भी ऑडिशन देने पहुंच गए और अपने अभिनय से दिलीप शंकर को प्रभावित करने में सफल रहे। दिलीप, इशरत से इतने इंप्रेस हुए कि अपनी फिल्म में बड़ा रोल दे दिया और इसी के साथ इशरत का फिल्मी करियर चल निकला। कालचक्र में उन्होंने यशवंत कात्रे नाम के भ्रष्ट नेता का निगेटिव किरदार निभाया था और फिल्म रिलीज होने के बाद उन्हें बैक टू बैक विलेन के रोल ऑफर होने लगे।

आमिर खान के पिता का निभाया रोल

इशरत अली ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए। 1990 में रिलीज हुई 'तुम मेरे हो' में उन्होंने आमिर खान के पिता की भूमिका निभाई और 'आतंक ही आतंक' में रजनीकांत के पिता बने। 1994 में रिलीज हुई 'आ गले लग जा' में एक साइको किलर की भूमिका से उन्होंने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए। वहीं 2001 में रिलीज हुई सनी देओल स्टारर 'गदरः एक प्रेम कथा' में काजी के रोल से भी तारीफें बटोरने में सफल रहे। इशरत अली ने अपने करियर में करीब 150 फिल्मों में काम किया और फिर अचानक ही फिल्मी दुनिया से दूरी बना ली।

टीवी सीरियल में भी किया काम

इशरत अली करीब 20 साल तक फिल्म इंडस्ट्री में एक्टिव रहे और फिर जब फिल्मों में अच्छे रोल ऑफर होने बंद हो गए तो उन्होंने टीवी का रुख कर लिया। उन्होंने सब टीवी के 'चिड़ियाघर' में काम किया और फिर पर्दे से अचानक दूरी बना ली और आध्यात्म की राह पकड़ ली। इशरत अली अब एक्टिंग से दूर आध्यात्मिक जिंदगी जी रहे हैं और पांच वक्त के नमाजी बन चुके हैं। इशरत फिलहाल मुंबई में ही अपने बीवी बच्चों के साथ रहते हैं और सादा जीवन जी रहे हैं।

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