फिल्म परम सुंदरी के फर्स्ट लुक, टीजर और ट्रेलर रिलीज़ के बाद से ही इस फिल्म का काफी इंतजार हो रहा था। फिल्म के गाने ऑडियंस के बीच इतने फेमस हो गए हैं कि फिल्म से उम्मीदें भी बढ़ गईं। जाह्नवी कपूर और सिद्धार्थ मल्होत्रा वाली ये फिल्म आज यानी 29 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। मैडॉक फिल्म्स के पास एक बार फिर ऑडियंस का दिल जीतने का मौका है। 136 मिनट की फिल्म एक रॉम कॉम है, जो आपको मजेदार राइड पर ले जाती है, कुछ हिचकोले भी हैं, लेकिन कहानी आपको कुर्सी से बांधे रखती है। इस फिल्म को मिस करना चाहिए या ये देखने लायक है, ये जानने के लिए नीचे स्क्रोल करें।
बॉलीवुड में एक बार फिर प्यार की बहार लौट आई है, और इस बार इस रोमांटिक मौसम में जोड़ी बना रहे हैं जान्हवी कपूर और सिद्धार्थ मल्होत्रा। इन दोनों की रोमांटिक कॉमेडी फिल्म 'परम सुंदरी' दर्शकों के दिलों को छूने के लिए तैयार है। इस फिल्म का निर्देशन तुषार जलोटा ने किया है, जिन्होंने इससे पहले 'दसवीं' जैसी सफल फिल्म दी थी, जो ओटीटी पर बड़ी हिट साबित हुई थी। फिल्म का दिल सही जगह पर है क्योंकि यह कई मुद्दों को उठाती है, खासकर यह कि कैसे आज की पीढ़ी हर चीज एआई और एल्गोरिदम के आधार पर तय करती है और न तो अपने दिल की सुनती है और न ही दिमाग की। लेकिन अंत में फिल्म अपनी तथाकथित जबरदस्ती की गई क्यूटनेस और सादगी के साथ कुछ ज्यादा ही थका देने वाली हो जाती है।
फिल्म की कहानी
'परम सुंदरी' की कहानी परम (सिद्धार्थ मल्होत्रा) और सुंदरी (जान्हवी कपूर) के इर्द-गिर्द घूमती है, एक सीधी-सादी लेकिन दिल को छू जाने वाली प्रेम कहानी। जब दिल्ली का व्यवसायी परम केरल पहुंचता है और एक पुराने घर में किराएदार बनता है तो वहीं उसकी मुलाकात होती है सुंदरी से। और यहीं से शुरू होता है रोमांस, मस्ती और संगीत से भरा एक मजेदार सफर। परम सचदेव, एक स्टाइलिश, कॉन्फिडेंट, थोड़ा जिद्दी और महत्वाकांक्षी युवा व्यवसायी है। परम (सिद्धार्थ मल्होत्रा) नौजवान है, जो एक ऐसी डेटिंग ऐप में पैसे इन्वेस्ट कर रहा है जो सच्चा प्यार ढूंढ़ने का सबसे सही तरीका है। अपने पिता से 5 करोड़ की निवेश राशि पाने के लिए एक अनोखी चुनौती स्वीकार करता है।
उसे 10 दिनों के भीतर अपना सोलमेट खोजना होगा और वो भी एक AI वैवाहिक ऐप की मदद से, लेकिन जब उसके पिता उसे चुनौती देते हैं कि वो उसी ऐप से अपने लिए साथी ढूंढे तो शुरू होता है एक ऐसा सफर जो सिर्फ स्क्रीन से नहीं, असल जिंदगी की गलियों से भी होकर गुजरता है। ऐप की गणना के अनुसार उसकी परफेक्ट जोड़ीदार है सुंदरी, जो केरल में रहती है। जैसे ही परम केरल पहुंचता है, उसकी जिंदगी एक नई दिशा लेती है। शुरू में यह सब एक व्यापारिक सौदे जैसा लगता है, लेकिन जैसे-जैसे वह सुंदरी को जानता है, उसके दिल में असली प्यार पनपने लगता है। मगर, सुंदरी का दिल जीतना इतना आसान नहीं है। सुंदरी (जान्हवी कपूर), एक मजबूत सोच वाली, अपने मूल्यों से जुड़ी लड़की है। उसके लिए प्यार कोई प्रोफाइल या मैच नहीं है, वो एक भावना है, जिसे महसूस किया जाता है। यहाँ से दोनों की प्रेम कहानी की शुरुआत होती है और कई ट्विस्ट और टर्न के साथ फिल्म आपको एक बहुत प्यारा संदेश भी देती है। सुंदकरी की एक छोटी बहन है जिसका नाम अम्मू (इनायत वर्मा) है। अम्मू परम से खिझी और चिढ़ी नजर आती है।
कैसा है निर्देशन?
निर्देशक तुषार जलोटा ने इस फिल्म को तेज बनाने की कोशिश नहीं की, बल्कि इसे एहसासों से भर दिया है। फिल्म कहीं भी बनावटी नहीं लगती। संवाद भी सरल और असरदार हैं। फिल्म बहुत कुछ कहती है, पर शोर नहीं मचाती। दिल्ली की तेज रफ्तार और केरल की शांति, दोनों का सुंदर संतुलन फिल्म में देखने को मिलता है। कैमरा वर्क फिल्म के मूड को पूरी तरह सपोर्ट करता है। हर सीन खूबसूरती से सोचा और शूट किया गया है। फिल्म की सादगी, साफ-सुथरा हास्य और कुछ बेहद आकर्षक पल इसे खास बनाते हैं। यह फिल्म एक 'फिल्मी' फिल्म है, यानी इसमें बॉलीवुड की क्लासिक रोमांटिक फिल्मों की झलक, रंग, भावनाएं और मेलोड्रामा पूरी तरह मौजूद हैं। यह दर्शकों को अपनी भावनाओं, खूबसूरत दृश्यों और रोमांस की मासूमियत के आगे खुद को खो देने का मौका देती है।
जहां फिल्म चमकती है
परम सुंदरी तब सबसे ज्यादा प्रभाव छोड़ती है जब यह सिनेमा के हल्के-फुल्के, अविश्वसनीय और मजेदार पहलुओं को गले लगाती है। फिल्म का हास्य, कुछ शानदार दृश्य जैसे कलारीपयट्टू और वल्लम काली, कहानी में हलचल और ताजगी लाते हैं। हालांकि शुरुआत में फिल्म थोड़ी धीमी लगती है, लेकिन एक बार जब रफ्तार पकड़ती है तो यह और भी मनोरंजक हो जाती है।
क्या बेहतर हो सकता था?
हालांकि फिल्म एक प्यारी रोमांटिक कॉमेडी के तौर पर काम करती है, लेकिन इसमें एक ऐसा भावनात्मक संघर्ष या टकराव नहीं है जो दर्शकों को गहराई से जोड़ सके। खासकर सुंदरी के किरदार की पृष्ठभूमि को और अधिक परतदार और प्रभावशाली बनाया जा सकता था। कथानक में जो उपकथाएं जोड़ी गई हैं, वो प्रेम कहानी में जरूरी ड्रामा और चिंगारी लाने में थोड़ा कमजोर पड़ती हैं। फिल्म का क्लाइमेक्स भी कमजोर है, जो कहानी को बोझिल करता है। कहानी को बेहत तरीके से समेटा जा सकता था, जो इसे और सधा हुआ रखती।
कैसा है अभिनय?
सिद्धार्थ मल्होत्रा और जाह्नवी कपूर दोनों अपने किरदारों में सहज हैं। सिद्धार्थ रोमांटिक अंदाज में काफी जंचते हैं, भले ही अब उनमें पुरानी ‘चॉकलेट बॉय’ वाली मासूमियत न हो। जाह्नवी ने कॉमेडी टाइमिंग में निखार दिखाया है और उनकी ऑन-स्क्रीन उपस्थिति, खासकर पारंपरिक साड़ियों में बेहद आकर्षक लगती है। हालांकि, अगर इन दोनों की केमिस्ट्री को और अधिक गहराई से दिखाया जाता तो फिल्म और भी ऊंचाइयों पर पहुंच सकती थी।
क्यों देखें ये फिल्म?
परम सुंदरी एक खूबसूरत विजुअल और संगीतमय अनुभव है। फिल्म का गाना ‘परदेसिया’ पहले ही चार्टबस्टर बन चुका है और थिएटर में यह और भी प्रभावी लगता है। केरल की मनोहारी लोकेशन्स, सुंदर सिनेमैटोग्राफी और रंगों का उपयोग फिल्म को एक खूबसूरत लुक देते हैं। कुल मिलाकर, 2 घंटे 16 मिनट की यह फिल्म रोमांटिक कॉमेडी के प्रशंसकों के लिए एक सुकूनभरा और आनंददायक अनुभव है। अगर आप हल्की-फुल्की कहानियों और पुराने बॉलीवुड रोमांस के फॉर्मूले को पसंद करते हैं तो परम सुंदरी एक बार देखी जा सकने वाली फिल्म जरूर है।