North Korea Election: उत्तर कोरिया में 15 मार्च 2026 को सुप्रीम पीपुल्स असेंबली यानी कि वहां की संसद के लिए चुनाव हुए और नतीजे भी आ गए हैं। सरकारी मीडिया KCNA के मुताबिक, इस बार भी सब कुछ पिछले चुनावों जैसा ही रहा और सारी की सारी 687 सीटें किम जोंग उन की वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया के उम्मीदवारों ने जीत लीं। वोटर टर्नआउट 99.99% बताया गया और 99.93% लोगों ने किम के उम्मीदवारों के पक्ष में वोट किया और सिर्फ 0.07 फीसदी लोगों ने इनके नाम के आगे 'नहीं' पर टिक किया। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि उत्तर कोरिया में चुनाव कैसे होते हैं, क्यों किम जोंग उन की हर बार 'जीत' होती है, और इस बार क्या नया हुआ।
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उत्तर कोरिया की संसद कैसे काम करती है?
उत्तर कोरिया की संसद का नाम सुप्रीम पीपुल्स असेंबली (SPA) यानी सर्वोच्च जन सभा है। इसमें कुल 687 सदस्य या डिप्टी होते हैं, जो देश के अलग-अलग इलाकों से चुने जाते हैं। यह संसद कानून बनाती है, देश के बड़े अधिकारियों को नियुक्त करती है और नीतियां मंजूर करती है। लेकिन असल में सारी असली ताकत वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया यानी कि किम जोंग उन की पार्टी के पास होती है। संसद सिर्फ पार्टी के फैसलों को औपचारिक मंजूरी देती है और यहां कोई असली बहस या विरोध नहीं होता।

उत्तर कोरिया में सांसदों का चुनाव कैसे होता है?
उत्तर कोरिया में हर सीट पर सिर्फ एक ही उम्मीदवार होता है, जो पहले से ही पार्टी द्वारा चुना जाता है। वहां चुनावों में कोई दूसरा उम्मीदवार खड़ा नहीं हो सकता। मतदाता को बस एक बॉक्स में 'हां' (समर्थन) या 'नहीं' (विरोध) डालना होता है। हालांकि 'नहीं' डालना बहुत जोखिम भरा माना जाता है क्योंकि पार्टी और सरकार हर वोट को ट्रैक कर सकती है। लोग बड़े-बड़े ग्रुप में वोट डालने जाते हैं और पड़ोसी, सहकर्मी, एवं स्थानीय अधिकारी सब देखते हैं इसलिए बहुत कम लोग ही 'नहीं' पर टिक करते हैं। यही वह है कि टर्नआउट और समर्थन हमेशा 99 फीसदी के आसपास ही रहता है।
उत्तर कोरिया के चुनावों में पहली बार क्या हुआ?
उत्तर कोरिया में हर बार चुनाव आमतौर पर एक ही तरह से होते हैं लेकिन इस बार एक नई बात हुई है। ऐसा पहली बार हुआ है जब विरोध के वोटों का जिक्र हुआ है। बता दें कि इस बार 0.07 फीसदी लोगों ने किम की पार्टी के विरोध में वोट डाला है। टर्नआउट 99.99 फीसदी रहा और जिन लोगों ने वोट नहीं डाला उनमें से 0.0037 फीसदी लोग या तो विदेश में थे या समुद्र में तैनात थे। सिर्फ 0.00003 फीसदी लोग ऐसे थे जिन्होंने इन चुनावों में वोट नहीं दिया। इस बार 687 में से 687 सीटें एक बार फिर किम की ही पार्टी ने जीत लीं।
उत्तर कोरिया में चुनाव क्यों महत्वपूर्ण माने जाते हैं?
उत्तर कोरिया एक एकदलीय राज्य है, जहां वर्कर्स पार्टी सब कुछ नियंत्रित करती है। चुनाव का मकसद नेता को चुनना नहीं होता, बल्कि लोगों से वफादारी दिखवाना और दुनिया को दिखाना है कि पूरा देश एकजुट है। इसमें अगर कोई विरोध करता है तो उसे जेल या फिर उससे भी बदतर सजा मिल सकती है। यही वजह है कि टर्नआउट और समर्थन हमेशा 99 फीसदी से ऊपर रहता है। इन चुनावों में चुने गए नेता पार्टी के फैसलों को औपचारिक रूप देते हैं। इस तरह देखा जाए तो उत्तर कोरिया में चुनाव जीतने का मतलब असली प्रतियोगिता नहीं, बल्कि पूरे देश से समर्थन का दिखावा है।