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Explainer: गाजा के भविष्य को लेकर क्या सोचते हैं ट्रंप? लीक हुए प्लान से पता चली अमेरिका की मंशा

 Published : Sep 13, 2025 02:53 pm IST,  Updated : Sep 13, 2025 02:53 pm IST

लीक हुए अमेरिकी दस्तावेज़ 'ग्रेट ट्रस्ट' में गाजा को भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) का हिस्सा बनाने का प्लान है। इसमें गाजा को बहुराष्ट्रीय ट्रस्ट के तहत नियंत्रित कर पुनर्निर्मित किया जाएगा, लेकिन यह फिलिस्तीनी हितों की बजाय अमेरिका के राजनीतिक और आर्थिक फायदे के लिए है।

अमेरिका के राष्ट्रपति...- India TV Hindi
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। Image Source : AP

Explainer on Gaza: गाजा की हालत आज बहुत खराब है। घर-मोहल्ले मलबे में बदल चुके हैं। लाखों लोग तंबुओं में रहने को मजबूर हैं, जहां खाना, पानी और बिजली तक नहीं मिल रही। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप की सरकार से लीक हुआ एक 38 पेज का दस्तावेज, जिसे 'ग्रेट ट्रस्ट' कहा गया है, गाजा को पूरी तरह बदलने का प्लान पेश करता है। यह गाजा को भारत-मध्य पूर्व-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) का हिस्सा बनाना चाहता है।

'गाजा 2035' से मिलता है अमेरिका का प्लान

बाहर से देखें तो यह गाजा को दोबारा बसाने का प्लान लगता है, लेकिन असल में यह अमेरिका के फायदे, IMEC में तेजी लाने और 'अब्राहमी व्यवस्था' को मजबूत करने की बात करता है। 'अब्राहमी' का मतलब 2020 के उन समझौतों से है, जिनमें अमेरिका ने इजरायल, UAE और बहरीन के बीच रिश्ते सामान्य करवाए थे। यह प्लान इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के 'गाजा 2035' प्लान से काफी मिलता-जुलता है। उसमें गाजा को सऊदी अरब के नीओम प्रोजेक्ट से जोड़कर एक लॉजिस्टिक्स हब बनाने की बात थी, जिसमें फिलिस्तीनियों की मौजूदगी को कम से कम रखा जाए।

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Image Source : APIMEC को 2023 में नई दिल्ली में G-20 समिट में धरातल पर लाने की बात कही गई थी।

चीन के खिलाफ अमेरिका का दांव है IMEC

IMEC को 2023 में नई दिल्ली में G-20 समिट में धरातल पर लाने की बात कही गई। इस प्लान को अमेरिका, यूरोपीय संघ, भारत, सऊदी अरब और UAE ने मिलकर बनाया। यह रेल, बंदरगाह, पाइपलाइन और डिजिटल केबल्स का एक नेटवर्क है, जो भारत से यूरोप को अरब देशों के रास्ते जोड़ेगा।  इजरायल इसमें औपचारिक तौर पर नहीं है, लेकिन उसका रोल साफ है। यह कॉरिडोर भारत के बंदरगाहों से शुरू होकर UAE, सऊदी अरब, जॉर्डन और इजरायल के हाइफा बंदरगाह से होते हुए यूरोप तक जाएगा।

यह प्रोजेक्ट तेज व्यापार, कम खर्च और नए डेटा-ऊर्जा रास्तों का वादा करता है। लेकिन इसका असल मकसद राजनीतिक है। अमेरिका इसे चीन की 'बेल्ट एंड रोड' योजना के खिलाफ देखता है। यूरोप इसे स्वेज नहर और रूस की पाइपलाइनों से बचने के रास्ते के तौर पर देख रहा है। खाड़ी देश खुद को व्यापार का बड़ा केंद्र बनाना चाहते हैं। इजरायल हाइफा को यूरोप-एशिया व्यापार का गेटवे बताता है। भारत को यूरोप की तेज पहुंच के साथ अमेरिका और खाड़ी से रिश्ते मजबूत करने का मौका मिलेगा।

IMEC में आखिर गाजा कहां फिट बैठता है?

प्लान में गाजा को 2 तरह से दिखाया गया है, एक ईरान का गढ़ जो IMEC को नुकसान पहुंचाता है, दूसरा पुराने व्यापार मार्गों का चौराहा। इसे फिर से 'प्रो-अमेरिकी व्यवस्था' का लॉजिस्टिक्स केंद्र बनाने की बात है।  प्लान में मिस्र के अल-अरीश से गाजा का बंदरगाह बढ़ाने, वहां के उद्योगों को क्षेत्रीय व्यापार से जोड़ने और जमीन को 'स्मार्ट सिटीज़' में बदलने की योजना है। लेकिन यह गाजा के लोगों की मदद के लिए नहीं, बल्कि इसे IMEC का हिस्सा बनाने के लिए है।

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Image Source : APगाजा में चारों तरफ बर्बादी का मंजर नजर आता है।

'ग्रेट ट्रस्ट' का सबसे बड़ा हिस्सा है इसका ट्रस्टीशिप मॉडल। इसमें अमेरिका के नेतृत्व में गाजा को कंट्रोल करने की बात है। पहले अमेरिका-इजरायल समझौता होगा, फिर एक बहुराष्ट्रीय ट्रस्ट बनेगा। यह ट्रस्ट गाजा की सरकार, सुरक्षा, सहायता और विकास को चलाएगा। बाद में 'फिलिस्तीनी पॉलिटी' बनेगी, लेकिन ट्रस्ट का कंट्रोल बना रहेगा। इराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी कब्जे के प्लान भी इतने खुले तौर पर सामने नहीं आए थे जैसे गाजा को कॉर्पोरेट कब्जे में बदलने की बात की जा रही है।

प्लान में हर चीज को 'अब्राहमी' नाम दिया गया

अमेरिका के इस प्लान में 'स्वैच्छिक बेदखली' का जिक्र है। जो लोग गाजा छोड़ेंगे, उन्हें पैसे, किराया सब्सिडी और खाने का भत्ता मिलेगा। दस्तावेज कहता है कि 25% आबादी हमेशा के लिए चली जाएगी, और जितने ज्यादा लोग जाएं, उतना ज्यादा फायदा होगा।  लेकिन भुखमरी और इजरायल की नाकेबंदी के बीच इसे 'स्वैच्छिक' कहना गलत है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक यह 'इंजीनियर्ड भुखमरी' है। इसे चॉइस बताना फिलिस्तीनियों को बेदखल करने का बहाना है।  

प्लान में हर चीज को 'अब्राहमी' नाम दिया गया है। राफा में अब्राहम गेटवे, रेलवे का अब्राहमी कॉरिडोर, सऊदी-एमिराती नेताओं के नाम पर हाईवे। इसमें स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन, एआई डेटा सेंटर्स, लग्जरी रिसॉर्ट्स और डिजिटल-आईडी स्मार्ट शहरों की बात है, जहां जिंदगी डिजिटल सिस्टम से कंट्रोल होगी।

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Image Source : APगाजा में अस्थायी बाजार में खरीदारी करते लोग।

इस पूरे प्लान में क्या है सऊदी अरब का रोल?

प्लान खाड़ी के पैसों को गाजा में लगाने की बात करता है। इसमें 70-100 अरब डॉलर सरकारी और 35-65 अरब डॉलर निजी निवेश की योजना है। बंदरगाह, रेल, हॉस्पिटल और डेटा सेंटर्स इसके ज़रिए बनेंगे। सऊदी अरब अब्राहम समझौतों का हिस्सा नहीं, लेकिन IMEC को सपोर्ट करके इसकी मंजूरी दे चुका है। अमेरिका चाहता है कि गाजा का पुनर्निर्माण सऊदी को इजरायल से रिश्ते सामान्य करने के लिए मनाए। इसके लिए सऊदी को गाजा में रोल और IMEC में हिस्सा दिया जाएगा।

प्लान में फिलिस्तीनी 'पॉलिटी' की बात है, जिसे राज्यत्व की दिशा में कदम बताया जा सकता है। लेकिन यह सिर्फ दिखावा है। असल सवाल है कि यह किसके फायदे के लिए है? यह दस्तावेज गाजा को एक समाज की जगह 'जीरो वैल्यू' वाली जमीन बताता है, जिसे 10 साल में 324 अरब डॉलर की बनाया जा सकता है। यह तबाही को मुनाफे का मौका बनाने की कोशिश है।  लेकिन हकीकत में फिलिस्तीनी ऐसे प्लान्स को हमेशा नकारते रहे हैं। यह लीक दस्तावेज साफ करता है कि गाजा का भविष्य अमेरिका के बड़े क्षेत्रीय प्लान में उलझ गया है।  (PTI - द कन्वर्सेशन)

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