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Malmas: मलमास में कौन से शुभ कार्य किए जा सकते हैं?

Published : May 20, 2026 02:26 pm IST,  Updated : May 20, 2026 02:26 pm IST
मलमास को ज्यादातर लोग अशुभ महीना मानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये सबसे पावन महीना होता है। भले ही इस महीने में शादी-ब्याह, मुंडन संस्कार जैसे तमाम मांगलिक कार्यों को करने की मनाही हो लेकिन फिर भी कुछ ऐसे शुभ कार्य हैं जिन्हें इस दौरान करने से आम दिनों के मुकाबले 10 गुना अधिक फल मिलता है। बता दें मलमास यानी अधिक मास इस साल 17 मई से 15 जून तक रहेगा। चलिए जानते हैं इस महीने में किन कार्यों को करना शुभ होता है।
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मलमास को ज्यादातर लोग अशुभ महीना मानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये सबसे पावन महीना होता है। भले ही इस महीने में शादी-ब्याह, मुंडन संस्कार जैसे तमाम मांगलिक कार्यों को करने की मनाही हो लेकिन फिर भी कुछ ऐसे शुभ कार्य हैं जिन्हें इस दौरान करने से आम दिनों के मुकाबले 10 गुना अधिक फल मिलता है। बता दें मलमास यानी अधिक मास इस साल 17 मई से 15 जून तक रहेगा। चलिए जानते हैं इस महीने में किन कार्यों को करना शुभ होता है।
आध्यात्मिक साधना: मलमास भगवान विष्णु और श्री कृष्ण भगवान का प्रिय महीना माना जाता है। ऐसे में ये महीना आध्यात्मिक साधना के लिए बेहद उत्तम होता है। इस महीने में गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना बेहद पुण्य दायी माना जाता है।
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आध्यात्मिक साधना: मलमास भगवान विष्णु और श्री कृष्ण भगवान का प्रिय महीना माना जाता है। ऐसे में ये महीना आध्यात्मिक साधना के लिए बेहद उत्तम होता है। इस महीने में गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना बेहद पुण्य दायी माना जाता है।
दान-पुण्य: कहते हैं मलमास में किए गए दान का पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। यही कारण है कि इस दौरान लोग ज्यादा से ज्यादा दान करते हैं। इस महीने में मालपुआ, कपड़े, अनाज, घी, तांबे के बर्तन और धार्मिक पुस्तकों का दान बेहद शुभ माना गया है। इसके अलावा इस महीने जरूरतमंदों को खाना खिलाने का भी विशेष महत्व होता है।
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दान-पुण्य: कहते हैं मलमास में किए गए दान का पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। यही कारण है कि इस दौरान लोग ज्यादा से ज्यादा दान करते हैं। इस महीने में मालपुआ, कपड़े, अनाज, घी, तांबे के बर्तन और धार्मिक पुस्तकों का दान बेहद शुभ माना गया है। इसके अलावा इस महीने जरूरतमंदों को खाना खिलाने का भी विशेष महत्व होता है।
तीर्थ यात्रा और नदी स्नान: ये पावन महीना तीर्थ यात्रा के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। कहते हैं इस महीने में पवित्र नदी में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।
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तीर्थ यात्रा और नदी स्नान: ये पावन महीना तीर्थ यात्रा के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। कहते हैं इस महीने में पवित्र नदी में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।
कथा का पाठ: इस महीने में भगवान सत्यनारायण की कथा, भगवद्गीता का पाठ और रामायण पढ़ना बेहद शुभ माना जाता है। कहते हैं इससे जीवन में सुख-शांति आती है और पितृ दोष से भी राहत मिल जाती है।
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कथा का पाठ: इस महीने में भगवान सत्यनारायण की कथा, भगवद्गीता का पाठ और रामायण पढ़ना बेहद शुभ माना जाता है। कहते हैं इससे जीवन में सुख-शांति आती है और पितृ दोष से भी राहत मिल जाती है।
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