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ईरान से जंग के बीच मिडिल-ईस्ट से आ सकती है खुशखबरी! बिना लड़ाई-झगड़े के सुलझने जा रहा इजरायल-लेबनान का मसला? क्या है अमेरिका का पूरा प्लान

 Written By: Vinay Trivedi @JournoVinay
 Published : Jul 16, 2026 07:26 am IST,  Updated : Jul 16, 2026 10:52 am IST

हिज्बुल्लाह ने हमला किया तो इजरायल ने लेबनान में घुसकर उसकी जमीन पर कब्जा जमा लिया। अब इजरायली सेना के कब्जे से लेबनान की जमीन छुड़वाने और हिज्बुल्लाह से हथियार डलवाने को लेकर बातचीत के जरिए मसला सुलझाने को लेकर कवायद तेज हो गई है। जानें ये पेचीदा मसला कैसे हल किया जा रहा है।

Israel Lebanon withdrawal agreement 2026- India TV Hindi
सिर्फ 'दंड' नहीं 'साम' से भी सुलझ सकता है मिडिल-ईस्ट का मसला। Image Source : AP

Highlights

  • इजरायल-लेबनान के बीच रोम में 2 दिन तक चली बातचीत।
  • पायलट जोन प्रक्रिया के तहत लेबनान को सौंपी जाएगी जमीन।
  • इजरायल-लेबनान के समझौते से हिज्बुल्लाह को है ऐतराज।

अमेरिका की मध्यस्थता में रोम में 2 दिन तक चली बातचीत के बाद, इजरायल और लेबनान ने साउथ लेबनान में 'पायलट जोन' लागू करने की तरफ बड़ा कदम उठाया है। इन जोन से इजराइली फौज हट जाएगी और कंट्रोल लेबनान आर्मी को सौंप दिया जाएगा। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, इजरायल और लेबनान के बीच बातचीत कामयाब रही और दोनों पक्ष पायलट जोन प्रक्रिया के ढांचे और दिशा-निर्देशों पर राजी हो गए, जिन्हें आने वाले दिनों में अंतिम रूप दिया जाएगा और लागू किया जाएगा। जानें ये पायलट जोन क्या है और इसे लेबनान में शांति के लिए कैसे लागू किया जाएगा।

फिर क्यों शुरू हुई थी इजरायल-हिज्बुल्लाह की जंग?

बता दें कि इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच हालिया जंग तब शुरू हुई जब लेबनान के चरमपंथी समूह हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट दागे थे। यह घटना इजरायल और अमेरिका की तरफ से 28 फरवरी को ईरान पर हमले कुछ दिनों बाद हुई थी। इसके बाद, इजरायल ने भी हिज्बुल्लाह पर पलटवार किया और फिर लेबनान में घुसकर उसके दक्षिणी भाग के एक बड़े इलाके पर कब्जा जमा लिया। दूसरी तरफ, हिज्बुल्लाह, लेबनान और इजरायल के बीच सीधी बातचीत का कड़ा विरोध करता रहा है लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ।

जून में 'फ्रेमवर्क समझौते' का हुआ ऐलान

हालांकि, रोम में बातचीत के परिणामों को लेकर इजरायल या लेबनान की तरफ से तत्काल कोई स्टेटमेंट नहीं आया है। गौरतलब है कि लेबनान और इजरायल ने बीते 26 जून को एक 'फ्रेमवर्क समझौते' का ऐलान किया था। इसमें ईरान सपोर्टेड हिज्बुल्लाह के हथियार छोड़ने के एवज में साउथ लेबनान से इजराइली फौज को हटाने की प्लानिंग की गई।

लेबनानी आर्मी को अपने कब्जे वाले इलाके सौंपेगा इजरायल

इस समझौते की शुरुआत दो पायलट जोन की स्थापना से होनी है, जिसमें इजरायली फौज, लेबनान की आर्मी को अपने कब्जे वाले इलाके का नियंत्रण सौंपने वाली है। जहां फिर लेबनानी सेना, हिज्बुल्लाह की मौजूदगी को खत्म करेगी। हालांकि, इस सप्ताह होने वाली बातचीत से पहले ही ग्राउंड लेवल पर इसे लागू करने का काम रुक गया था।

दो पायलट जोन कहां होंगे, ये अभी नहीं हुआ तय

जान लें कि लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ आउन, जो आगामी 21 जुलाई को अमेरिका जाने वाले हैं, ने रोम में हुई बातचीत से पहले एक स्टेटमेंट में कहा था कि लेबनानी प्रतिनिधिमंडल को निर्देश दिया गया है कि वह किसी भी चर्चा पर आगे बढ़ने से पहले 2 पायलट जोन से इजरायली फौज को तुरंत हटाने की मांग करें। हालांकि, अभी तक यह नहीं बताया गया कि दक्षिणी लेबनान में ये दो पायलट जोन कहां होंगे, लेकिन इजरायल और लेबनान के अधिकारियों ने पहले कहा था कि इनमें घंदौरियेह, जवतार और फ्रौन शहर शामिल होंगे।

लेबनान-इजरायल के बीच जोन के निर्धारण पर फंसी बात

लेकिन लेबनान में निर्धारित किए गए जोन को लेकर भी कुछ विवाद हुआ क्योंकि चुने गए अधिकतर इलाकों में शुरुआत में इजरायल के सैनिक मौजूद ही नहीं थे, जिसकी वजह से यह प्रश्न उठा कि वहां से इजरायली सेना की वापसी कैसे हो सकती है। दरअसल, लेबनानी सेना का मानना था कि पायलट जोन को बड़ा होना चाहिए और उनमें इजरायली सेना के कब्जे वाले अधिक इलाके शामिल होने चाहिए।

हथियार छोड़ने के लिए राजी नहीं चरमपंथी गुट हिज्बुल्लाह

वहीं, अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा कि पायलट जोन लागू होने के बाद, हम आगे की टेक्निकल बातचीत को शुरू करेंगे, जिसका लक्ष्य इजरायल और लेबनान के बीच समझौता करना है। दूसरी तरफ, लेबनान के चरमपंथी गुट हिज्बुल्लाह का कहना है कि वह इस समझौते को नहीं मानेगा और उसका हथियार छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। वहीं, इजराइली अफसरों ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि वे साउथ लेबनान पर लंबे वक्त तक कब्जा बनाए रखने की प्लानिंग कर रहे हैं।

लेबनान से इजरायल के हटने के पक्ष में हैं ट्रंप

इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अपने इरादे जाहिर करते हुए कह चुके हैं कि इजरायल को लेबनान और साउथ सीरिया के इलाकों से अपनी सेना को हटाकर दूसरी जगह तैनात करना चाहिए। ट्रंप ने इजरायल को ये भी नसीहत दी कि हमें अपनी ऊर्जा को बड़ी चुनौतियों पर खर्च करना चाहिए और बड़ी चुनौती ईरान है।

लेबनान में सीरियाई सेना का दखल चाहते हैं ट्रंप

हाल में नाटो समिट और उससे पहले G7 शिखर सम्मेलन के दौरान, सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से मुलाकात में ट्रंप ने उनसे हिज्बुल्लाह से निपटने के लिए लेबनान में सीरियाई फौज भेजने का प्रस्ताव दोहराया था। ट्रंप ने कहा था कि अल-शरा, इजरायल के मुकाबले ज्यादा अच्छा काम करेंगे।

(इनपुट- AP)

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