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कट्टे का जुनून, नौकरी और भाई बनाम भाई... देखें बिहार चुनाव में कौन-कौन से मुद्दे गरम?

बिहार चुनाव की सियासी गर्मी वोटर्स के माथे पर चढ़ी हुई है। बिहार के वोटर किन प्रमुख मुद्दों पर मंथन करके अपना वोट देंगे, आइए इस खबर में समझते हैं।

Written By: Vinay Trivedi
Published : Nov 06, 2025 08:23 am IST, Updated : Nov 06, 2025 11:34 am IST
bihar voting- India TV Hindi
Image Source : PTI बिहार के वोटर्स के लिए कौन से मुद्दे अहम?

'कभी मैं अपने हाथों की लकीरों से नहीं उलझा, मुझे मालूम है किस्मत का लिक्खा भी बदलता है।' बशीर बद्र का ये शेर उन उम्मीदवारों पर फिट बैठता जो बिहार चुनाव में जीत हासिल करने के लिए किस्मत के भरोसे नहीं बल्कि जमीनी स्तर उतरे और अपने पक्ष में वोटर्स को लाने के लिए खूब मेहनत की। उन्होंने अपना और अपनी पार्टी का विजन लोगों को समझाया और उन्हें ही जिताकर विधानसभा भेजने की अपील की। आइए समझते हैं कि ऐसे कौन से मुद्दे हैं जो बिहार चुनाव की सियासी गरमागरमी के बीच वोटर्स के सिर चढ़कर बोल रहे हैं। कट्टा प्रथा, भाई बनाम भाई, नौकरी और पलायन जैसी कौन सी बातें हैं जिनके बारे में सोचने के लिए बिहार का हर वोटर मजबूर है। इस खबर में बिहार चुनाव के मुद्दों के बारे में विस्तार से पढ़िए।

बिहार की कट्टा प्रथा

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक बच्चा RJD के मंच से हाथ में माइक लेकर कहता दिख रहा है कि बबउआ हम्मर चलावल गोली, तेजस्वी भैया के बोलल बोली, कहियो ना खाली जाय छैय हो। गे छउड़ी गे लाठिया ले के घुमछी त कहय छही गवार गे, बन दही CM तेजस्वी भैया के त कट्टा लेके घुमबऊ ने त कहिहन रंगदार गे। इसका मतलब है कि मेरी चलाई हुई गोली और तेजस्वी भैया की बोली कभी खाली नहीं जाती। ऐ लड़की मैं लाठी लेकर घूमता हूं तो गंवार कहती हो। तेजस्वी भैया को CM बनने दो, तब मैं कट्टा लेकर घूमूंगा और रंगदार कहलाऊंगा। ये वीडियो समस्तीपुर जिले में आरजेडी उम्मीदवार डॉ. एज्या यादव की रैली का बताया जा रहा है। BJP इसको लेकर हमलावर है। इतना ही नहीं PM मोदी भी इसका जिक्र कर चुके हैं। PM मोदी ने मुजफ्फरपुर की रैली में कट्टा, क्रूरता, कटुता, कुशासन और करप्शन जंगलराज और RJD की पहचान बताया था।

भाई बनाम भाई

अनुष्का यादव के साथ तस्वीर वायरल होने के बाद लालू के बड़े तेज प्रताप यादव को परिवार और पार्टी दोनों से दूर कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल बनाई और महुआ से चुनाव में कूद पड़े। तेज प्रताप की पार्टी ने कई अहम सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं जहां RJD को नुकसान हो सकता है। तेज प्रताप और तेजस्वी में खटास का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जब एक इंटरव्यू में तेज प्रताप से पूछा गया कि अगर तेजस्वी महुआ में प्रचार करने आते हैं तो आप क्या करेंगे। इसके जवाब में तेज प्रताप ने कहा था कि अगर वह यहां आएंगे तो हम राघोपुर में घर-घर वोट मांगने चले जाएंगे। तेजस्वी यादव राघोपुर से ही चुनाव लड़ रहे हैं।

नौकरी का मुद्दा

नौकरी का मुद्दा बिहार चुनाव में इतना अहम रहा कि तेजस्वी यादव ने महागठबंधन के घोषणा पत्र में हर परिवार को एक सरकारी नौकरी देने का बड़ा ऐलान तक कर दिया। इसकी गारंटी के खातिर उन्होंने सरकारी नौकरी देने के लिए सरकार बनने के 20 दिन के अंदर नया कानून बनाने की बात भी की। हालांकि, तेजस्वी से बार-बार पूछा गया कि बिहार में करीब 3 करोड़ परिवार हैं, उनको कैसे नौकरी देंगे, इसका साफ जवाब देने से वह बचते रहे। वहीं दूसरी तरफ, NDA ने बिहार में 1 करोड़ रोजगार देना का वादा किया है। बिहार में इंडस्ट्री लगाकर लोगों को नौकरी देने का प्रॉमिस किया है।

जंगलराज Vs महाजंगलराज

बिहार के चुनाव में NDA ने वोटर्स को लालू-राबड़ी सरकार के जंगलराज की याद दिलाई तो तेजस्वी ने नीतीश कुमार सरकार को महाजंगलराज कहना शुरू कर दिया। इस मुद्दे ने तब और जोर पकड़ा जब बाढ़ में जनसुराज के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या हो गई। इस हत्या का आरोप मोकामा से JDU उम्मीदवार अनंत सिंह पर लगा और विरोधियों ने ये मुद्दा लपक लिया। इसके अलावा, पिछले दिनों बिहार में हुई प्रमुख वारदातों जैसे- पटना के पारस हॉस्पिटल में हुए चंदन मिश्रा हत्याकांड, व्यापारी गोपाल खेमका मर्डर केस और RJD लीडर राजकुमार राय की हत्या को भी मुद्दा बनाया गया।

महिला सम्मान का मुद्दा

बिहार के चुनाव में जीविका दीदी और मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना का मुद्दा छाया रहा। ग्राउंड रिपोर्ट्स के दौरान, महिलाओं ने कई बार उन्हें पहली किस्त के रूप में मिले 10 हजार रुपये की बात की। इसको भांपते हुए तेजस्वी ने चुनाव से ठीक पहले कहा कि अगर महागठबंधन सरकार बनी तो 'माई बहिन योजना' के तहत बिहार की महिलाओं को एक साल की पूरी धनराशि यानी 30 हजार रुपये एकमुश्त उनके बैंक खातों में भेज दी जाएगी। इस चुनाव में आधी आबादी को लुभाने के लिए NDA और महागठबंधन दोनों जी जान से लगे रहे।

पलायन का दर्द

बिहार के चुनाव में पलायन का मुद्दा जोरों पर रहा। दरअसल, बिहार में रोजी-रोजगार पर्याप्त मात्रा में नहीं है। इसलिए बड़ी संख्या में लोगों को जीविका कमाने के लिए अपना घर छोड़कर बिहार के बाहर जाना पड़ता है। इस बार NDA और महागठबंधन दोनों ने दावा किया है कि अगर उनकी सरकार बनती है तो पलायन रोकने का काम किया जाएगा। लोगों को यहीं बिहार में रोजगार मुहैया कराया जाएगा। बिहार के लोगों को अब बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी।

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की बात

वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद महागठबंधन ने 'वोट चोरी' जैसे आरोप चुनाव आयोग और BJP पर लगाए। विपक्ष ने अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर वोटर लिस्ट में फर्जी एंट्री करने और नाम हटाने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है। पहले फेज की वोटिंग से ठीक एक दिन पहले राहुल गांधी हरियाणा चुनाव में कथित वोट चोरी को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और एक वोटर के अलग-अलग नामों से वोट देने का दावा किया।

इन प्रमुख मुद्दों ने NDA और महागठबंधन के बीच बिहार चुनाव में द्विध्रुवीय मुकाबले को आकार दिया। 14 नवंबर को आने वाले नतीजे संभावित रूप से बिहार के विकास या निरंतर संकट की तरफ बढ़ने का फैसला करेंगे। माना जा रहा है कि महिला और पहली बार मतदान करने जा रहे मतदाता बिहार चुनाव में एक्स फैक्टर साबित हो सकते हैं।

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