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Kitchen Sink Placement: किचन में सिंक कहां होना चाहिए? जानिए क्या कहता है वास्तु

Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
Published : Mar 12, 2026 04:54 pm IST,  Updated : Mar 12, 2026 04:54 pm IST
किचन में मौजूद हर चीज का स्थान घर के माहौल को प्रभावित करता है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण चीज है किचन सिंक, जो पानी से जुड़ा होता है। वास्तु में जल तत्व का विशेष महत्व बताया गया है। रसोई में सिंक सही दिशा में हो तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। वहीं, गलत दिशा में सिंक होने से तनाव, आर्थिक परेशानी और सेहत संबंधी समस्याएं बढ़ती हैं। आइए जानते हैं किचन सिंक की सही दिशा और इससे जुड़े जरूरी नियम।
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किचन में मौजूद हर चीज का स्थान घर के माहौल को प्रभावित करता है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण चीज है किचन सिंक, जो पानी से जुड़ा होता है। वास्तु में जल तत्व का विशेष महत्व बताया गया है। रसोई में सिंक सही दिशा में हो तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। वहीं, गलत दिशा में सिंक होने से तनाव, आर्थिक परेशानी और सेहत संबंधी समस्याएं बढ़ती हैं। आइए जानते हैं किचन सिंक की सही दिशा और इससे जुड़े जरूरी नियम।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, किचन सिंक लगाने के लिए उत्तर पूर्व दिशा यानी ईशान कोण सबसे शुभ माना जाता है। यह दिशा जल तत्व से जुड़ी होती है। इस दिशा में सिंक होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। साथ ही समृद्धि और सुख शांति में भी बढ़ोतरी होती है।
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वास्तु शास्त्र के अनुसार, किचन सिंक लगाने के लिए उत्तर पूर्व दिशा यानी ईशान कोण सबसे शुभ माना जाता है। यह दिशा जल तत्व से जुड़ी होती है। इस दिशा में सिंक होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। साथ ही समृद्धि और सुख शांति में भी बढ़ोतरी होती है।
किचन डिजाइन करते समय सिंक की दिशा और सही जगह का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। वास्तु अनुसार, सिंक इस तरह से लगाया जाना चाहिए कि बर्तन धोते या सिंक का यूज करते समय व्यक्ति का चेहरा उत्तर दिशा की ओर रहे। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा की ओर मुख करके काम करने से मानसिक शांति बनी रहती है और घर का माहौल भी सकारात्मक रहता है।
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किचन डिजाइन करते समय सिंक की दिशा और सही जगह का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। वास्तु अनुसार, सिंक इस तरह से लगाया जाना चाहिए कि बर्तन धोते या सिंक का यूज करते समय व्यक्ति का चेहरा उत्तर दिशा की ओर रहे। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा की ओर मुख करके काम करने से मानसिक शांति बनी रहती है और घर का माहौल भी सकारात्मक रहता है।
वास्तु मान्यताओं के अनुसार दक्षिण पश्चिम दिशा में किचन सिंक लगाना अशुभ माना जाता है। इस दिशा में सिंक होने से घर में तनाव बढ़ सकता है और परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद भी पैदा हो सकते हैं। इसके अलावा इससे आर्थिक अस्थिरता भी देखने को मिल सकती है।
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वास्तु मान्यताओं के अनुसार दक्षिण पश्चिम दिशा में किचन सिंक लगाना अशुभ माना जाता है। इस दिशा में सिंक होने से घर में तनाव बढ़ सकता है और परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद भी पैदा हो सकते हैं। इसके अलावा इससे आर्थिक अस्थिरता भी देखने को मिल सकती है।
किचन में सिंक और चूल्हे को बहुत पास रखना भी सही नहीं माना जाता। चूल्हा अग्नि तत्व का प्रतीक होता है जबकि सिंक जल तत्व से जुड़ा है। आग और पानी को पास रखने से ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है। इसलिए सिंक और चूल्हे के बीच कम से कम दो से तीन फीट की दूरी रखना बेहतर माना जाता है।
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किचन में सिंक और चूल्हे को बहुत पास रखना भी सही नहीं माना जाता। चूल्हा अग्नि तत्व का प्रतीक होता है जबकि सिंक जल तत्व से जुड़ा है। आग और पानी को पास रखने से ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है। इसलिए सिंक और चूल्हे के बीच कम से कम दो से तीन फीट की दूरी रखना बेहतर माना जाता है।
अगर किचन में उत्तर पूर्व दिशा में सिंक लगाना संभव न हो तो उत्तर दिशा को दूसरा अच्छा विकल्प माना जाता है। इसके अलावा पूर्व दिशा में भी सिंक लगाया जा सकता है। ये दिशाएं भी जल तत्व के लिए अनुकूल मानी जाती हैं और सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखने में मदद करती हैं।
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अगर किचन में उत्तर पूर्व दिशा में सिंक लगाना संभव न हो तो उत्तर दिशा को दूसरा अच्छा विकल्प माना जाता है। इसके अलावा पूर्व दिशा में भी सिंक लगाया जा सकता है। ये दिशाएं भी जल तत्व के लिए अनुकूल मानी जाती हैं और सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखने में मदद करती हैं।
वास्तु के अनुसार, सिंक को कभी भी किचन के बिल्कुल बीच में नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि इससे ऊर्जा का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि सिंक के नीचे कूड़ा जमा न हो और सिंक के आसपास साफ सफाई बनी रहे। साफ और व्यवस्थित सिंक क्षेत्र घर में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देता है और परिवार में सामंजस्य बनाए रखने में मदद करता है।
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वास्तु के अनुसार, सिंक को कभी भी किचन के बिल्कुल बीच में नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि इससे ऊर्जा का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि सिंक के नीचे कूड़ा जमा न हो और सिंक के आसपास साफ सफाई बनी रहे। साफ और व्यवस्थित सिंक क्षेत्र घर में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देता है और परिवार में सामंजस्य बनाए रखने में मदद करता है।
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