Published : Dec 10, 2022 11:16 pm IST, Updated : Dec 10, 2022 11:16 pm IST
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मध्य प्रदेश के रतलाम शहर में माता महालक्ष्मी का एक अति प्राचीन मंदिर स्थित है। रतलाम के माणक इलाके में स्थित इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां जो भी मां लक्ष्मी से श्रद्धा से मांगों वह पूरा अवश्य होता है। खास बात ये है कि इस मंदिर में गहने चढ़ाने की परंपरा है। मंदिर में गहनों को चढ़ाने की परंपरा दशकों पुरानी है। पहले बताया जाता है कि प्राचीन काल में यहां के राजा राज्य की समृद्धि के लिए मंदिर में धन आदि चढ़ाते थे और अब भक्त भी यहां जेवर, पैसे माता के चरणों में चढ़ाने लगे हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से उनके घरों में मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है।
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मुहास हनुमान मंदिर मध्य प्रदेश के कटनी में स्थित है। इस अदभुत मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों की हड्डी संबंधी परेशानियां दूर हो जाती है। हनुमान जी का ये मंदिर काफी सिद्ध माना जाता है। लोग दूर दूर से यहां हनुमान जी के दर्शन करने आते हैं। यहाँ पर हर शनिवार औऱ मंगलवार को मेले जैसा माहौल होता है।
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राजस्थान के जोधपुर में रातानाड़ा नामक गणेश मंदिर स्थापित है। कहा जाता है कि पुरातन काल में एक शिक्षक ने रातानाड़ा की पहाड़ी पर भगवान गणेश की एक प्रतिमा देखी। बाद में उन्होंने इसी स्थान पर एक मंदिर का निर्माण करवा कर प्रतिमा को यहां विराजित कर दिया। ये मंदिर करीब 150 वर्ष पुराना है। इस मंदिर में भक्त दूर दूर से दर्शन करने आते हैं। भक्तों की मान्यता है कि यहां आने से भगवान गणेश उनके सभी विघ्न हर लेते हैं।
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अमृतसर शहर के लौह गेट के पास स्थापित प्रसिद्ध दुर्गियाणा मंदिर को लक्ष्मी नारायण मंदिर भी कहा जाता है। माता के एक भक्त हरसाई मल कपूर ने स्वर्ण मंदिर की तर्ज पर इस मंदिर का निर्माण करवाया था। देखने में भी ये स्वर्ण मंदिर की तरह ही लगता है। यहां पर देवी दुर्गा के साथ ही सीता राम जी, हनुमान जी सहित कई देवी देवताओं के मंदिर बने हुए हैं। यहां पर दीवार पर बहुत सुंदर नक्काशी की गयी है इसके साथ ही यहां धर्मग्रंथों का उत्कृष्ट संकलन भी इस स्थान को विशेष बनाता है। चांदी का दरवाजा होने के कारण यह मंदिर रजत मंदिर भी कहलाता है।
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हैदराबाद में पवित्र केसरी हनुमान मंदिर स्थित है। केसरी हनुमान मंदिर पुराने हैदराबाद शहर में उपनगर करवन के जियागुड़ा पड़ोस में बना है जो तेलंगाना में पड़ता है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना 17वीं शताब्दी के दौरान की गई थी। इस मंदिर को लेकर मान्यता ये है कि रामायण काल में, माता सीता की खोज करते हुए, हनुमान जी ने इसी स्थान पर आकर श्री राम पूजा की थी। यही कारण है कि इस स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है। लोग दूर-दूर से यहां आकर हनुमान जी के दर्शन तो करते ही हैं साथ ही राम नाम जप कर हनुमान जी से सुख समृधि की कामना भी करते हैं।