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एक्सरसाइज से पहले या बाद में कब करना चाहिए स्ट्रेचिंग? जानें इसे करने से कौन से फायदे मिलते हैं?

Written By: Poonam Yadav @R154Poonam
Published : Jul 20, 2025 07:21 am IST,  Updated : Jul 20, 2025 07:39 am IST
स्ट्रेचिंग, व्यायाम का एक बहुत ही ज़रूरी हिस्सा है। जिस तरह आप दिल की सेहत के लिए एरोबिक एक्सरसाइज़ करते हैं और मसल्स को मजबूत बनाने के लिए वेट लिफ्टिंग करते हैं ठीक उसी तरह अपने वर्कआउट रूटीन में स्ट्रेचिंग को भी शामिल करना चाहिए। हालांकि, रोज़ाना स्ट्रेचिंग करना ज़रूरी नहीं है, लेकिन कुछ एक्सरसाइज़ के बाद स्ट्रेचिंग ज़रूर करना चाहिए। चलिए जानते हैं वर्कआउट से पहले या बाद में स्ट्रेचिंग कब करना चाहिए? साथ ही इसके फायदे क्या हैं?
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स्ट्रेचिंग, व्यायाम का एक बहुत ही ज़रूरी हिस्सा है। जिस तरह आप दिल की सेहत के लिए एरोबिक एक्सरसाइज़ करते हैं और मसल्स को मजबूत बनाने के लिए वेट लिफ्टिंग करते हैं ठीक उसी तरह अपने वर्कआउट रूटीन में स्ट्रेचिंग को भी शामिल करना चाहिए। हालांकि, रोज़ाना स्ट्रेचिंग करना ज़रूरी नहीं है, लेकिन कुछ एक्सरसाइज़ के बाद स्ट्रेचिंग ज़रूर करना चाहिए। चलिए जानते हैं वर्कआउट से पहले या बाद में स्ट्रेचिंग कब करना चाहिए? साथ ही इसके फायदे क्या हैं?
आम तौर पर, स्ट्रेचिंग तब करनी चाहिए जब आपका शरीर गर्म हो चुका हो। इसलिए, इसे वर्कआउट खत्म होने के बाद या कूल-डाउन के दौरान करना सबसे अच्छा होता है। अगर आपका मकसद सिर्फ़ स्ट्रेचिंग ही है (जैसे योग या पिलेट्स), तो भी आपको पहले थोड़ी हल्की कसरत करके शरीर को गर्म ज़रूर करना चाहिए। इससे आपकी मांसपेशियाँ स्ट्रेचिंग के लिए तैयार हो जाती हैं।
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आम तौर पर, स्ट्रेचिंग तब करनी चाहिए जब आपका शरीर गर्म हो चुका हो। इसलिए, इसे वर्कआउट खत्म होने के बाद या कूल-डाउन के दौरान करना सबसे अच्छा होता है। अगर आपका मकसद सिर्फ़ स्ट्रेचिंग ही है (जैसे योग या पिलेट्स), तो भी आपको पहले थोड़ी हल्की कसरत करके शरीर को गर्म ज़रूर करना चाहिए। इससे आपकी मांसपेशियाँ स्ट्रेचिंग के लिए तैयार हो जाती हैं।
वर्कआउट से पहले स्ट्रेचिंग: वर्कआउट शुरू करने से पहले हल्की स्ट्रेचिंग करने से शायद तुरंत कोई बड़ा बदलाव महसूस न हो, लेकिन यह चोट लगने के खतरे को कम करने में मदद करती है। साथ ही इससे आपकी स्पीड लिमिट बढ़ जाती है।
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वर्कआउट से पहले स्ट्रेचिंग: वर्कआउट शुरू करने से पहले हल्की स्ट्रेचिंग करने से शायद तुरंत कोई बड़ा बदलाव महसूस न हो, लेकिन यह चोट लगने के खतरे को कम करने में मदद करती है। साथ ही इससे आपकी स्पीड लिमिट बढ़ जाती है।
वर्कआउट के बाद स्ट्रेचिंग: वर्कआउट खत्म होने के बाद स्ट्रेचिंग करने से मांसपेशियों के दर्द को कम करने में मदद मिलती है। इस समय स्ट्रेचिंग करने का मकसद शरीर को धीरे-धीरे उसकी सामान्य अवस्था में वापस लाना होता है। यह हमारी मांसपेशियों को आराम पहुँचाता है, और दिल की धड़कन व साँस लेने की गति को सामान्य करने में मदद करता है।
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वर्कआउट के बाद स्ट्रेचिंग: वर्कआउट खत्म होने के बाद स्ट्रेचिंग करने से मांसपेशियों के दर्द को कम करने में मदद मिलती है। इस समय स्ट्रेचिंग करने का मकसद शरीर को धीरे-धीरे उसकी सामान्य अवस्था में वापस लाना होता है। यह हमारी मांसपेशियों को आराम पहुँचाता है, और दिल की धड़कन व साँस लेने की गति को सामान्य करने में मदद करता है।
स्ट्रेचिंग से फ़ायदे: स्ट्रेचिंग सिर्फ़ वर्कआउट के लिए ही नहीं, बल्कि कई और तरह से भी फ़ायदेमंद है। स्ट्रेचिंग से मांसपेशियाँ और जोड़ ढीले होते हैं, जिससे शरीर ज़्यादा लचीला बनता है। लचीलापन बढ़ने से चोट लगने की संभावना कम हो जाती है। यह शरीर में खून के बहाव को सुधारती है। स्ट्रेचिंग से तनाव और खिंचाव कम होता है, जिससे आप हल्का महसूस करते हैं। मांसपेशियों को आराम मिलने से अच्छी नींद आने में भी मदद मिल सकती है।
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स्ट्रेचिंग से फ़ायदे: स्ट्रेचिंग सिर्फ़ वर्कआउट के लिए ही नहीं, बल्कि कई और तरह से भी फ़ायदेमंद है। स्ट्रेचिंग से मांसपेशियाँ और जोड़ ढीले होते हैं, जिससे शरीर ज़्यादा लचीला बनता है। लचीलापन बढ़ने से चोट लगने की संभावना कम हो जाती है। यह शरीर में खून के बहाव को सुधारती है। स्ट्रेचिंग से तनाव और खिंचाव कम होता है, जिससे आप हल्का महसूस करते हैं। मांसपेशियों को आराम मिलने से अच्छी नींद आने में भी मदद मिल सकती है।
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