Earth Day 2026: इस बार ज्यादा गर्मी पड़ रही है.... हर साल गर्मी का सीजन आते ही लोगों को ये कहते अकसर ही सुना जाता है। बच्चे, बड़े, बूढ़े और जानवर तक गर्मी से बेहाल दिखते हैं। सरकार को बचाव के लिए गाइडलाइन तक जारी करनी पड़ती है। आसमान से बरसती आग को लेकर मौसम विभाग भी बार-बार अलर्ट भी जारी करता है। ये गर्मी साल दर साल बढ़ती ही जा रही है। दरअसल, ये गर्मी सिर्फ भारत के राज्यों और शहरों तक ही सीमित नहीं है। दुनिया के बाकी देशों में भी हर साल गर्मी रिकॉर्ड तोड़ रही है।
आज है पृथ्वी दिवस
आज यहां पर इन सब की बात इसलिए हो रही है, क्योंकि आज पृथ्वी दिवस (Earth Day) है। इसी धरती में हम सब रहते हैं, जिसका तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे मानव जीवन पर संकट लगातार मंडराता हुआ दिखाई दे रहा है।
ये है धरती के तापमान बढ़ने की प्रमुख वजह
धरती के तापमान बढ़ने की कई वजहें है। इसमें सबसे प्रमुख वजह जो है, वह ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन इसी रफ्तार से जारी रहा, तो अगले 20 सालों में पृथ्वी का औसत तापमान और तेजी से बढ़ सकता है, जिससे मानव जीवन पर कई गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।
जानिए 20 साल बाद कितना होगा धरती का तापमान
जलवायु पर वैश्विक अध्ययन करने वाली संस्था Intergovernmental Panel on Climate Change (IPCC) की रिपोर्ट के अनुसार, पृथ्वी पहले ही औद्योगिक युग से पहले के स्तर की तुलना में लगभग 1.2 से 1.3 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा रुझान जारी रहने पर साल 2045–2050 तक वैश्विक तापमान में करीब 0.3 से 0.6 डिग्री सेल्सियस तक और वृद्धि हो सकती है। यानी अगले 20 सालों में पृथ्वी का तापमान लगभग 1.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक के स्तर तक पहुंच सकता है, जिसे वैज्ञानिक जलवायु के लिए खतरनाक सीमा मानते हैं।
World Meteorological Organization (WMO) के अनुसार धरती का तापमान अभी 14 से 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास माना जा रहा है, जो कि 20 साल बाद यानी 2046 में ये 15.5 डिग्री सेल्सियस से 15.8 डिग्री सेल्सियस के आसपास तक पहुंच सकता है।
मानव जीवन पर आएंगी ये गंभीर समस्याएं
विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में यह बढ़ोतरी मानव जीवन पर कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकती है। सबसे बड़ा असर भीषण गर्मी और लू की घटनाओं के रूप में दिखाई देगा, जिससे खासकर बुजुर्गों, बच्चों और मजदूर वर्ग के लिए स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाएगा। इसके अलावा सूखा और पानी की कमी कई क्षेत्रों में गंभीर समस्या बन सकती है, जिससे खेती और पेयजल आपूर्ति पर दबाव बढ़ेगा।
समुद्र का स्तर भी बढ़ जाएगा
वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले दो दशकों में समुद्र का स्तर भी लगभग 10 से 20 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है, जिससे तटीय इलाकों में बाढ़ और भूमि क्षरण का खतरा बढ़ेगा। वहीं बढ़ते तापमान का असर फसलों की पैदावार पर भी पड़ सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा प्रभावित होने और महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
हीट स्ट्रोक और संक्रामक बीमारियां बढ़ेंगी
इसके साथ ही स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि गर्मी बढ़ने से हीट स्ट्रोक, सांस संबंधी बीमारियां और संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ सकता है। मच्छरों और अन्य कीटों के फैलाव वाले क्षेत्रों में भी विस्तार हो सकता है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के मामलों में वृद्धि संभव है।
बचाव के लिए ये ठोस कदम उठाने की है जरूरत
धरती के बढ़ते तापमान को कम करने का सुझाव भी विशेषज्ञों ने दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तापमान वृद्धि को सीमित करने के लिए कार्बन उत्सर्जन कम करना, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना और हरित क्षेत्रों का विस्तार बेहद जरूरी है। इसलिए पृथ्वी दिवस के अवसर पर सरकारों और आम लोगों से पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की सख्त जरूरत है।