लोकभवन सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल से मुलाकात कर TVK चीफ विजय ने 116 MLA's के समर्थन की चिट्ठी सौंपी और कहा कि VCK के 2 MLA's ने भी उन्हें समर्थन देने की बात कही है और कुछ देर में उनका समर्थन पत्र भी मिल जाएगा।
इस भरोसे के बाद TVK चीफ ने शनिवार को 11 बजे शपथ का समय मांगा। इसपर गवर्नर ने कहा कि अगर उन्हें 118 MLA's के सपोर्ट की चिट्ठी मिलती है तो उन्हें शनिवार को 11 बजे शपथ दिलाने में कोई दिक्कत नहीं है। विजय के लोकभवन से निकलने बाद TVK ने कहा कि विजय कल सुबह 11 बजे शपथ ले रहे हैं।
विजय के शपथ ग्रहण पर फंसा पेंच
पिछली दो मुलाकातों के बाद आधे घण्टे के अंदर लोकभवन से प्रेस रिलीज़ के जरिये मीडिया को शपथ ग्रहण की सूचना दी गई थी, लेकिन आज की मुलाकात के बाद अब तक राजभवन से विजय को सीएम पद के शपथ के लिए इनवाइट नहीं मिला है। अभी भी गवर्नर हाउस में बचे हुए दो विधायकों की चिट्ठी का इंतजार किया जा रहा है। जिन दो विधायकों की चिट्ठी VCK के चीफ थोल तिरुमावलन को देनी है उन्होंने DMK अध्यक्ष M K स्टालिन से मुलाकात की है और सूत्रों के मुताबिक इस मुलाकात के बाद तिरुमावलन का TVK से सम्पर्क नहीं हो रहा है।

इस बीच एक बड़ी ख़बर आ रही है AMMK के चीफ TTV दिनाकरन ने राज्यपाल से मुलाकात कर उन्हें एक पत्र सौंपा है और कहा है कि E पलनिस्वामी के पास 120 विधायकों का सपोर्ट है उन्हें सरकार बनाने का दावा पेश करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
एएमएमके ने कर दिया खेला
एएमएमके के महासचिव टी.टी.वी. दिनाकरन ने कहा, "मैं एआईएडीएमके का समर्थन कर रहा हूं। मैंने एडप्पाडी पलानीस्वामी के सरकार गठन के समर्थन में यह पत्र जमा किया है। हमारे विधायक कामराज ने भी इस पर हस्ताक्षर करके इसे मेरे सचिव के माध्यम से भेजा है। जब मैंने टीवीके को देखा तो मैं चौंक गया, क्योंकि वहां कोई और पत्र था - शायद जाली पत्र, या फिर यह विधायकों की खरीद-फरोख्त का मामला हो सकता है। मैंने अपने विधायक को फोन किया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका... उन्होंने शाम करीब 6:30 बजे इस पत्र पर हस्ताक्षर करके इसे यहां भेजा।
दिनाकरन ने कहा, जब मैंने टीवी पर देखा कि हमारी पार्टी ने विजय का समर्थन किया है, तो मैं हैरान रह गया। इसलिए, मैंने राज्यपाल से मिलने का समय लिया और उन्हें पत्र सौंपकर इस मामले की जांच करने का अनुरोध किया। मुझे लगता है कि यह जाली है या विधायकों की खरीद-फरोख्त का मामला है... उन्हें इसे बर्दाश्त नहीं करना चाहिए..."

अगर विजय की सरकार बन भी गई तो...
अब बिगड़े सियासी समीकरण में अगर तमिलनाडु में विजय की सरकार तो बन जाएगी लेकिन आने वाले दिनों में उन्हें DMK और AIADMK के संयुक्त विरोध का सामना करने के लिए विजय की सरकार को तैयार रहना होगा। बीजेपी के साथ चुनाव लड़ने वाली AIADMK अब एनडीए से दूरी बनाने की तैयारी में लगी है। जयललिता के निधन के बाद लगातार चुनावी झटके झेल रही AIADMK अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए नए समीकरण तलाश रही है। ऐसे में पार्टी के भीतर एनडीए से अलग होने को लेकर मंथन तेज हो गया है।
एक साथ आ सकते हैं एआईएडीएमके और डीएमके
अगर AIADMK बीजेपी से अलग होती है तो वह स्टालिन की DMK के साथ जाएगी या विजय की TVK के साथ नया गठबंधन बनाएगी। DMK पहले से ही कांग्रेस और TVK की नजदीकियों से नाराज बताई जा रही है, जबकि बीजेपी भी कांग्रेस को सत्ता से दूर रखना चाहती है, जब ऐसे समीकरण बन रहे हैं तो अब AIADMK किंगमेकर की भूमिका में नजर आ रही है। अभी जैसे समीकरण बन रहे हैं वैसे में तमिलनाडु की राजनीति में कभी ऐसा असमंजस देखने को मिला नहीं, जब डीएमके और एआईएडीएमके जैसे एक दूसरे के कट्टर विरोधी भी सत्ता के लिए नए समीकरण बनाने पर मजबूर दिखाई दे रहे हों। दोनों का एक ही मकसद है-विजय के विजय रथ को रोकना।
क्या होगा अब आगे
तमिलनाडु में चनाव में हार के बाद DMK ने AIADMK की सरकार बनवाने का प्रयास किया, लेकिन स्टालिन ने CPI-CPM और VCK से कहा था कि वो भी AIADMK को बाहर से सपोर्ट करें, पर कम्युनिस्ट पार्टियों को AIADMK के भाजपा गठबंधन से दिक्कत है, लेकिन उन्होंने विजय को सपोर्ट करने का फैसला स्टालिन को बताने के बाद ही किया था। इसलिए उनसे नाराजगी कम है, स्टालिन की असली नाराजगी कांग्रेस से है, जिसने बिना बात किए उतावला होकर विजय की TVK को सपोर्ट किया।

अब DMK के नेताओं को लगता है कि अगर कांग्रेस अचानक DMK का साथ नहीं छोड़ती तो DMK और AIADMK मिलकर विजय की सरकार नहीं बनने देते। मजे की बात ये है कि कांग्रेस और लेफ्ट का सपोर्ट मिलने के बाद भी विजय बहुमत का आंकड़ा नहीं जुटा पाए हैं। वो राज्यपाल से तीन बार मिल चुके हैं, लेकिन उनके पास कुल 116 विधायकों का ही सपोर्ट है। अभी भी बहुमत के लिए दो विधायकों की कमी है। अब बदले हालात में कुछ भी हो सकता है। VCK के नेताओं की स्टालिन से मीटिंग चल रही है। अब अगर DMK और AIADMK साथ आते हैं तो कांग्रेस मुश्किल में फंसेगी।