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भारत में अभी भी इस्तमाल हो रहे हैं ब्रिटिशकाल के ये पुल

Written By: India TV News Desk
Published : Aug 05, 2016 03:39 pm IST,  Updated : Aug 05, 2016 04:46 pm IST
हाल ही में मुंबई-गोवा हाइवे पर बना ब्रिटिश कालीन पुल टूटकर गिरने से बड़ा हादसा हुआ हैं। गौरतलब है कि, इस पुल का निर्माण करने वाली ब्रिटिश कंपनी ने 1974 में पत्र देकर हाईवे अथॉरिटी को यह जानकारी दे दी थी कि, इस पुल का निर्माण 1874 में हुआ था पुल अपनी 100 साल की उम्र पुरी कर चुका है। लेकिन इसके बाद भी 40 साल तक लगातार इस पुल का इस्तेमाल किया जाता रहा और ये हादसा हुआ। आपको बता दें कि, आज भी ऐसे ही और भी पुल है जो अपनी उम्र पुरी कर चुके हैं फिर भी उनका इस्तेमाल किया जा रहा है जहां कभी भी यह हादसा दोबारा दोहराया जा सकता है।
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हाल ही में मुंबई-गोवा हाइवे पर बना ब्रिटिश कालीन पुल टूटकर गिरने से बड़ा हादसा हुआ हैं। गौरतलब है कि, इस पुल का निर्माण करने वाली ब्रिटिश कंपनी ने 1974 में पत्र देकर हाईवे अथॉरिटी को यह जानकारी दे दी थी कि, इस पुल का निर्माण 1874 में हुआ था पुल अपनी 100 साल की उम्र पुरी कर चुका है। लेकिन इसके बाद भी 40 साल तक लगातार इस पुल का इस्तेमाल किया जाता रहा और ये हादसा हुआ। आपको बता दें कि, आज भी ऐसे ही और भी पुल है जो अपनी उम्र पुरी कर चुके हैं फिर भी उनका इस्तेमाल किया जा रहा है जहां कभी भी यह हादसा दोबारा दोहराया जा सकता है।
‌नर्मदा नदी के पुराने पुल- नर्मदा नदी के इस पुराने पुल को गढ़-मण्डला के राजा नरेन्द्र शाह ने सन 1680 के आसपास बनवाया था, पुल पर दोनों तरफ कोई सुरक्षा रेलिंग नहीं है इसपर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। जिससे खतरा बना रहता हैं।
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‌नर्मदा नदी के पुराने पुल- नर्मदा नदी के इस पुराने पुल को गढ़-मण्डला के राजा नरेन्द्र शाह ने सन 1680 के आसपास बनवाया था, पुल पर दोनों तरफ कोई सुरक्षा रेलिंग नहीं है इसपर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। जिससे खतरा बना रहता हैं।
कोरोनेशन पुल- पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग का यह कोरोनेशन पुल भी अंग्रेजों ने 1937 में बनवाया था।
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कोरोनेशन पुल- पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग का यह कोरोनेशन पुल भी अंग्रेजों ने 1937 में बनवाया था।
पम्बन पुल- तमिलनाडू के रामेश्वरम में स्थित पम्बन आइलैंड को जोड़ने वाला यह पुल भी 1914 में ब्रिटिश सरकार ने बनवाया था।
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पम्बन पुल- तमिलनाडू के रामेश्वरम में स्थित पम्बन आइलैंड को जोड़ने वाला यह पुल भी 1914 में ब्रिटिश सरकार ने बनवाया था।
पुराना नैनी पुल- उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर में यमुना नदी पर बना यह पुराना नैनी पुल अंग्रेजों ने 1865 में बनवाया था।
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पुराना नैनी पुल- उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर में यमुना नदी पर बना यह पुराना नैनी पुल अंग्रेजों ने 1865 में बनवाया था।
मालवीय पुल- ये मालवीय पुल उत्तर प्रदेश के शहर के वाराणसी में गंगा नदी पर स्थित है, जिसे 1887 में ब्रिटिश सरकार ने बनवाया था।
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मालवीय पुल- ये मालवीय पुल उत्तर प्रदेश के शहर के वाराणसी में गंगा नदी पर स्थित है, जिसे 1887 में ब्रिटिश सरकार ने बनवाया था।
कोलिवार पुल- बिहार की सोन नदी वाला यह पुल कोलीवार पुल के अलावा अब्दुल बारी पुल के नाम से भी जाना जाता है। यह 1862 में बना था जो की सबसे पुराने पुलों में से एक है।
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कोलिवार पुल- बिहार की सोन नदी वाला यह पुल कोलीवार पुल के अलावा अब्दुल बारी पुल के नाम से भी जाना जाता है। यह 1862 में बना था जो की सबसे पुराने पुलों में से एक है।
गोदावरी पुल- आंध्र प्रदेश की गोदावरी नदी पर बना यह पुल 1897 में बनना शुरू हुआ और 30 अगस्त 1900 में बना। ये पुल लगभग 116 सालों से इस्तेमाल में लाया जा रहा है।
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गोदावरी पुल- आंध्र प्रदेश की गोदावरी नदी पर बना यह पुल 1897 में बनना शुरू हुआ और 30 अगस्त 1900 में बना। ये पुल लगभग 116 सालों से इस्तेमाल में लाया जा रहा है।
जुबली पुल- यह पुल पश्चिम बंगाल के नैहाटी और बंदेल को जोड़ता है। हुगली नदी पर स्थित इस पुल को भी अंग्रेजों ने 1885 में बनवाया था।
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जुबली पुल- यह पुल पश्चिम बंगाल के नैहाटी और बंदेल को जोड़ता है। हुगली नदी पर स्थित इस पुल को भी अंग्रेजों ने 1885 में बनवाया था।
एलिस पुल- अहमदाबाद में साबरमती नदी पर बना यह पुल 1892 में आम जनता के लिए बनवाया गया था।
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एलिस पुल- अहमदाबाद में साबरमती नदी पर बना यह पुल 1892 में आम जनता के लिए बनवाया गया था।
हावड़ा पुल- वेस्ट बंगाल की हुगली नदी पर स्थित हावड़ा पुल को 1942 में अंग्रेजों ने बनवाया था।
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हावड़ा पुल- वेस्ट बंगाल की हुगली नदी पर स्थित हावड़ा पुल को 1942 में अंग्रेजों ने बनवाया था।
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