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'आज भी मंदिर में नहीं मिलती एंट्री', जातिवाद पर छलका 'पंचायत' एक्टर का दर्द, होटल में धोनी पड़ी थी अपनी प्लेटें

 Written By: Priya Shukla
 Published : Apr 22, 2026 08:59 pm IST,  Updated : Apr 22, 2026 08:59 pm IST

'पंचायत' में नए सचिव की भूमिका निभाने वाले विनोद सूर्यवंशी ने हाल ही में अपने संघर्ष के दिनों पर खुलकर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने अपने साथ जाति के आधार पर हुए भेदभाव के बारे में भी बात की।

vinod suryavanshi- India TV Hindi
विनोद सूर्यवंशी। Image Source : INSTAGRAM/@VINODSURYAVANSHI2011

प्राइम वीडियो की सबसे चर्चित और सफल सीरीज में से एक 'पंचायत' में फुलेरा गांव के नए सचिव जी की भूमिका निभाकर सुर्खियों में आने वाले विनोद सूर्यवंशी ने हाल ही में अपनी जिंदगी से जुड़े दिलचस्प किस्से साझा किए। विनोद सर्यवंशी ने कर्नाटक के एक छोटे से गांव से फिल्मी दुनिया तक का सफर तय किया है और धीरे-धीरे कर एक -माना नाम बनते जा रहे हैं, लेकिन उनके लिए ये सफर बिलकुल आसान नहीं था। विनोद सूर्यवंशी ने हाल ही में अपने साथ हुए जातिगत भेदभाव के बारे में भी बात की और बताया कि कैसे आज भी उनके परिवार को मंदिर या उच्च जाति के लोगों के घर में प्रवेश की अनुमति नहीं है।

जातिगत भेदभाव पर छलका पंचायत एक्टर का दर्द

विनोद सूर्यवंशी ने हाल ही में सिद्धार्थ कनन के साथ बातचीत में जातिगत भेदभाव के बारे में बात करते हुए बताया कि वह कर्नाटक के जिस गांव से आते हैं, वहां आज भी जाति को लेकर भेदभाव होता है। विनोद बताते हैं कि उनके गांव में दो क्षेत्र हैं, एक में उच्च जाति के लोग रहते हैं और दूसरे में निम्न जाति के लोग रहते हैं। दलितों का इलाका अलग रखा गया है। यानी एक ही गांव में दो अलग-अलग क्षेत्र हैं, जिसे उच्च और निम्न जाति के आधार पर बांट दिया गया है।

होटल में जाकर धोनी पड़ीं प्लेटें

अपने बचपन का एक किस्सा साझा करते हुए विनोद कहते हैं- 'मैं कुछ 11-12 साल का था, जब अपने पिता के साथ गांव गया था। वहां हमने एक होटल में खाना खाया और फिर हमें अपनी प्लेटें भी खुद धोनी पड़ीं, जबकि हमने खाने का बिल चुकाया था। मेरे गांव में आज भी एक मंदिर ऐसा है, जहां हमें जाने की परमिशन नहीं है।' विनोद ने अपने संघर्ष और गरीबी के दिनों को याद करते हुए कहा- 'मैंने अक्सर अपने माता-पिता को रोते देखा है। जब भी त्योहार आते तो सोचता कि ये त्योहार क्यों आ रहे हैं ? दीवाली भी क्यों आ रही है? त्योहार पर हम रोते थे, क्योंकि हम अन्य लोगों की तरह त्योहार नहीं मना पाते थे। हमारी हालत बहुत खराब थी।'

इंडस्ट्री में भी झेला भेदभाव

विनोद बताते हैं कि सिर्फ अपने गांव या समाज में ही नहीं, उन्हें इंडस्ट्री में भी भेदभाव का शिकार होना पड़ा है। उन्होंने बताया कि डार्क कॉम्प्लेक्शन के चलते उन्हें अक्सर रिजेक्ट कर दिया जाता था। क्योंकि, ज्यादातर लोगों को रिच लुक चाहिए होते हैं, जो उनके पास नहीं हैं। एक बार तो उन्हें सिलेक्ट करने के बाद भी हटा दिया गया, क्योंकि क्रिएटिव टीम को उनका रंग अच्छा नहीं लगा, जिससे उनके मन को काफी दुख पहुंचा था।

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