गुजरात के दाहोद जिले में मनरेगा योजना में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। देवगढ़ बारिया तालुका के धनपुर और तीन अन्य गांवों में 2021 से 2025 के बीच सड़कों के निर्माण में गड़बड़ी पाई गई है। आरोप है कि 35 एजेंसियों ने मिलकर 71 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला किया है।
बलवंत खाबड़ और टीडीओ गिरफ्तार
इस मामले की जांच डीएसपी भंडारी कर रहे थे। शिकायत में पंचायत मंत्री बच्चूभाई खाबड़ के बेटों बलवंत खाबड़ और किरण खाबड़ का नाम भी शामिल था। बुधवार को बलवंत खाबड़ ने दाहोद कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी, जिसे उन्होंने बाद में वापस ले लिया। इसके बाद आज खबर आई है कि बलवंत खाबड़ और टीडीओ (तालुका विकास अधिकारी) दर्शन पटेल को गिरफ्तार कर लिया गया है।
दरअसल, जिन 35 एजेंसियों पर आरोप है, उनमें से दो- राज ट्रेडर्स और राज कंस्ट्रक्शन, मंत्री बच्चूभाई खाबड़ के बेटों बलवंत और किरण खाबड़ के नाम पर ही हैं। यह घोटाला इस साल अप्रैल में जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (DRDA) ने उजागर किया था, जिसके बाद से जांच चल रही थी।
क्या है मनरेगा योजना?
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) भारत सरकार की ओर से 7 सितंबर, 2005 को लागू किया गया एक कानून है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हैं, एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का गारंटीड मजदूरी रोजगार प्रदान करना है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना, टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण करना और महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों का सामाजिक समावेशन सुनिश्चित करना है। मनरेगा मुख्य रूप से ग्राम पंचायतों की ओर से लागू किया जाता है और ठेकेदारों की भागीदारी प्रतिबंधित है।
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