Published : Nov 11, 2024 08:27 pm IST, Updated : Nov 11, 2024 09:09 pm IST
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प्रयागराज में कुंभ मेला 2025 का आयोजन अगले साल 13 जनवरी, 2025 से 26 फरवरी के बीच होने जा रहा है। इसके लिए तैयारियां चरम पर हैं। खुद योगी आदित्यनाथ तैयारियों का जायजा ले चुके हैं। कुंभ मेला प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में लगता है।
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प्रयागराज में कुंभ मेला 2025 से पहले नगर प्रवेश जुलूस के दौरान किन्नर अखाड़े का एक सदस्य घोड़े पर सवार दिख रहा है। कुंभ में अलग-अलग अखाड़ों के संत शामिल होते हैं और पूरे मेले के दौरान यहीं रहते हैं। हर स्थान पर 12 साल के अंतराल में कुंभ मेले का आयोजन होता है।
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (एबीएपी) के महंत रवींद्र पुरी, राष्ट्रीय महासचिव और अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक, महंत हरि गिरि महाराज अन्य साधुओं के साथ प्रयागराज में कुंभ मेला 2025 से पहले मेला क्षेत्र का दौरा करते हुए। प्रयागराज में हर 12 साल में कुंभ का आयोजन होता है और इसके बीच छह साल में अर्धकुंभ आयोजित होता है।
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कुंभ मेले से पहले सड़क किनारे दीवारों को पौराणिक पेंटिंग से सजाया जा रहा है। इस तस्वीर में दीवार को कृष्णलीला (बाल्यकाल) से सजाया गया है। इसके अलावा शहर की साफ सफाई और आवागमन के लिए भी खास तैयारियां की गई हैं। भारतीय रेलवे कुंभ मेला के लिए कई स्पेशल ट्रेनें भी चलाएगा।
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महाकुंभ मेला 2025 की तैयारियों के तहत गंगा नदी पर एक अस्थायी पंटून पुल का निर्माण किया जा रहा है। यह पुल पानी में तैरता रहता है। 2019 में गंगा और यमुना के आर-पार जाने के लिए 22 पंटून पुल बनाए गए थे। पंटून पुल में हवा भरे पीपों के ऊपर रास्ता बनाया जाता है। हालांकि, यह सिर्फ इंसानों और छोटे वाहनों के लिए ही होता है।
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प्रयागराज में आगामी ‘महाकुंभ’ मेले की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। तस्वीर में गंगा नदी में काम करते मजदूर। महाकुंभ मेला धार्मिक आयोजन होने के साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का बड़ा साधन होता है। यहां दुकान लगाने वाले लोगों की जमकर कमाई होती है। साथ ही मजदूरों को भी अभी से काफी काम मिल रहा है। मेला खत्म होने के बाद साफ सफाई करने वाले लोगों को भी अच्छा रोजगार मिलता है।
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कुंभ मेला अधिकारी आईएएस विजय किरण आनंद, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (एबीएपी) के साधु और अन्य लोग ‘महाकुंभ 2025’ से पहले भूमि आवंटन के लिए कुंभ मेला प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक के बाद मेला क्षेत्र का दौरा करते हुए। मेले की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए बस इसी साल का समय बचा है। इसी वजह से प्रशासन तेजी से काम कर रहा है। यूपी सरकार इस कुंभ मेले को 2019 से भी कई गुना बेहतर तरीके से आयोजित करने की तैयारी कर रही है।
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प्रयागराज में तीन नदियों गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम पर ‘महाकुंभ मेले’ से पहले एक पंटून पुल (तैरता हुआ पुल) बनाया जा रहा है। धार्मिक लिहाज से त्रिवेणी संगम का महत्व बहुत ज्यादा है। करोड़ों भक्त कुंभ मेले के दौरान त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने के लिए आते हैं। इसी वजह से संगम के पास लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए खास तैयारी की जा रही है।
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कुंभ मेले की तैयारियों के बीच बिजली के खंभे ठीक किए जा रहे हैं और रास्तों पर बल्ब लगाए जा रहे हैं। तस्वीर में विद्युतकर्मी बिजली के खंभे में तार को ठीक करता दिख रहा है। कुंभ मेले का क्षेत्र लगभग आठ हजार एकड़ का होता है। इसमें हजारों दुकाने होते हैं और कई घाट होते हैं, जहां ऋद्धालु स्नान करते हैं। साधु-संतों के स्नान के लिए भी अलग घाट होते हैं। इस मेले में करोड़ों लोग शामिल होते हैं। ऐसे में सुरक्षा के लिहाज से और लोगों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी की जाती है।
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प्रयागराज के रास्तों को 40 हजार रिचार्जेबल बल्ब से सजाया जा रहा है। ये बल्ब बिजली जाने पर भी रोशनी देते रहेंगे। इसके लिए लगभग 2.7 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। रिचार्जेबल बल्ब के अंदर बैटरी लगी होती है। बिजली रहने पर ये बल्ब रोशनी देने के साथ चार्ज भी होते रहते हैं और बिजली जाने पर बैटरी की मदद से रोशनी देते हैं। बाजार में यह लगभग 700 रुपये में मिल जाते हैं। (प्रतीकात्मक तस्वीर)