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बुजुर्गों को निशाना बना रहे साइबर ठग, गुजरात के इन 3 लोगों को लगने वाला था करोड़ों का चूना, ऐसे बची जिंदगीभर की कमाई

 Reported By: Nirnay Kapoor Edited By: Rituraj Tripathi
 Published : Dec 23, 2025 11:37 pm IST,  Updated : Dec 23, 2025 11:37 pm IST

साइबर ठगों ने गुजरात के तीन लोगों को ठगने की कोशिश की लेकिन सतर्कता की वजह से इन लोगों की करोड़ों की पूंजी ठगों के हाथ में जाने से बच गई।

Cyber ​​fraud- India TV Hindi
साइबर ठगों ने रमेश चंद्र पटेल, मनुभाई पटेल और ज्योत्सना बेन को ठगने की कोशिश की Image Source : REPORTER INPUT

अहमदाबाद: साइबर ठगी एक गंभीर मामला है और देश में बड़ी संख्या में लोग इसका शिकार हो रहे हैं। हालही में साइबर ठगी का शिकार हुए पंजाब के पूर्व IPS अफसर अमर सिंह चहल की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। चहल ने सोमवार को खुद को गोली मारकर सुसाइड करने की कोशिश की थी। इसी तरह के अन्य मामले भी हैं। 

एक मामला गुजरात के मेहसाणा से है, जिसमें रमेश चंद्र पटेल नाम के एक शख्स को 9 दिन तक डिजिटल अरेस्ट करके साइबर ठगों ने उनके घर में ही कैद कर दिया गया। दूसरा मामला मेहसाणा के ही मनुभाई पटेल का है और तीसरा मामला अहमदाबाद की ज्योत्सना बेन पटेल का है। इन मामलों में साइबर ठगों ने बुजुर्गों को टारगेट किया लेकिन पुलिस, परिवार और बैंक कर्मचारियों की सतर्कता से इन बुजुर्गों की जिंदगीभर की कमाई लुटने से बच गई।

क्या है मेहसाणा के रमेश चंद्र पटेल का मामला?

मेहसाणा के रमेश चंद्र पटेल को 9 दिन तक डिजिटल अरेस्ट करके उनके घर में ही कैद कर दिया गया। 12 दिसंबर को उनके फोन पर मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर की तरफ से कॉल आई। उन्हें कहा गया कि मुंबई क्राइम ब्रांच ने उनका फोन बंद करने का ऑर्डर दिया है। इसी कॉल को दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया गया। यहां मौजूद एक महिला ने वीडियो कॉल पर उन्हें बताया कि उनके नाम पर मुंबई में एक बैंक अकाउंट खोला गया है। इस अकाउंट से पाकिस्तान, अफगानिस्तान जैसे देशों में टेरर फंडिंग की गई। उनके ऊपर केस दर्ज किया गया है।

उनसे कहा गया कि उनके खिलाफ अरेस्ट वॉरंट जारी होने वाला है। ठगों ने रमेश पटेल से कहा कि वॉरंट से बचने के लिए वो सिक्योरिटी के तौर पर पैसा जमा कर दें। पैसा जमा करने के लिए उन्होंने वक्त मांगा तो उन्हें इस शर्त पर वक्त मिला कि वो फोन नहीं काटेंगे। चूंकि वो बुजुर्ग हैं इसलिए उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें घर पर ही कस्टडी में रखा जाएगा। 9 दिन तक रमेश पटेल डिजिटल अरेस्ट में रहे। उन्होंने 65 लाख की रकम भी जमा कर ली लेकिन नौवें दिन सुबह उन्होंने अखबार में साइबर ठगी के केस के बारे में पढ़ा, उसे पढ़कर वो बिना फोन काटे, ठगों को बताए बिना साइबर थाने पहुंचे और पुलिस को सब जानकारी दी। जब पुलिस उनके साथ घर पहुंची और रमेश पटेल की जीवनभर की कमाई ठगों के हाथ में जाने से बचा ली।

मेहसाणा के ही मनुभाई पटेल का केस पढ़कर बचे रमेश पटेल

रमेश पटेल को अखबार में जिस खबर को पढ़कर ये अहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हो रही है, वो केस मेहसाणा के डॉक्टर मनुभाई पटेल का है। 75 साल के डॉक्टर पटेल रिटायर्ड मेडिकल ऑफिसर हैं। अपनी क्लीनिक चलाते हैं। 17 तारीख को उनके पास भी वैसी ही कॉल आई जैसी रमेश पटेल को की गई।

ठगों ने उनसे कहा कि उनके आधार कार्ड और बैंक अकाउंट्स से मुंबई में फ्रॉड हुआ है। मनी लॉन्ड्रिंग के 40 केस दर्ज किए गए हैं। इसलिए जांच पूरी होने तक उन्हें घर पर ही अरेस्ट रखा जाएगा। तीन दिन तक डॉक्टर पटेल अपने घर से नहीं निकले। उनके क्लीनिक के बगल में मेडिकल स्टोर चलाने वाले शख्स को शक हुआ तो उसने उनके बेटे को इन्फॉर्म किया। बेटे ने पुलिस को जानकारी दी। जब पुलिस डॉक्टर मनु पटेल के घर पहुंची तो पता चला कि वो डिजिटल अरेस्ट हैं। मनु भाई पटेल दो घंटे बाद 1 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन ठगों के खाते में करने वाले थे, लेकिन पुलिस ने वहां पहुंचकर उन्हें बचा लिया।

अहमदाबाद की ज्योत्सना बेन भी बाल-बाल बचीं

अहमदाबाद की ज्योत्सना बेन पटेल का केस हैरान करने वाला है। स्कैमर्स ने उन्हें उनका आधार नंबर, मोबाइल नंबर और ATM कार्ड का नंबर बताया और फिर उनसे कहा कि उनके आधार नंबर पर स्कैम हुआ है। चूंकि सारी डिटेल सही थी इसलिए ज्योत्सना बेन उनके झांसे में आ गईं।

इसके बाद साइबर अपराधियों ने उन्हें एक अकाउंट नंबर दिया और उसमें पैसा ट्रांसफर करने को कहा। ज्योत्सना बेन बैंक पहुंची, उन्होंने अपने फिक्स डिपॉजिट तुड़वाए। अलग-अलग अकाउंट्स में जितना पैसा था, वो एक अकाउंट में शिफ्ट किया। इसके बाद उन्होंने बैंक कर्मचारी से सारा पैसा RTGS करने के लिए कहा। ज्योत्सना बेन के हावभाव देखकर मैनेजर को शक हुआ। उन्होंने जांच पड़ताल की। पैसा ट्रांसफर करने से मना किया तो ज्योत्सना बेन, बैंक मैनेजर से ही लड़ पड़ीं।

नौबत हाथापाई की आ गई। इसके बाद मैनेजर ने पुलिस को बुलाया लेकिन ज्योत्सना बेन ने असली पुलिस को भी नकली समझ लिया। कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। जब वो किसी तरह नहीं मानीं तो मैनेजर ने उन्हें बैठाकर डिजिटल फ्रॉड को लेकर जागरूक करने वाली वीडियो दिखाई। तब कहीं जाकर ज्योत्सना पटेल को समझ आया कि उनके साथ ठगी हो रही थी। इस तरह अहमदाबाद के मणिनगर की ज्योत्सना बेन के 33 लाख रुपए साइबर ठगों के हाथ में जाने से बच गए।

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