Thursday, July 25, 2024
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"मेरी दादी PM थीं, पिता पीएम थे..." राहुल गांधी बोले- लोअर कास्ट के खिलाफ है पूरा सिस्टम, जब से पैदा हुआ हूं, इसी...

Lok Sabha Elections 2024: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पूरे सिस्टम को लोअर कास्ट के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि जब से पैदा हुआ हूं, इसी सिस्टम के अंदर बैठा हूं। उन्होंने कहा कि मेरी दादी पीएम थीं, पिता पीएम थे, मनमोहन सिंह के समय भी पीएमओ में आता जाता था, इस सिस्टम को अंदर से जानता हूं।

Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
Published on: May 23, 2024 6:52 IST
राहुल गांधी- India TV Hindi
Image Source : PTI राहुल गांधी

Lok Sabha Elections 2024: कांग्रेस सांसद और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि व्यवस्था तंत्र लोअर के खिलाफ है और वह इसे अंदर से जानते हैं, क्योंकि उनकी दादी एवं पिता प्रधानमंत्री थे। उन्होंने कहा कि उन्हें यह इसलिए भी पता है, क्योंकि बाद में जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तो वह उनके आवास जाया करते थे। राहुल गांधी ने कहा कि दलितों, ओबीसी, आदिवासी और अल्पसंख्यकों समेत देश की 90 प्रतिशत आबादी का देश के विमर्श एवं सत्ता संरचना में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का लक्ष्य देश की प्रगति में इस 90 प्रतिशत जनसंख्या की सहभागिता सुनिश्चित करना है।

पंचकूला में बुधवार शाम एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने यह कहते हुए भाजपा पर निशाना साधा कि बीजेपी का 'अंत' आ रहा है। उन्होंने कहा, "मैं जब 19 जून, 1970 को पैदा हुआ, तब से ही मैं व्यवस्था के अंदर रहा हूं। मैं अंदर से व्यवस्था को समझता हूं। आप मुझसे व्यवस्था को छिपा नहीं सकते हैं।" कांग्रेस नेता ने दावा किया कि चूंकि वह व्यवस्था के अंदर से आए हैं, इसलिए उन्हें पता है कि यह कैसे चलती है, किसका पक्ष लेती है, किस तरह पक्ष लेती है, किसको यह सुरक्षा प्रदान करती है और यह किस पर हमला करती है। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री आवस में, जब मेरी दादी और दिवंगत पिता प्रधानमंत्री थे और बाद में जब डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब भी मैं वहां जाया करता था, इसलिए मैं अंदर से व्यवस्था को जानता हूं। मैं कह रहा हूं कि यह व्यवस्था निचली जातियों के खिलाफ है, हर स्तर पर भंयकर तरीके से है।" 

"मैंने सभी आंकड़े बाहर निकाले हैं"

कांग्रेस नेता ने कहा कि चाहे कॉर्पोरेट जगत हो या मीडिया या नौकरशाही या शिक्षा जगत या न्यायपालिका या सेना या कहीं और इन 90 प्रतिशत लोगों की भागीदारी नहीं है और इस सिलसिले में प्रतिभा की बहस खड़ी कर दी जाती है। उन्होंने कहा, "यह कैसे हो सकता है कि 90 प्रतिशत के पास प्रतिभा नहीं है? ऐसा नहीं हो सकता है, इसलिए व्यवस्था में अवश्य ही कुछ कमी तो है। मैंने यह ढूंढ़ा है। मैंने सभी आंकड़े बाहर निकाले हैं।" गांधी ने दावा किया, "मीडिया में वरिष्ठ एंकर, वरिष्ठ इनफ्लूएंसर, मीडिया मालिक, वरिष्ठ प्रबंधक- एक भी दलित, आदिवासी या ओबीसी नहीं है। मुझे एक भी नहीं मिला।" 

"यह संविधान समानता का भी दस्तावेज"

हाथ में संविधान की प्रति लिए पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह महज एक किताब नहीं है। उन्होंने कहा, "यदि आप इसे गौर से देखते हैं तो यह सत्ता का हस्तांतरण दस्तावेज है। यह सत्ता हस्तांतरण प्रक्रिया है, महज एक किताब नहीं है।" उन्होंने कहा, "सत्ता का हस्तांतरण 1947 में प्रारंभ हुआ था। यदि आप भारत की जनसंख्या को देखें, सर्वेक्षण कराएं तो आप जानेंगे कि करीब 90 प्रतिशत जनसंख्या दलित, आदिवासी, ओबीसी, अल्पसंख्यक है। यह एक तथ्य है जिसे चुनौती नहीं दी जा सकती।" गांधी ने कहा कि संविधान में स्पष्ट लिखा है कि सभी व्यक्तियों के साथ समान बर्ताव होना चाहिए, यह संविधान समानता का भी दस्तावेज है। उन्होंने कहा, "लेकिन मेरा प्रश्न है कि 90 प्रतिशत जनसंख्या की भागीदारी क्या है? यदि आप भारत के विमर्श और सत्ता संरचना को देखते हैं, चाहे कॉर्पोरेट ढांचा हो या मीडिया के दोस्त हों, चाहे यह नौकरशाही का ढांचा हो, तो वहां इस 90 प्रतिशत जनसंख्या की आवाज नहीं है।"

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