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360 के मैजिक नंबर से सिर्फ 6 कदम दूर NDA! क्या इस बार पास होगा डीलिमिटेशन बिल?

 Written By: Niraj Kumar @nirajkavikumar1
 Published : Jul 15, 2026 11:51 pm IST,  Updated : Jul 15, 2026 11:57 pm IST

डीलिमिटेशन (परिसीमन) बिल को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पिछले सत्र में मोदी सरकार दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाने के कारण यह विधेयक पारित नहीं करा सकी थी, लेकिन बदले राजनीतिक समीकरणों ने एक बार फिर इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।

NDA- India TV Hindi
एनडीए Image Source : X/@BJP4INDIA

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के शुरू होने से पहले डीलिमिटेशन (परिसीमन) बिल को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पिछले संसद सत्र में मोदी सरकार इस विधेयक को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण पारित नहीं करा सकी थी। उस समय सरकार को जरूरी 360 वोटों के मुकाबले 54 वोट कम पड़ गए थे। अब बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच माना जा रहा है कि सरकार एक बार फिर इस बिल को सदन में ला सकती है।

बदला हुआ है लोकसभा का गणित

लोकसभा में फिलहाल 540 सदस्य हैं और किसी भी संवैधानिक संशोधन के लिए 360 सांसदों का समर्थन जरूरी है। एनडीए के पास 298 सांसद हैं। यदि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी और उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसद सरकार के साथ आते हैं तो यह संख्या 324 तक पहुंच जाती है। इसके बावजूद सरकार बहुमत से 36 वोट दूर रहती है।

DMK और NCP(S) पर टिकी निगाहें

सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा है कि अगर डीएमके के 22 सांसद और शरद पवार की एनसीपी (शरद पवार) के 8 सांसद सरकार का समर्थन करते हैं तो एनडीए का आंकड़ा 354 तक पहुंच सकता है। हालांकि इसके बाद भी सरकार दो-तिहाई बहुमत से  6 वोट पीछे रहेगी। ऐसे में छोटे दलों और निर्दलीय सांसदों की भूमिका बेहद अहम हो सकती है।

सुप्रिया सुले ने किया 50% सीट बढ़ाने वाले फॉर्मूले का जिक्र

वहीं एनसीपी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने खुलासा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने पहले सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा कि अगर पूरे देश में समान रूप से 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव आता है तो इस पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह सदन में इस संबंध में आधिकारिक संशोधन (अमेंडमेंट) लाने के लिए भी तैयार हैं। सुप्रिया सुले ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही।

क्या INDIA गठबंधन में बढ़ेगी मुश्किल?

सुप्रिया सुले के इस बयान के बाद विपक्षी INDIA गठबंधन में नई चर्चा शुरू हो गई है। अब राजनीतिक नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या शरद पवार और डीएमके सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करेंगे या फिर विपक्ष की एकजुटता बरकरार रहेगी। हालांकि सुप्रिया सुले ने एनडीए में शामिल होने की अटकलों को पूरी तरह खारिज किया और कहा कि उनकी पार्टी INDIA गठबंधन के साथ मिलकर ही बड़े राजनीतिक फैसले लेगी।

मानसून सत्र पर सबकी नजर

अब सबकी नजर सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में यदि डीलिमिटेशन बिल पेश होता है तो यह मौजूदा राजनीतिक माहौल की सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि मोदी सरकार इस बार दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा हासिल कर पाती है या नहीं।

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