Published : Aug 31, 2025 02:07 pm IST, Updated : Aug 31, 2025 02:11 pm IST
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उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं ने कहर बरपा रखा है। भारी बारिश, फ्लैश फ्लड, क्लाउड बर्स्ट और भूस्खलन से राज्य में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। यह तस्वीरें केवल टूटे घरों और खिसके पहाड़ों की नहीं हैं, बल्कि उन सपनों की हैं जो बरसों की मेहनत से खड़े हुए थे और एक पल में मलबे में बदल गए।
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पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा दरककर सीधा बाजार की तरफ लुढ़क आया है। हर रंग-बिरंगे मकान के पीछे एक परिवार है, जिनके माथे पर इस वक्त केवल एक सवाल है – कब तक सुरक्षित हैं हम?
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पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा दरककर सीधा बाजार की तरफ लुढ़क आया है। मकान के पीछे एक परिवार है, जिनके माथे पर इस वक्त केवल एक सवाल है – कब तक सुरक्षित हैं हम?
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यह किसी गरीब परिवार का घर है, जो अब केवल मलबा बनकर रह गया। टूटी दीवारें, बिखरे सामान और आंसू भरी आंखे। यह सब उस त्रासदी का गवाह हैं, जो शायद प्रशासनिक कागजों पर केवल “भूधंसाव” कहकर दर्ज हो जाएगी, लेकिन जिन लोगों ने अपना सब कुछ गंवाया है, उनके लिए यह जीवन भर का सदमा है।
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चमोली के कर्णप्रयाग, सिमली में देर रात से हो रही भारी बारिश के कारण आटागाड गदेरे पर बने पुल के पास एक कार मलबे में फंस गई। स्थानीय प्रशासन और राहत टीमों ने स्थिति को संभालने के लिए त्वरित कार्रवाई की और कार को निकालने के लिए जेसीबी मशीन मंगवाई गई।
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चमोली में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण क्षेत्र में कई जगहों पर नुकसान की खबरें हैं, और प्रशासन राहत-बचाव कार्यों में जुटा है। प्रशासन लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील कर रहा है।
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जोशीमठ में नीति घाटी को जोड़ने वाला पुल तमक रात्री 2 बजे अधिक जल प्रलय आने से ध्वस्त हो गया। करीब 15 गांवों का आपसी संपर्क से टूट गया। इलाके में बिजली भी गुल है।
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उत्तरकाशी में रातभर हुई भारी बारिश के चलते स्यानाचट्टी क्षेत्र में यमुना नदी का बढ़ा जलस्तर। नेशनल हाइवे पर बने पुल के ऊपर से यमुना नदी बह रही है।