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म्यांमार और थाईलैंड में नौकरी के नाम पर झांसा, अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़, वडोदरा से महिला गिरफ्तार

 Edited By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Nov 25, 2025 11:50 pm IST,  Updated : Nov 25, 2025 11:54 pm IST

जांच में खुलासा हुआ है कि पीड़ितों के पास से पासपोर्ट, मोबाइल फोन और सभी पहचान पत्र संबंधित देशों में पहुंचते ही जब्त कर लिए गए। इसके बाद उन्हें म्यांमार की मोई नदी सहित अवैध रास्तों से सीमा पार ले जाया गया।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : FREEPIK

गुजरात पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर दासता गिरोह के लिए काम करने के आरोप में वडोदरा से एक महिला को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि यह गिरोह नौकरी के इच्छुक लोगों को ‘साइबर दासता’ के लिए म्यांमार और थाईलैंड भेजता है। इस मामले में गिरोह के सरगना सहित कम से कम 5 लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। 

आरोपी पायल चौहान को किया गया गिरफ्तार

गुजरात अपराध जांच विभाग (CID-क्राइम) के साइबर सेंटर फॉर एक्सीलेंस ने मंगलवार को कहा कि आरोपी पायल चौहान ने कथित तौर पर राज्य के लोगों को विदेशों में उच्च वेतन वाली नौकरियों का प्रलोभन दिया और उन्हें दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में ले गई, जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह के लिए काम करने की खातिर मजबूर किया गया। 

एजेंट के रूप में करती थी काम

शुरुआती जांच में खुलासा हुआ कि वडोदरा शहर के गोरवा इलाके की रहने वाली चौहान, नीलेश उर्फ ​​नील पुरोहित के एजेंट के रूप में काम करती थी, जो गुजरात में इस साइबर दासता नेटवर्क का कथित सरगना था। सीआईडी-क्राइम ने पुरोहित को गत सप्ताह गिरफ्तार किया था। 

थाईलैंड और म्यांमार में काम का दिया जाता था लालच

पुलिस के मुताबिक पुरोहित  म्यांमार और कंबोडिया में ‘साइबर दासता’ के लिए भारतीय कामगार भेजता था। यह गिरोह थाईलैंड और म्यांमार में आकर्षक डेटा एंट्री की नौकरियों का प्रलोभन देता था। नौकरी के इच्छुक लोगों के सहमत होने पर, उनके टिकट की व्यवस्था की जाती थी और उन देशों के हवाई अड्डों पर पहुंचने पर, उन्हें एक चीनी साइबर अपराध गिरोह से जुड़े एजेंटों को सौंप दिया जाता था। 

पीड़ितों के पासपोर्ट, मोबाइल फोन और पहचान पत्र किए गए जब्त

पाकिस्तानी एजेंट भी म्यांमार और थाईलैंड में मानव तस्करी में संलिप्त थे। पीड़ितों के पासपोर्ट, मोबाइल फोन और सभी पहचान पत्र संबंधित देशों में पहुंचते ही जब्त कर लिए गए। इसके बाद, उन्हें म्यांमार की मोई नदी सहित अवैध रास्तों से सीमा पार ले जाया गया और केके पार्क जैसे इलाकों में बंधक बना लिया गया, जो आपराधिक समूहों द्वारा संचालित साइबर अपराध के केंद्र हैं। 

शिविरों में फंसे कई भारतीयों को बचाया गया

पिछले तीन सालों में भारत, थाईलैंड और म्यांमार सरकार के अधिकारियों के संयुक्त अभियान के माध्यम से इन शिविरों में फंसे कई भारतीयों को बचाया गया है। विदेश मंत्रालय, इंटरपोल, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), केंद्रीय खुफिया ब्यूरो (आईबी) और राज्य पुलिस के समन्वित प्रयासों से लगभग 4,000 भारतीय नागरिकों को स्वदेश वापस लाया गया। पुलिस ने कहा कि बचाए गए कई पीड़ितों ने अधिकारियों को बताया कि उन्हें नील पुरोहित और पायल चौहान सहित अन्य एजेंटों ने फंसाया था। (भाषा के इनपुट के साथ)

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