1. Hindi News
  2. Explainers
  3. क्या फिर लौटेगा सुपरसोनिक उड़ानों का दौर? जानें, 53 साल पहले लगे बैन को क्यों हटा रहा अमेरिका

क्या फिर लौटेगा सुपरसोनिक उड़ानों का दौर? जानें, 53 साल पहले लगे बैन को क्यों हटा रहा अमेरिका

 Written By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
 Published : Jul 01, 2026 07:32 am IST,  Updated : Jul 01, 2026 07:39 am IST

अमेरिका 53 साल पुराने जमीन के ऊपर सुपरसोनिक उड़ानों के बैन को हटाने की तैयारी कर रहा है। नए नियम शोर सीमा पर आधारित होंगे। नासा के X-59 की कम सोनिक बूम तकनीक से यह बदलाव संभव हुआ है। इससे तेज, सुरक्षित और शांत यात्री उड़ानों का नया दौर शुरू होने की उम्मीद बढ़ी है।

Supersonic Flights, NASA X-59, FAA Supersonic Ban- India TV Hindi
आवाज से भी तेज गति से उड़ने वाले विमानों का दौर फिर से आने वाला है। Image Source : INDIA TV/AP

वॉशिंगटन: अमेरिका 53 साल पुराने उस नियम को बदलने की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत देश के अंदर जमीन के ऊपर ध्वनि की गति से तेज यानी कि सुपरसोनिक उड़ानों पर रोक लगी हुई थी। अमेरिकी परिवहन विभाग ने एक नया प्रस्ताव जारी किया है, जिसमें शोर के आधार पर सुपरसोनिक विमानों के ऑपरेशन को इजाजत देने की बात कही गई है। इस कदम को विमानन क्षेत्र में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

आखिर सुपरसोनिक उड़ान क्या होती है?

जब कोई विमान ध्वनि की गति से तेज उड़ता है, तो उसे सुपरसोनिक उड़ान कहा जाता है। ध्वनि की गति को मैक 1 (Mach 1) कहा जाता है, जो लगभग 767 मील यानी कि 1235 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। इससे ज्यादा स्पीड पर उड़ने वाले विमान सुपरसोनिक श्रेणी में आते हैं।

अभी अमेरिका में इसे लेकर क्या नियम है?

फिलहाल अमेरिका में जमीन के ऊपर सुपरसोनिक उड़ानों पर प्रतिबंध है। किसी भी विमान को ध्वनि की गति से तेज उड़ान भरने के लिए अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन (FAA) से विशेष इजाजत लेनी पड़ती है। यह इजाजत केवल अनुसंधान और परीक्षण के लिए तथा आबादी से दूर इलाकों में ही दी जाती है।

Supersonic Flights, NASA X-59, FAA Supersonic Ban
Image Source : APNASA X-59 अन्य सुपरसोनिक विमानों की तरह शोर नहीं करता।

अब क्या बदलाव होने जा रहा है?

अमेरिकी परिवहन विभाग और FAA ने प्रस्ताव दिया है कि 1973 के प्रतिबंध की जगह शोर की तय सीमा लागू की जाए। यानी यदि कोई विमान ध्वनि की गति से तेज उड़ता है, लेकिन उसका शोर निर्धारित सीमा से कम रहता है, तो उसे जमीन के ऊपर भी उड़ान भरने की अनुमति मिल सकती है। FAA इस साल के अंत तक टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान होने वाले शोर के लिए भी अलग नियम लाएगा। दोनों नियमों को वर्ष 2027 के मध्य तक अंतिम रूप देने की योजना है।

अचानक यह फैसला क्यों लिया गया?

इसकी सबसे बड़ी वजह नासा (NASA) का नया एक्सपरिमेंटल विमान X-59 है। इसी महीने 5 जून को हुए परीक्षण में इस विमान ने 43400 फीट की ऊंचाई पर 713 मील या 1148 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार हासिल की। इस विमान की खासियत यह है कि यह पारंपरिक सुपरसोनिक विमानों की तरह तेज सोनिक बूम पैदा नहीं करता, बल्कि केवल हल्की-सी 'थंप' जैसी आवाज सुनाई देती है। नासा का दावा है कि नई तकनीक से शोर की समस्या काफी हद तक दूर की जा सकती है।

इस मामले में सरकार क्या कह रही है?

एफएए प्रमुख ब्रायन बेडफोर्ड का कहना है कि एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, नई सामग्री, शोर कम करने वाली तकनीक और नए परिचालन तरीकों की वजह से पुराने समय वाली सोनिक बूम की समस्या खत्म की जा सकती है। उनका कहना है कि इससे 1970 के दशक में लगाया गया प्रतिबंध हटाया जा सकता है और लोगों पर शोर का असर भी कम रहेगा।

अमेरिका के परिवहन मंत्री शॉन पी. डफी ने कहा कि जमीन के ऊपर सुपरसोनिक उड़ानों की वापसी सिर्फ तेज यात्रा का मामला नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी इनोवेशन को बढ़ावा देने और विमानन क्षेत्र में नए दौर की शुरुआत करने वाला कदम है। उनके मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में सरकार सुरक्षित तरीके से इस तकनीक को आम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।

Supersonic Flights, NASA X-59, FAA Supersonic Ban
Image Source : APज्यादा ऑपरेशनल खर्च के कारण कॉनकॉर्ड की सर्विस को बंद कर दिया गया था।

व्हाइट हाउस के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति कार्यालय के निदेशक माइकल क्राट्सियोस ने कहा कि पुराने नियमों ने लंबे समय तक इंजीनियरों और विमान निर्माताओं की प्रगति को रोके रखा। अब इन नियमों में बदलाव से विमानन उद्योग मजबूत होगा, नए रोजगार पैदा होंगे और भविष्य की विमानन तकनीक अमेरिका में विकसित होगी।

क्या पहले भी सुपरसोनिक प्लेन उड़ चुके हैं?

आपको बता दें कि दुनिया का सबसे प्रसिद्ध सुपरसोनिक यात्री विमान कॉनकॉर्ड था, जिसे एयर फ्रांस और ब्रिटिश एयरवेज संचालित करती थीं। यह विमान मैक 2, यानी ध्वनि की गति से लगभग दोगुनी रफ्तार से उड़ता था और अटलांटिक महासागर को लगभग साढ़े तीन घंटे में पार कर लेता था। हालांकि उसे केवल समुद्र के ऊपर ही सुपरसोनिक गति से उड़ने की अनुमति थी। जमीन के ऊपर उसे सामान्य गति से उड़ना पड़ता था। इसकी उड़ान में ज्यादा खर्च के कारण वर्ष 2003 में कॉनकॉर्ड सेवा बंद कर दी गई।

FAA Supersonic Ban, Boom Supersonic, Sonic Boom
Image Source : APबूम सुपरसोनिक भी आवाज से तेज गति से उड़ने वाले विमान बनाने में लगी हुई है।

कंपनियां इस दिशा में क्या कर रही हैं?

नासा के अलावा अमेरिका की बूम सुपरसोनिक (Boom Supersonic) और स्पाइक एयरोस्पेस (Spike Aerospace) जैसी कंपनियां भी नए सुपरसोनिक विमान विकसित कर रही हैं। इन कंपनियों का लक्ष्य भविष्य में ट्रांस-अटलांटिक उड़ानों का समय 4 घंटे से भी कम करना है। यदि नए नियम लागू हो जाते हैं, तो आने वाले वर्षों में तेज, सुरक्षित और अपेक्षाकृत शांत सुपरसोनिक यात्री उड़ानों का रास्ता खुल सकता है।

आखिर 1973 में बैन क्यों लगाया गया था?

अमेरिका ने वर्ष 1973 में जमीन के ऊपर सुपरसोनिक उड़ानों पर प्रतिबंध इसलिए लगाया था क्योंकि उस समय ऐसे विमान बेहद तेज सोनिक बूम पैदा करते थे। यह आवाज किसी बड़े धमाके जैसी महसूस होती थी। इससे घरों की खिड़कियां हिल जाती थीं, कई बार शीशे टूटने की शिकायतें आती थीं और इमारतों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता था। लगातार होने वाला तेज शोर लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता था और पर्यावरण पर भी असर डालता था। इसलिए आम लोगों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह बैन लगाया था।

ये भी पढ़ें:

पहले 'मेड इन इंडिया' C-295 विमान ने भरी उड़ान, जानें क्यों खास है ये उपलब्धि

राफेल लड़ाकू विमानों को मिली नई 'सुपर ताकत', स्टेल्थ फाइटर जेट के भी उड़ेंगे परखच्चे

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Explainers से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।